दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलो विदेशी सोना जब्त, दो अरेस्ट

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्वतंत्रता दिवस के मद्देनजर सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी सतर्कता के बीच सोने की तस्करी का एक और मामला सामने आया है।

रायपुर और नागपुर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की अपराध शाखा ने राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) के साथ संयुक्त कार्रवाई करते हुए हावड़ा-मुंबई दुरंतो एक्सप्रेस से 1.242 किलोग्राम विदेशी सोना जब्त किया है, जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपये बताई गई है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार गुरुवार को संयुक्त टीम ने दुरंतो एक्सप्रेस के बी-12 कोच में तलाशी अभियान चलाया। इस दौरान सात सोने के बिस्किट और एक सोने की छड़ बरामद की गई। बरामद सोना विदेशी बताया गया है। मामले में महाराष्ट्र निवासी सुरेश कुमार और धैर्यशील को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसियां सोने के स्रोत, इसकी आपूर्ति और इससे जुड़े नेटवर्क का पता लगाने में जुटी हैं।

छत्तीसगढ़ में विदेशी सोने की तस्करी का यह पहला मामला नहीं है। रायपुर में वर्ष 2016 में डीआरआई का जोनल कार्यालय शुरू होने के बाद से अब तक करीब 37 किलोग्राम सोना और पांच हजार किलोग्राम से अधिक चांदी जब्त की जा चुकी है। इस अवधि में तस्करी के लिए बेल्ट, बैग और टिफिन सहित अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल किए जाने के मामले सामने आए हैं। जांच में कारोबारियों के भी सिंडिकेट से जुड़े होने के मामले सामने आए हैं।

डीआरआई के आंकड़ों के मुताबिक पिछले छह वर्षों के दौरान सोने की तस्करी से जुड़े मामलों में 25 से ज्यादा तस्करों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जब्त सोने की कीमत डीआरआई अधिकारियों ने करोड़ों रुपये की बताई है। लगातार कार्रवाई के बावजूद राज्य में तस्करी के मामले सामने आते रहे हैं।

जांच एजेंसियों के अनुसार तस्करी का सोना बांग्लादेश और म्यांमार से कोलकाता पहुंचता है। इसके बाद सड़क और रेल मार्ग के जरिए इसे छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों में भेजा जाता है। छत्तीसगढ़ में रायपुर, दुर्ग और राजनांदगांव इस नेटवर्क के प्रमुख केंद्र रहे हैं। यहां से सोना मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और ओडिशा तक पहुंचाए जाने की जानकारी जांच एजेंसियों को मिली है।

डीआरआई की जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार सोना तस्करी का नेटवर्क कई स्तरों पर संचालित होता है। इसमें सरगना, सप्लायर, पैडलर और स्थानीय खरीदार शामिल रहते हैं। पैडलर की भूमिका माल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने की होती है। पकड़े जाने की स्थिति में नुकसान सीमित रखने के लिए गिरोह सोने को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर अलग-अलग लोगों के माध्यम से भेजता है।

जांच में यह भी सामने आया है कि तस्कर सुरक्षा और जांच एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए समय-समय पर अपना हुलिया और तस्करी का तरीका बदलते रहे हैं। सोने को बेल्ट, बैग, तकिए, टिफिन, कमरबंद और अंडरगारमेंट में छिपाकर ले जाने के मामले सामने आ चुके हैं। अधिकांश मामलों में रेल और सड़क मार्ग का इस्तेमाल किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार अवैध रूप से लाए गए सोने के कारण केंद्र सरकार को सीमा शुल्क और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के रूप में मिलने वाले राजस्व का नुकसान होता है। तस्करी का सोना बिना बिल और वैध दस्तावेजों के अपेक्षाकृत कम कीमत पर बाजार में बेचा जाता है, जिससे वैध कारोबार भी प्रभावित होता है।

डीआरआई ने तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए अपने सूचना तंत्र को भी मजबूत किया है। विभाग में तस्करी के संबंध में सटीक सूचना देने वाले व्यक्ति को जब्त माल की कीमत का 20 प्रतिशत तक इनाम देने का प्रावधान है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान गोपनीय रखी जाती है।

सोना तस्करी से जुड़े मामलों में डीआरआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी छत्तीसगढ़ के कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। ईडी की जांच में दुबई से 260 करोड़ रुपए का सोना छत्तीसगढ़ में खपाए जाने का इनपुट सामने आया है।

ईडी ने सोना तस्करी सिंडिकेट में शामिल छत्तीसगढ़ के कारोबारियों की अब तक 64 करोड़ 14 लाख रुपए की संपत्तियां जब्त अथवा अटैच की हैं। इस मामले में ईडी की जांच अभी जारी है।