वाशिंगटन। अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था को अमेरिका के लिए आदर्श बताते हुए कांग्रेस से चुनाव नियमों को कड़ा करने वाले विधेयक को पारित करने की अपील की है। ट्रंप ने कहा कि भारत में मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र का इस्तेमाल किया जाता है और डाक से मतदान करने वालों की संख्या बेहद कम है। उन्होंने कहा कि अमरीका को भी मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन के नियमों को मजबूत करना चाहिए।
ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ट्रुथ सोशल पर कहा कि 2024 के भारतीय आम चुनाव में करीब 64.6 करोड़ लोगों ने मतदान किया और एक प्रतिशत से भी कम मतदाताओं ने डाक के जरिए वोट डाला। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पिछले महीने हमारे अधिकारियों से पूछा, हम वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमरीका में चुनाव कैसे करवा सकते हैं?
ट्रंप ने कहा कि हमें अब सेव अमरीका एक्ट पारित करने की जरूरत है। प्रस्तावित कानून के तहत संघीय चुनावों में मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण और मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। इसमें डाक से मतदान के लिए भी कड़े नियम तथा मतदाता पात्रता के सत्यापन की व्यवस्था प्रस्तावित है।
भारत में अमरीका के राजदूत सर्जियो गोर ने भी ट्रंप के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के पिछले आम चुनाव में 64.6 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया और सभी के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने अमरीकी कांग्रेस से विधेयक पारित करने की अपील की।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इन बदलावों से गैर-अमरीकी नागरिकों के मतदान को रोकने और चुनाव प्रक्रिया में लोगों का विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। प्रशासन भारत और ब्राजील का उदाहरण देते हुए कहता रहा है कि इन देशों में मतदाता पहचान और नागरिकता सत्यापन की मजबूत व्यवस्था है।
ट्रंप ने मार्च 2025 में जारी एक कार्यकारी आदेश में भी भारत और ब्राजील की चुनाव व्यवस्थाओं का उल्लेख किया था। इसमें अमरीकी चुनावों में मतदाता सत्यापन, कागजी मतदान रिकॉर्ड तथा डाक एवं अनुपस्थित मतदान की निगरानी मजबूत करने की बात कही गयी थी।
ट्रंप लंबे समय से डाक से मतदान का विरोध करते रहे हैं और इसमें धोखाधड़ी तथा प्रक्रियागत गलतियों की आशंका जताते रहे हैं। प्रस्तावित कानून को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में राजनीतिक मतभेद कायम हैं। डेमोक्रेट सांसद इसके कई प्रावधानों का विरोध कर रहे हैं, जबकि रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भी कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं।
अमरीकी सीनेट इस महीने पांच सप्ताह के अवकाश पर चली गई और विधेयक पर कोई निर्णायक कार्रवाई नहीं हुई। इसके बावजूद ट्रंप ने इसे चुनावी प्रक्रिया में सुधार के अपने एजेंडे का प्रमुख हिस्सा बनाए रखा है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की 2012 की एक जांच में मेल-इन बैलेट से जुड़ी चिंताओं की भी पड़ताल की गई थी। इसमें इस बात की संभावना भी शामिल थी कि व्यक्तिगत रूप से डाले गए वोटों की तुलना में इनके चुनौती दिए जाने या इनके साथ छेड़छाड़ होने का खतरा ज़्यादा हो सकता है।



