जन्म के बाद पांच घंटे मिट्टी में दबी रहीं गुलाबो, आज दुनिया में कालबेलिया की पहचान

0

बैतूल में डॉटर्स डे पर मणिकर्णिका सम्मान समारोह में शामिल होंगी पद्मश्री गुलाबो सपेरा, बेटियों के सम्मान की परंपरा से प्रभावित होकर स्वीकारा आमंत्रण

बैतूल। कभी सामाजिक कुरीति के चलते जन्म लेते ही जमीन में दफना दी गई एक बच्ची आज राजस्थान की लोककला और कालबेलिया नृत्य की दुनिया में पहचान बन चुकी है। यह कहानी है पद्मश्री गुलाबो सपेरा की, जो आगामी 27 सितंबर को डॉटर्स डे के अवसर पर बैतूल में आयोजित मणिकर्णिका सम्मान समारोह में शामिल होंगी।

बेटी नेहा श्रीवास्तव की स्मृति में उनके माता-पिता डॉ. वसंत श्रीवास्तव और एडवोकेट नीरजा श्रीवास्तव की पहल पर बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति एवं साझा प्रयास के सहयोग से यह समारोह आयोजित किया जा रहा है। आयोजकों के अनुसार, गुलाबो सपेरा को जब कार्यक्रम के उद्देश्य और बेटियों के सम्मान की इस परंपरा के बारे में बताया गया तो उन्होंने समारोह में शामिल होने की स्वीकृति तत्काल दे दी।

पांच घंटे तक मिट्टी में दबी रहीं, फिर भी चल रही थीं सांसें

गुलाबो सपेरा का जन्म 9 नवंबर 1970 को अजमेर जिले के कोटड़ा ढाणी स्थित कालबेलिया बस्ती में हुआ था। उनके जन्म के समय पिता घर से बाहर थे और मां बेहोश थीं। परिवार के कुछ रिश्तेदारों ने बेटी के जन्म को लेकर तत्कालीन सामाजिक कुरीतियों के चलते नवजात गुलाबो को कथित तौर पर जमीन में दफना दिया।

मां को जब होश आया और उन्हें बेटी के बारे में पता चला तो उन्होंने लोगों से उसे बाहर निकालने की गुहार लगाई। गुलाबो की मौसी को उस स्थान की जानकारी थी। रात करीब 12 बजे मां और मौसी ने जमीन खोदकर नवजात को बाहर निकाला। बताया जाता है कि करीब पांच घंटे तक मिट्टी में दबे रहने के बावजूद गुलाबो की सांसें चल रही थीं।

धनतेरस और दीपावली के आसपास जन्म होने के कारण उनका नाम पहले धनवंतरी रखा गया। बाद में बचपन में गंभीर बीमारी के दौरान पिता उन्हें अजमेर स्थित ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह लेकर पहुंचे। वहां गुलाब का फूल उनके ऊपर गिरने की घटना को आशीर्वाद से जोड़ते हुए उनका नाम गुलाबो रखा गया। आगे चलकर यही नाम उनकी पहचान बन गया।

कालबेलिया को गांव से निकालकर दुनिया के मंच तक पहुंचाया

गुलाबो सपेरा ने कालबेलिया लोकनृत्य को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1985 में उन्होंने पहली बार अमेरिका में प्रस्तुति दी। इसके बाद उन्होंने दुनिया के विभिन्न देशों में कालबेलिया नृत्य की प्रस्तुतियां दीं।

उनकी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान के बीच कालबेलिया नृत्य को राजस्थान की महत्वपूर्ण लोक परंपराओं में स्थान मिला। गुलाबो ने पुष्कर में अपना नृत्य विद्यालय भी स्थापित किया, जहां विभिन्न देशों से आने वाले विद्यार्थी कालबेलिया नृत्य सीखते हैं।

भारत सरकार ने वर्ष 2016 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। उनके जीवन और संघर्ष पर आधारित ग्राफिक एनिमेटेड बायोपिक शॉर्ट फिल्म में जन्म से लेकर कालबेलिया नृत्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने और पद्मश्री सम्मान हासिल करने तक के सफर को प्रस्तुत किया गया है। अभिनेत्री इला अरुण ने इस फिल्म में कथावाचक के तौर पर आवाज दी है।

कलाकारों के समर्थन में 15 किलोमीटर तक किया नृत्य

गुलाबो सपेरा की पहचान केवल लोकनृत्य कलाकार के रूप में ही नहीं, बल्कि कलाकारों के मुद्दों को लेकर मुखर रहने वाली शख्सियत के रूप में भी रही है। कलाकारों के समर्थन में उन्होंने जयपुर की सड़कों पर करीब 15 किलोमीटर तक नृत्य करते हुए विरोध प्रदर्शन किया था। उनका यह प्रदर्शन लंबे समय तक चर्चा में रहा।

टेलीविजन के चर्चित कार्यक्रम बिग बॉस-5 में भी गुलाबो सपेरा नजर आईं। इसके अलावा उन्होंने फिल्मी दुनिया में भी काम किया और जेपी दत्ता सहित अन्य फिल्मकारों के साथ फिल्मों में नृत्य प्रस्तुत किया। गुलामी, बंटवारा, अजूबा, क्षत्रिय और फासले जैसी फिल्मों में उनके नृत्य को दर्शकों ने देखा। भंवरी का जाल में भी उन्होंने नृत्य प्रस्तुति दी।

‘डॉटर डे’ पर बेटियों के सम्मान का संदेश

आयोजकों का कहना है कि मणिकर्णिका सम्मान समारोह का उद्देश्य बेटियों के संघर्ष, उपलब्धियों और सामाजिक योगदान को सम्मान देना है। गुलाबो सपेरा की जीवन यात्रा इस उद्देश्य से सीधे जुड़ती है। जन्म के समय सामाजिक कुरीतियों का सामना करने वाली गुलाबो ने आगे चलकर उसी समाज में अपनी कला के दम पर अलग पहचान बनाई।

मणिकर्णिका सम्मान समारोह के आयोजन से जुड़े डॉ. वसंत श्रीवास्तव, एडवोकेट नीरजा श्रीवास्तव, गौरी भारत सिंह पदम, बैतूल सांस्कृतिक सेवा समिति सहित सहयोगी संस्थाओं और समाजसेवियों ने नागरिकों से अपने बेटे-बेटियों के साथ समारोह में शामिल होने का आग्रह किया है।

आयोजकों में धीरज बोथरा, विवेक मालवीय, धीरज हिराणी, अतुल गोठी, निर्गुण देशमुख, कमलेश गढ़ेकर, मनीष दीक्षित, राजेश-संगीता अवस्थी, अभिमन्यु श्रीवास्तव, डॉ. कृष्णा मौसिक, राजेश आहूजा, हेमंत पगारिया, यथार्थ राजेश गुगनानी सहित विभिन्न संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं।