अहमदाबाद। भारतीय रेलवे ने वैकल्पिक और स्वच्छ ईंधन की दिशा में एक और बड़ा प्रयोग शुरू किया है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुजरात के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली LNG-डीजल डुअल-फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह ट्रेन केवल LNG पर निर्भर नहीं है, बल्कि जरूरत के अनुसार लिक्विफाइड नेचुरल गैस और डीजल दोनों का इस्तेमाल कर सकती है।
रेलवे ने इस तकनीक को ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार (DPC) में लगाया है। इसके लिए 1400 हॉर्सपावर क्षमता वाली दो DPC को LNG डुअल-फ्यूल सिस्टम में बदला गया। नियमित संचालन से पहले 2,000 किलोमीटर से अधिक का फील्ड ट्रायल कर तकनीक की विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता को परखा गया।
एक बार LNG भरने पर करीब 444 किमी का सफर
ट्रेन में करीब 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है, जिसमें लगभग 950 से 1,000 किलोग्राम उपयोग योग्य LNG भरी जा सकती है। एक बार टैंक भरने पर करीब 444 किलोमीटर तक संचालन संभव बताया गया है।
डुअल-फ्यूल सिस्टम का उद्देश्य ट्रेन की डीजल पर निर्भरता कम करना है। रेलवे का आकलन है कि इससे ईंधन खर्च कम होने के साथ कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और पार्टिकुलेट मैटर जैसे उत्सर्जन में कमी लाने में मदद मिल सकती है।
ट्रायल से मिले आंकड़ों के आधार पर रेलवे ने प्रति ट्रेन सालाना करीब 23.9 लाख रुपए की ईंधन लागत बचने का अनुमान लगाया है। हालांकि वास्तविक बचत LNG और डीजल की कीमत तथा परिचालन परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
साबरमती से कई रेल परियोजनाओं की भी शुरुआत
अमित शाह ने LNG ट्रेन के साथ साबरमती से रेलवे की करीब 1,472 करोड़ रुपए की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शुभारंभ भी किया। इनमें WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव के लिए लगभग 700 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मेंटेनेंस शेड और रेल सुरक्षा से जुड़ी ‘कवच’ प्रणाली के कार्य शामिल हैं।
साबरमती-कलोल-साबरमती रेल खंड पर करीब 48 करोड़ रुपए की लागत से ‘कवच’ प्रणाली शुरू की गई है। अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-सामाख्याली रेल खंड पर भी कवच से जुड़े कार्यों के साथ साबरमती-सारखेज रेल मार्ग के दोहरीकरण जैसी परियोजनाओं को आगे बढ़ाया गया है।
शाह ने कार्यक्रम में LNG ट्रेन को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। भारतीय रेलवे डीजल की खपत कम करने और अपने परिचालन में स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए LNG के साथ हाइड्रोजन जैसी वैकल्पिक तकनीकों पर भी काम कर रहा है।



