पुणे केतन अग्रवाल हत्याकांड : आखिर क्यों जानलेवा बन रहे हैं प्रेम संबंध?

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जालंधर। महाराष्ट्र के पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड के बाद प्रेम संबंधों में बढ़ते हिंसक अपराधों को लेकर उठ रहे गंभीर सवालों के बीच राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम की सलाहकार एवं आपदा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. नरेश पुरोहित का कहना है कि ऐसे मामलों की जड़ केवल प्रेम नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव, असुरक्षा, अस्वीकृति का डर, दोहरी जिंदगी और भावनात्मक अस्थिरता जैसी जटिल मानसिक स्थितियां होती हैं।

डॉ. पुरोहित ने शनिवार को एक बयान में कहा कि हाल के वर्षों में राजा रघुवंशी हत्याकांड, मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड और अब पुणे के केतन अग्रवाल हत्याकांड जैसे मामलों ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि रिश्ता खत्म करने के बजाय कुछ लोग अपराध का रास्ता क्यों चुन लेते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में रिश्तों और विवाह को लेकर सामाजिक अपेक्षाएं बेहद मजबूत हैं। कई बार लोग रिश्ता टूटने या सगाई समाप्त होने को अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़ लेते हैं। ऐसे में कुछ लोग सच स्वीकार करने या अलग होने की बजाय झूठ और हिंसा का रास्ता चुन लेते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के अनुसार कुछ लोगों में ‘ऑल ऑर नथिंग थिंकिंग’ यानी सब कुछ या कुछ भी नहीं जैसी मानसिकता विकसित हो जाती है। ऐसे लोग परिस्थितियों का संतुलित आकलन नहीं कर पाते और भावनाओं के दबाव में गलत निर्णय ले बैठते हैं।

डॉ. पुरोहित ने कहा कि दोहरी जिंदगी जीने वाले लोगों पर मानसिक दबाव लगातार बढ़ता जाता है। जब उन्हें लगता है कि सच्चाई सामने आने से परिवार, सामाजिक प्रतिष्ठा या भविष्य की योजनाएं प्रभावित होंगी, तब कुछ लोग अपराध जैसा गंभीर कदम उठा लेते हैं।

प्रेम संबंधों में होने वाले अधिकांश गंभीर अपराधों के पीछे चार प्रमुख कारण सामने आते हैं, जिनमें ब्रेकअप या रिश्ते का टूटना, किसी तीसरे व्यक्ति की एंट्री, बेवफाई या धोखा और प्रेम या विवाह प्रस्ताव ठुकराया जाना शामिल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्यार स्वयं कभी अपराध की वजह नहीं बनता। अपराध के पीछे स्वार्थ, नियंत्रण की भावना, असुरक्षा, गुस्सा, ईर्ष्या और परिणामों से बचने की मानसिकता जैसी वजहें अधिक जिम्मेदार होती हैं।

उन्होंने कहा कि हर रिश्ता सफल नहीं होता और हर प्रेम कहानी विवाह तक नहीं पहुंचती, लेकिन किसी भी रिश्ते का अंत हिंसा या हत्या का औचित्य नहीं बन सकता। उन्होंने लोगों से अपील की कि रिश्तों में ईमानदार संवाद बनाए रखें और मानसिक तनाव की स्थिति में विशेषज्ञों से परामर्श लेने से न हिचकें। उन्होंने कहा कि कई बार एक कठिन लेकिन ईमानदार बातचीत कई जिंदगियां बचा सकती है, जबकि भावनाओं में लिया गया एक गलत फैसला पूरे परिवार को हमेशा के लिए बर्बाद कर सकता है।