
सबगुरु न्यूज-सिरोही। हालात देखकर लग रहा है कि सिरोही भाजपा के नेताओ और ब्यूरोक्रेसी ने मिलकर भाजपा को ही साख पर लगा दिये हैं। चापलूस नेताओं के बहकावे में आकर बड़े नेताओं ने अपना किस तरह के नुकसान करवाया था ये मंगलवार को आयोजित की गई माली समाज की चौदह परगना की बैठक में जिले ने देख लिया। अब भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे बाहरी अधिकारियों के लिए अपने प्रमुख वोट बैंक को नुकसान पहुंचाने पर आमादा लग रहे हैं।
लेकिन, सिरोही और पिंडवाड़ा के भाजपा नेता इस मुगालते में हैं कि वो सिर्फ अपनी ही जाति के वोटों के दम पर जीतते हैं तो उन्हें पश्चिमी राजस्थान में महिपाल मदेरणा, पूराराम चौधरी और ओटाराम देवासी के परिणामों को देख लेना चाहिए। जो अपनी ही जाति की बहुलता वाली सीटों से इसलिए हार गए थे कि इनकी अव्यवस्था से तंग आकर पारम्परिक वोट बैंक रही दूसरी जातियों ने पलटी मार दी थी। हेल्थी में माउंट आबू की मलाईदार नगरपालिका को लेकर भाजपा शासन में जाओ हो रहा है क्या किया जा रहा है वो भाजपा के लिए नुकसानदायक साबित होने वाला है।
– बिना राजनीतिक हस्तक्षेप के बिना असंभव
हाल में सिरोही में डीएलबी से निकले आदेश सबकी नजर में चुभ रहे हैं। सिरोही और पिंडवाड़ा-आबू विधानसभा में ये चुभन अब दिखने लगी है। माउंट-आबू और पिंडवाड़ा नगर पालिका में हुआ ट्रांसफर का खेल यहां भाजपा को भारी पड़ने वाला है। जिला कलेक्टर आदेश पर पिंडवाड़ा अधिशासी अधिकारी महेंद्र पुरोहित को माउंट आबू नगर पालिका का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। गुरुवार को पुरोहित में कार्यभार संभाला। लेकिन, शुक्रवार को ही उन्हें वहां से हटाकर आशुतोष आचार्य को फिर से माउंट आबू नगर पालिका में अतिरिक्त प्रभार देते हुए तैनात कर दिया गया। इस बार ये आदेश डीएलबी से हुआ।
कलेक्टर के आदेश के ऊपर डीएलबी से आदेश लाकर माउंट आबू में तैनाती करवा लेना सीधे तौर पर जिला कलेक्टर को चुनौती माना जा रहा है। यही नहीं सिरोही में सोशल मीडिया में इसके पीछे सिरोही के ही नेताओं के राजनीतिक हस्तक्षेप के दावे किए जा रहे हैं। शुक्रवार को डीएलबी से निकले आदेश के बाद शनिवार शाम को मंत्री ओटाराम देवासी के ही एक समर्थक रहे सिरोही एक पूर्व पार्षद ने तो सिरोही के सोशल मीडिया पर मंत्री की ओर मुखातिब होते हुए लिखा कि आपको आशुतोष आचार्य को माउंट आबू का आयुक्त बनाने की चिंता रहती है। लेकिन सिरोही नगर परिषद में स्थाई आयुक्त लगाने की अब तक कवायद नहीं की। ऐसे में इसके पीछे की वजह सिरोही भाजपा को ही माना जा रहा है।
-महेंद्र पुरोहित को करवा दिया एपीओ
सिरोही जिले की दो नगर पालिकाओं के लिए शुक्रवार को जो आदेश निकले उसके अनुसार आशुतोष आचार्य को माउंट आबू अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। माउंट आबू नगर पालिका में अतिरिक्त प्रभार पर लगाए गए महेंद्र पुरोहित पिंडवाड़ा नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी के पद पर तैनात थे। यहीं से उन्हें माउंट आबू का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। सिरोही भाजपा के नेताओं की कथित साजिश रचकर डीएलबी से आदेश निकलवाकर महेंद्र पुरोहित को पिंडवाड़ा नगर पालिका से भी हटा दिया गया। उन्हें एपीओ कर दिया गया। इनकी जगह सांचौर के अधिशासी अधिकारी योगेश आचार्य को पिंडवाड़ा नगर पालिका का अतिरिक्त प्रभार दे दिया गया। एपीओ सामान्य और सिंगल आदेश किया जाता तो भाजपा की भूमिका को संदिग्ध नहीं माना जाता, लेकिन एक ही आदेश में अतिरिक्त कार्यभार, एपीओ आदि होने से इसमें सिरोही भाजपा नेताओं की लिप्तता की बात सोशल मीडिया पर उठाई जा रही है।
– भाजपा का भ्रष्टाचार की जांच में घिरे लोगों से प्रेम
यूं पिछले दस सालों में नगर निकाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं। कथित रूप से जिला भाजपा के नेता जिस आशुतोष आचार्य और योगेश आचार्य को महेंद्र पुरोहित की जगह लेकर आए वो भ्रष्टाचार की जांच में घिरे हैं। आशुतोष आचार्य एसीबी में रिश्वत लेते हुए पकड़ाए चुके हैं। वहीं योगेश आचार्य भी आय से अधिक संपत्ति के मामले में एसीबी की कार्रवाई झेल चुके हैं। महेंद्र पुरोहित भाजपा के प्रमुख वोट बैंक माने जाने वाले पुरोहित समाज के हैं और स्थानीय भी हैं।
बाहरी अधिकारियों के हित साधने के लिए स्थानीय स्थानीय समाज से खिलवाड़ करके कथित रूप से सत्ताधारी दल के सिरोही के नेताओं द्वारा डीएलबी से जिले से बाहर करवा देने से भाजपा के एक और वोट बैंक में नाराजगी पनपने लगी है। ये कम्युनिटी तीनों ही विधानसभा सीटों शहरी और ग्रामीण बूथों पर परिणाम बदलने में सक्षम है।


