तिरुवनंतपुरम। केरल लोक सेवा आयोग (PSC) की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर जांच तेज हो गई है। क्राइम ब्रांच की विशेष जांच टीम (SIT) ने बुधवार को आयोग के पूर्व उप सचिव पी. सतीश को गिरफ्तार कर लिया। वहीं, आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू भी जांच टीम के समक्ष पेश हुए, जहां उनसे मामले को लेकर पूछताछ की गई। यह कार्रवाई राज्य योजना बोर्ड में प्रमुख पद पर भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है।
58 अंकों के सवालों का मूल्यांकन नहीं होने का आरोप
जांच एजेंसी के अनुसार, विवादित परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि कुल 58 अंकों के 10 प्रश्नों का मूल्यांकन नहीं किया गया। आरोप है कि इस गड़बड़ी के कारण एक अभ्यर्थी को अनुचित लाभ मिला और वह मेरिट सूची में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया। जांचकर्ताओं का कहना है कि मूल्यांकन में कथित हेरफेर नहीं होता तो शीर्ष रैंक हासिल करने वाला अभ्यर्थी सूची में जगह भी नहीं बना पाता।
परीक्षा शाखा के प्रभारी रहे हैं सतीश
पूर्व उप सचिव पी. सतीश कोझिकोड स्थित अपने आवास से गिरफ्तार किए गए। वह संबंधित परीक्षा के संचालन और मूल्यांकन व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। जांच टीम ने इस मामले में लोक सेवा आयोग की परीक्षा शाखा के अतिरिक्त सचिव आर. हरि को भी आरोपी बनाया है। हरि को पहले ही निलंबित किया जा चुका है, जबकि सतीश के सेवानिवृत्ति लाभों पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई थी।
अध्यक्ष से पूछताछ, जांच का दायरा बढ़ा
आयोग के अध्यक्ष एमआर बैजू से पूछताछ ऐसे समय हुई है, जब केरल हाईकोर्ट ने मामले की जांच में देरी पर नाराजगी जताते हुए जांच एजेंसी को तेजी से कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। विशेष जांच टीम आयोग के अन्य सदस्यों के बयान भी दर्ज कर चुकी है। जांचकर्ताओं का उद्देश्य कथित अनियमितताओं की पूरी कड़ी का पता लगाना और यह स्पष्ट करना है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में गड़बड़ी किस स्तर पर हुई।
मामले की जांच अब अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं तक भी पहुंच गई है। मछली पालन विभाग में फिशरीज एक्सटेंशन ऑफिसर और खादी बोर्ड में विलेज ऑयल इंस्पेक्टर के पदों से संबंधित परीक्षाओं को लेकर भी अलग मामले दर्ज किए गए हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन घटनाओं के पीछे किसी व्यापक साजिश या अन्य अधिकारियों की भूमिका तो नहीं थी। फिलहाल जांच जारी है। अधिकारियों की भूमिका और भर्ती प्रक्रिया में कथित हेरफेर से जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के दौरान होगी।



