मुंबई। महाराष्ट्र में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के सांसद संजय दीना पाटिल के पत्रकारों के लिए कथित तौर पर अपशब्दों का प्रयोग करने और धमकी देने के बाद एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
इस घटना से सत्ताधारी शिवसेना को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है, जिसके बाद गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने जनता और मीडिया के बढ़ते आक्रोश को शांत करने के लिए तत्काल कुछ उपाय भी अपनाए हैं। शिंदे ने इस घटना का गंभीर संज्ञान लेते हुए एक जन प्रतिनिधि के इस व्यवहार को अस्वीकार्य बताया। पत्रकारों से बात करते हुए उप-मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि उन्होंने इस मामले को लेकर पाटिल से चर्चा की है।
शिंदे ने यह भी कहा कि मैं इस घटना के विवरण की जांच कर रहा हूं। किसी प्रतिनिधि के लिए पत्रकारों से इस तरह बात करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने सांसद को मीडिया से संपर्क करने और अगर अनजाने में किसी आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग हुआ हो, तो खेद व्यक्त करने का निर्देश दिया है।
पार्टी सूत्रों के अनुसार पाटिल ने अपने कृत्य का बचाव करते हुए दावा किया कि उनका मीडिया का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने कथित तौर पर उप-मुख्यमंत्री को स्पष्ट किया कि वे अत्यधिक दबाव में थे और अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों द्वारा उनके और उनके परिवार के खिलाफ चलाए जा रहे कथित अपमानजनक अभियान के कारण हताश थे।
इस बीच, नुकसान को सीमित करने के लिए शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नेता तेजी से माफी मांग रहे हैं। वरिष्ठ नेता संजय शिरसाट ने इस आचरण पर असहमति जताते हुए कहा कि किसी को भी खुलेआम धमकी देना या अपशब्द कहना अनुचित है। यदि उनके द्वारा किन्हीं आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया है, तो मैं व्यक्तिगत रूप से मीडिया से माफी मांगता हूं। हम निश्चित रूप से उन्हें समझाएंगे।
इसी तरह की भावना व्यक्त करते हुए शिवसेना नेता प्रकाश सुर्वे ने पाटिल को एक अच्छा व्यक्ति बताया, जिन्होंने संभवतः गुस्से में ऐसी प्रतिक्रिया दी होगी। उन्होंने कहा कि यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं माफी मांगता हूं। पूर्व मंत्री अर्जुन खोतकर ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रति पार्टी के सम्मान को दोहराते हुए कहा कि यदि यह सच है कि उन्होंने अपशब्दों का प्रयोग किया है, तो यह निश्चित रूप से गलत है। उप-मुख्यमंत्री निश्चित रूप से उचित कार्रवाई करेंगे।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सतर्क रुख अपनाते हुए कहा कि अपनी यात्रा के व्यस्त कार्यक्रम के कारण उन्हें इस घटना की पूरी जानकारी नहीं है। हालांकि, उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में किसी को भी धमकी देना या अपशब्द कहना न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता। यह घटना सत्ताधारी गठबंधन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है, और अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाटिल उप-मुख्यमंत्री की सलाह मानकर मीडिया जगत से औपचारिक रूप से माफी मांगते हैं या नहीं।



