उपचुनाव में हुआ 52 प्रतिशत मतदान, ईवीएम में सेव हुई गोपालन राज्यमंत्री की साख

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सबगुरु न्यूज-सिरोही। सिरोही पंचायत समिति के वार्ड संख्या-7 के उपचुनाव में मंगलवार को शांतिपूर्ण मतदान हुआ। निर्वाचन विभाग के अनुसार सोमवार को इस वार्ड के दो मतदान केन्द्रों के छह बूथों पर कुल 52.53 प्रतिशत मतदान हुआ। मतगणना 14 जून को होगी।

सिरोही पंचायत समिति के वार्ड संख्या 7 की पूर्व निर्वाचित सदस्य दीपा राजगुरु का निर्वाचन न्यायालय द्वारा निरस्त घोषित किए जाने के बाद मंगलवार को मतदान हुआ। यहां पर भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों में सीधा मुकाबला था। इस चुनाव को विशेष रूप से गोपालन राज्यमंत्री ओटाराम देवासी और भाजपा जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चैधरी की साख से जोडकर देखा जा रहा है। जिलाध्यक्ष का तो गांव भी इसी वार्ड में है।

इस वार्ड में कुल 6 हजार 557 मतदाताओं में से तीन हजार 445 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया। सिंदरथ के बूथ संख्या एक में 1226 में से 749 व दो मे 1219 में से 652 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।

वहीं कृष्णगंज स्कूल में स्थापित मतदान केन्द्र बूथ संख्या तीन में पंजीकृत 989 मतदाताओं में से 512, बूथ संख्या 4 में 979 में से 593, बूथ संख्या 5 के 1069 में से 482 तथा बूथ संख्या 6 के 1075 में से 457 मतदाताओं ने मताधिकार का प्रयोग किया।

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विधानसभा चुनाव निकट होने तथा विवाद होने की आशंका के चलते कांगेस और भाजपा के नेताओं का सिंदरथ और कृष्णगंज में जमावडा लगा रहा। भाजपा से गोपालन मंत्री ओटाराम देवासी, जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चैधरी, तारा भंडारी, रक्षा भंडारी समेत जिला भाजपा के प्रमुख नेता यहां पर काफी समय तक रहे तो कांग्रेस में संयम लोढ़ा पूरे दिन सिंदरथ गांव में तथा जिलाध्यक्ष जीवाराम आर्य कृष्णगंज में डटे रहे।

सिंदरथ गांव में कांग्रेस का बूथ नहीं लगने देने की तमाम कोशिशें सामने आई। दो दिनों से जिन-जिन बूथों के स्थान तय किए थे वो स्थान लोगों ने देने से मना कर दिए। इस पर मंगलवार सवेरे मतदान केन्द्र के बिल्कुल पहले एक बूथ बनाया गया। भाजपा प्रत्याशी स्वय़ॅँ और भाजयुमो जिलाध्यक्ष हेमंत पुरोहित सिंदरथ गांव का ही होने के कारण यह असहयोग की स्थिति बनी।

-सरपंच का नाम ही नदारद
सिंदरथ में बडी ही गजब की चूक सामने आई। यहां की सरपंच का नाम ही मतदाता सूची में नहीं था। जबकि पूर्व सभी चुनावों में उन्होने यहां से वोट दिया है। ऐसे में उन्हें बिना वोट दिए ही लौटना पड़ा।