ये पढ़ कर आप भी कहने लगेंगे कि नाथी का बाड़ा बन चुकी है सिरोही नगर परिषद 

सिरोही नगर परिषद की सफाई समिति की बैठक में मौजूद समिति पदाधिकारी और सदस्य।
सिरोही नगर परिषद की सफाई समिति की बैठक में मौजूद समिति पदाधिकारी और सदस्य।

सिरोही। राजस्थान में नाथी का बाड़ा शब्द शिक्षा मंत्री ने पॉपुलर किया। अब उसे सिरोही कांग्रेस आत्मसात कर चुकी लगती है। क्योंकि यहां भी कई सफाई कर्मियों को तो भर भर तनख्वाह दे दी जा रही है पर ये नहीं पूछा जा रहा है, कि भाई तुम हो कहां और काम कहां कर रहे हो। सिरोही नगर परिषद में 15 स्थायी सफाई कर्मचारियों का कोई अता पता नहीं हैं।

सफाई समिति की बैठक के दौरान एसआई ये बताने में विफल रहे कि ये 15 सफाई कर्मचारी कहां नदारद हैं। ये बात अलग है कि सफाई समिति सदस्य मनोज पुरोहित के इन 15 कर्मचारियों का हिसाब किताब देने का कहने पर आयुक्त ने इस मुद्दे को आगे सरका दिया। तो इसी बीच समिति सदस्य भाजपा पार्षद मनिदेवी ये कार्मिकों की हाजिरी में अनियमितता की बात बोल गईं।

कांग्रेस के बोर्ड में आज सफाई समिति की बैठक के दौरान अजब स्थिति आई। समिति अध्यक्ष जीतू सिंघी ने जब अधिकारियों के घरों और दफ्तरों में लगे सफाई कार्मिकों को बुलवाने की बात कहते हुए एसआई से किस जगह कितने कार्मिक लगे हैं इसकी सूचना मांगी तो एसआई एक लिस्ट लेकर आयुक्त के पास पहुंच गए।

आयुक्त ने लिस्ट को पढ़कर कहा कि अधिकारियों के घरों में कोई कार्मिक नहीं लगा है, सिर्फ 5 कार्मिक चुनाव शाखा में लगे हैं। लेकिन, आयुक्त और एसआई के इस संयुक्त प्रयास पर कांग्रेस पार्षद मनोज पुरोहित ने पानी फेर दिया। पुरोहित ने हिसाब मांग लिया कि कितने सफाई कार्मिक कहां कहां लगे हैं बताइये।

इस पर एसआई ने बताया कि नगर परिषद में 114 स्थायी कर्मचारी हैं। इनमे से सिर्फ 66 सफाई कार्य में लगे हैं। शेष का हिसाब मांगने पर एसआई ने गैर सफाई कार्य में लगे कार्मिकों की संख्या बताई, लेकिन ये गिनती 99 से आगे नहीं बढ़ पाई। 15 स्थायी सफाई कर्मचारी कहां है वो नहीं बता पाए।

ये हाल है सिरोही नगर परिषद सफाई की मॉनिटरिंग के। 2018 में नियुक्त इन कार्मिकों के हाथ में करीब 26 हजार रुपये तनख्वाह आती है। इनकी करीब 3 लाख 90 हजार रुपये से ज्यादा तनख्वाह उठ जा रही है और उनके बारे में नगर परिषद बोर्ड को पता नहीं है तो कहीं ये ही कार्मिक तो सरकारी अधिकारियों के बंगलों पर सेवा नहीं दे रहे हैं?

यदि वहां भी नहीं हैं तो सवाल ये है कि इन 15 कार्मिकों की तनख्वाह नगर परिषद से ही उठ रही होगी फिर भी इनका अता-पता नगर परिषद को नहीं है तो इनकी तनख्वाह का गबन तो नहीं हो रहा? ये सिरोही विधायक द्वारा गम्भीरता से संज्ञान में लेने का विषय है। सबगुरु न्यूज ने इस बात का खुलासा किया था कि जनता की गाढ़ी कमाई के टैक्स की सुविधा नगर परिषद अधिकारियों और लुटा रही है। बैठक में नगर परिषद सभापति महेंद्र मेवाड़ा, सफाई समिति अध्यक्ष जितेंद्र सिंघी समेत समिति सदस्य मौजूद थे।

आयुक्त ने दिया अल्टीमेटम

नगर परिषद आयुक्त महेंद्र चौधरी ने सफाई समिति की बैठक में एसआई और सभी ठेकेदारों को सात दिन का अल्टीमेटम दिया है। शहर में पर्याप्त सफाई नहीं होने को लेकर जिला कलेक्टर ने नगर परिषद आयुक्त को नोटिस दिया है। ये बात अलग है कि कलेक्टर ने अभी तक अधिकारियों के घरों पर काम कर रहे सफाई कार्मिकों के संदर्भ में अब तक कोई संज्ञान नहीं लिया है।

