हुबली। कर्नाटक के पुराने हुबली में शनिवार को असर औनी में भवानी शंकर मंदिर के पास स्थित पुष्करणी (मंदिर के जलाशय) को लेकर विवाद के कारण तनाव फैल गया। इसके चलते अधिकारियों ने निषेधाज्ञा लागू कर दी और सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील इलाके में 1,500 से ज़्यादा पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया है।
हिंदू संगठनों द्वारा उस जगह पर बनी सीमेंट-कंक्रीट की सड़क को हटाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन की घोषणा के बाद यह विवाद और बढ़ गया है। उनका दावा है कि यह इलाका पारंपरिक पुष्करणी का हिस्सा था। रिपोर्टों के अनुसार, स्थानीय निवासियों ने सड़क को हटाने का विरोध किया है।
दोनों पक्षों के कड़े रुख और टकराव की आशंका को देखते हुए, हुबली-धारवाड़ पुलिस ने मंदिर के 500 मीटर के दायरे में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी और इलाके में विरोध प्रदर्शन या भीड़ जमा करने पर रोक लगा दी। पुलिस आयुक्त एन शशिकुमार ने कहा कि सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं क्योंकि इस इलाके में आबादी का घनत्व अधिक है और दोनों समुदायों के लोग पास-पास रहते हैं।
पुलिस ने वरिष्ठ अधिकारियों, इंस्पेक्टरों और कर्नाटक राज्य रिजर्व पुलिस (केएसआरपी) के जवानों सहित 1,500 से ज़्यादा कर्मियों को तैनात किया है और रणनीतिक जगहों पर किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए विशेष टीमों को तैनात किया गया हैं। कुमार ने कि इन एहतियाती उपायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई अप्रिय घटना न हो और शरारती तत्व स्थिति का फायदा उठाकर गड़बड़ी न फैला सकें।
पुलिस अधिकारियों ने विरोध प्रदर्शन की योजना बना रहे समूहों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें भी की हैं और उन्हें निषेधाज्ञा का उल्लंघन न करने की सलाह दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर बिना अनुमति के प्रदर्शन करने की कोशिश की गई तो ज़रूरी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटनाक्रम ने पुराने हुबली में 2022 में हुई हिंसा की यादें ताजा कर दी हैं, जिससे इस नए विवाद के सांप्रदायिक रूप लेने की आशंका को लेकर चिंता बढ़ गई है। पुलिस ने मंदिर की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेड लगा दिए हैं और चन्नापेट और कारवार रोड सहित मुख्य संपर्क मार्गों पर निगरानी बढ़ा दी है। इसके साथ ही असर ओनी के आसपास भारी पुलिस बल तैनात है।
इस विवाद ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं ने हिंदू संगठनों के विरोध प्रदर्शन के आह्वान का इसका समर्थन किया है।अधिकारियों का कहना था कि उनकी पहली प्राथमिकता दोनों पक्षों के बीच टकराव को रोकना और घनी आबादी वाले इलाके में शांति बनाए रखना है। प्रशासन स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहा है और उसने निवासियों तथा संगठनों से संयम बरतने और कानूनी तरीकों से विवाद सुलझाने की अपील की है।



