16.514 किलो सोने के झुमके बनाकर जोयालुकास ने रचे दो विश्व रिकॉर्ड

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55 कारीगरों ने 5,840 घंटे में किया तैयार
दुबई/कोच्चि। केरल की आभूषण कंपनी जोयालुकास ने सोने के विशाल झुमकों की एक जोड़ी बनाकर दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड अपने नाम किए हैं। 22 कैरेट सोने से तैयार इन झुमकों को दुनिया की सबसे भारी और सबसे बड़ी सोने की बालियों की जोड़ी के रूप में मान्यता मिली है। इनका कुल शुद्ध सोने का वजन 16.514 किलोग्राम है।

‘मयूर सहस्र’ नाम की इस अनूठी कलाकृति का अनावरण शनिवार, 24 अक्टूबर को दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ‘ज्वेल ऑफ जॉय बाय जोयालुकास’ शोरूम में संयुक्त अरब अमीरात के अर्थव्यवस्था एवं पर्यटन मंत्री अब्दुल्ला बिन तौक अल मर्री ने किया। समारोह में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के प्रतिनिधि और आभूषण उद्योग से जुड़े कई प्रमुख लोग मौजूद रहे।

चार फीट से अधिक लंबाई, 55 कारीगरों की मेहनत

पारंपरिक भारतीय झुमका डिजाइन से प्रेरित इन आभूषणों की लंबाई 1.215 मीटर और व्यास 0.682 मीटर है। इन्हें तैयार करने में 55 कुशल कारीगरों ने कई महीनों तक काम किया और कुल 5,840 घंटे लगाए। झुमकों के डिजाइन में मोर के पंखों और उसकी सुंदरता से प्रेरित बारीक नक्काशी की गई है।

कंपनी ने इन झुमकों को ‘मयूर सहस्र’ नाम दिया है, जिसका अर्थ है ‘एक हजार मोर’। भारतीय परंपरा में मोर को सौंदर्य, गरिमा और आकर्षण का प्रतीक माना जाता है। इसी अवधारणा को पारंपरिक आभूषण कला के साथ जोड़कर इस विशाल कलाकृति को तैयार किया गया है।

एक जोड़ी से दो गिनीज रिकॉर्ड

गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स ने इस जोड़ी को दो अलग-अलग श्रेणियों में मान्यता दी है। पहला रिकॉर्ड दुनिया के सबसे भारी सोने के झुमकों की जोड़ी का है, जबकि दूसरा दुनिया के सबसे बड़े झुमकों की जोड़ी का है। कंपनी के अनुसार, इनका कुल शुद्ध सोने का वजन पिछले रिकॉर्डधारी आभूषणों के वजन से पांच गुने से भी अधिक है। अनावरण समारोह के दौरान गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के आधिकारिक निर्णायक ने जोयालुकास समूह के चेयरमैन जॉय अलुक्कास और जोयालुकास ज्वेलरी के सीईओ जॉन पॉल अलुक्कास को दोनों रिकॉर्ड के प्रमाणपत्र प्रदान किए।

दुबई को समर्पित की अनूठी कलाकृति

कंपनी के चेयरमैन जॉय अलुक्कास ने इस उपलब्धि को दुबई और इसे आकार देने वाले कारीगरों के प्रति सम्मान बताया। वहीं, जॉन पॉल अलुक्कास के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात में कंपनी के करीब चार दशक के अनुभव और दुबई की विकास यात्रा से प्रेरित होकर इस विशेष कलाकृति को बनाने का विचार आया। कंपनी का उद्देश्य पारंपरिक भारतीय आभूषण कला को असाधारण रूप में प्रस्तुत करने के साथ दुबई की वैश्विक पहचान में योगदान देना भी है।

अब शोरूम में देख सकेंगे लोग

कंपनी के अनुसार, ‘मयूर सहस्र’ झुमकों को बेचा नहीं जाएगा। इन्हें दुबई गोल्ड डिस्ट्रिक्ट स्थित ‘ज्वेल ऑफ जॉय बाय जोयालुकास’ शोरूम में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि स्थानीय निवासी और पर्यटक इस विश्व रिकॉर्डधारी कलाकृति को करीब से देख सकें। शोरूम में प्रवेश निःशुल्क है और यह सप्ताह के सभी दिनों में सुबह 10 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। जोयालुकास की यह उपलब्धि पारंपरिक भारतीय आभूषण डिजाइन, आधुनिक निर्माण क्षमता और कारीगरों के हुनर का अनूठा उदाहरण बन गई है।