मुंबई। अभिनेत्री अदिति राव हैदरी ने कहा है कि भारतीय सिनेमा में महिलाओं के लिए बेहतर और सशक्त किरदारों का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन इस बदलाव को गति देने के लिए कलाकारों और फिल्मकारों को जागरूक और साहसिक फैसले लेने होंगे। अदिति का मानना है कि महिलाओं के बिना न जीवन संभव है और न ही कोई कहानी पूरी हो सकती है।
अदिति ने कहा कि बदलाव अपने आप नहीं आता, बल्कि उसे स्वीकार करना और उसके लिए प्रयास करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को केवल तात्कालिक आर्थिक लाभ के बजाय लंबे समय तक प्रभाव छोड़ने वाली अच्छी और सार्थक कहानियों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि कोई काम उनके विचारों और मूल्यों से मेल नहीं खाता तो उसे ठुकराने का साहस भी होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उनके लिए हमेशा सिनेमा और कला सर्वोपरि रहे हैं। यदि कलाकार अपनी रचनात्मक संवेदनाओं और अच्छी कहानियों के प्रति ईमानदार रहें, तो सही अवसर समय के साथ अवश्य मिलते हैं। उनके अनुसार, सफलता और लोकप्रियता सुखद होती है, लेकिन किसी कलाकार की वास्तविक पहचान उसके समर्पण, अनुशासन और रचनात्मक ईमानदारी से बनती है।
अदिति राव हैदरी ने कहा कि महिला केंद्रित फिल्मों को अब भी अक्सर अतिरिक्त जोखिम के रूप में देखा जाता है, जबकि यह ऐसा जोखिम है जिसे उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं को केवल सहायक पात्र के रूप में नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति, गरिमा, संवेदनशीलता और अनेक आयामों वाले व्यक्तित्व के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को जिस नजरिए से पर्दे पर दिखाया जाता है, वह समाज और रचनाकारों की सोच को भी दर्शाता है।उन्होंने कहा कि किसी कलाकार का हर फैसला भविष्य की कहानियों को आकार देता है और यही फिल्म उद्योग की दिशा भी तय करता है।
उनके अनुसार सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कहानी में दर्शकों को बांधे रखने की क्षमता हो। जब कलाकार उन कहानियों का साथ देते हैं, जिन पर उन्हें पूरा विश्वास होता है, तब बदलाव धीरे-धीरे लेकिन स्थायी रूप से सामने आता है। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय फिल्म उद्योग सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है और महिलाओं के लिए बेहतर अवसरों का विस्तार लगातार हो रहा है।