वैसे बैठक में आयुक्त ने बताया कि उन्होंने चुनाव शाखा में काम कर रहे सफाई कार्मिकों को बुलवाने के लिए पत्र लिख दिया है। उल्लेखनीय है कि सबगुरु न्यूज लगातार समाचार प्रकाशित करके भाजपा की अनियमितता को एजेंडा बनाकर काबिज हुई कांग्रेस के कुप्रबंधन को उजागर कर रहा है।

सिरोही नगर परिषद में सफाई को लेकर सभापति कक्ष में धरने पर बैठे कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद।

सिरोही नगर परिषद में सफाई को लेकर सभापति कक्ष में धरने पर बैठे कांग्रेस और निर्दलीय पार्षद।पार्षदों ने दिया सभापति कार्यालय पर धरना

सफाई व्यवस्था के कुप्रबंधन को लेकर आज सभापति के कक्ष में दो पार्षदों ने धरना भी दिया। निर्दलीय पार्षद अनिल सगरवंशी और कांग्रेस पार्षद अनिल कुमावत ने अपने वार्ड में सफाई नहीं होने के लेकर सभापति के कक्ष में ही धरना दे दिया।

उनका आरोप था कि कई महीनों से बोलने के बाद भी उनके वार्ड में सफाई नहीं हो रही है। इस पर सभापति ने उनके वार्ड में जाकर अवलोकन किया। उधर सफाई समिति की बैठक में नगर कांग्रेस पार्षद मनोज पुरोहित ने बताया कि उनके वार्ड में एक महीने से सफाई नहीं हुई। एसआई ने भी माना कि कार्मिक नहीं आने से सफाई नहीं हुई है।

क्या हुआ बैठक में

सफाई समिति की बैठक से पहले सभापति महेंद्र मेवाड़ा ने सुबह शहर की सफाई व्यवस्था देखी। बैठक में आकर भाटकड़ा सर्किल, राजमाता धर्मशाला रोड और संजीवनी हॉस्पिटल के पास से ट्रेचिंग हटाने को कहा। उनकी दलील थी कि मुख्य मार्ग होने से गंदगी और नजर ज्यादा जाती है। बैठक में एसआई की दलीलों पर सदस्यों ने उनकी कार्यप्रणाली पर कई बार प्रश्न चिन्ह लगा दिए।

कलेक्टर द्वारा आयुक्त को नोटिस मिलने पर व्यंग्य में मनोज पुरोहित ने कहा कि शहर में रामराज है गंदगी का नामोनिशान तक नहीं है। हमारे सभापति और आयुक्त की कार्यप्रणाली पर कोई शक करेगा तो हम धरना देंगे। सफाई ठेकेदार द्वारा कभी इस शहर के सफाई में नम्बर एक होने की बात करने और आयुक्त ने कहा कि तो क्या इसे नम्बर वन से मैने पिछडाया है?

क्या जिला कलेक्टर इस पर भी जारी करेंगे नोटिस?

नगर परिषद में 141 में से सिर्फ 66 सफाई कर्मचारी काम कर रहे हैं। शेष इधर-उधर लगे हुए हैं। क्या जिला कलेक्टर इसके लिए भी नोटिस देकर इन कार्मिकों को सही जगह लगाने की हिदायत देंगे। जिला कलेक्टर और सिरोही विधायक गिनती से गायब 15 कार्मिकों पर संज्ञान लेकर सिरोही की जनता के साथ न्याय कर पाएंगे या सिरोही की जनता के हितों  का गबन होते रहने देंगे। नगर परिषद में एक भी कार्मिक बोर्ड की अनिच्छा के कहीं हिल नहीं सकता इसके बावजूद 15 कार्मिकों का गायब होना नगर परिषद के 35 पार्षदों की अकर्मण्यता को भी उजागर कर रहा है।

इससे ज्यादा आश्चर्य की बात कग होगी कि 2018 के चुनाव के बाद सिरोही में लोगों ने इसी अनियमितता को लेकर अपना विधायक बदला था और विधायक बदलने के बाद भी नगर परिषद के करीब 42 प्रतिशत सफाई कर्मचारी सफाई के काम पर ही नहीं जा रहे हैं।

ये हाल तब है जब विधायक संयम लोढ़ा ने 2018 में जीतते ही अपने पहले इंटरव्यू में ये कहा था कि वो अपना शेष जीवन सिरोही वासियों की सेवा में समर्पित कर देंगे। पर नगर परिषद के 42 प्रतिशत सफाई कार्मिकों से सफाई का काम नहीं करवाकर उनकी सदारत में चलने वाला बोर्ड सिरोही शहर के लोगों को गंदगी के नरक में डालकर किस प्रकार की सेवा और समर्पण दिखा रहा है सिरोही के लोगों को ये बात विधायक ही बेहतर तरीके से बता सकते हैं।

लगातार….