ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका, रिपब्लिकन के गढ़ों में भी मिली शिकस्त
महंगाई, महंगे जीवन और ईरान युद्ध के मुद्दे मतदाताओं पर रहे हावी
वॉशिंगटन। अमरीका के मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी से कांग्रेस के दोनों सदनों का नियंत्रण छीन लिया है।
मंगलवार को हुए मतदान के बाद बुधवार को सामने आए चुनावी अनुमानों ने अमरीकी राजनीति में बड़े सत्ता-संतुलन परिवर्तन के संकेत दे दिए हैं। डेमोक्रेट्स ने न केवल प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल किया, बल्कि सीनेट में भी रिपब्लिकन बढ़त को पलट दिया। इसे ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के लिए अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
चुनावी नतीजों के शुरुआती आकलन के मुताबिक डेमोक्रेट्स ने पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन समर्थक माने जाने वाले कई राज्यों में भी जीत दर्ज की। सीनेट में पार्टी को कम से कम सात सीटों का फायदा हुआ है। वहीं प्रतिनिधि सभा में भी डेमोक्रेट्स ने दो दर्जन से अधिक सीटें रिपब्लिकन से छीनकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया।
रिपब्लिकन के मजबूत राज्यों में भी डेमोक्रेट्स की सेंध
इस चुनाव में सबसे चौंकाने वाला प्रदर्शन उन राज्यों में देखने को मिला, जहां पिछले चुनावों में रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहा था। कंसास में डेमोक्रेट्स ने करीब एक सदी बाद सीनेट सीट जीतकर इतिहास रचा। दक्षिण कैरोलिना में भी रिपब्लिकन उम्मीदवार को हार का सामना करना पड़ा। टेक्सास में डेमोक्रेट्स ने सीनेट सीट जीतने के साथ ही रिपब्लिकन गवर्नर ग्रेग एबॉट को भी सत्ता से बाहर कर दिया।
मेन में पांच बार सीनेटर रह चुकीं रिपब्लिकन नेता सुसान कॉलिन्स को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन ने पराजित किया। इन नतीजों ने संकेत दिया है कि इस बार मतदाताओं ने पार्टी की पारंपरिक निष्ठा से आगे बढ़कर आर्थिक और राष्ट्रीय मुद्दों को प्राथमिकता दी।
महंगाई और ईरान युद्ध से नाराजगी का असर
चुनाव विश्लेषणों के अनुसार डेमोक्रेट्स की जीत के पीछे महंगाई, रोजमर्रा की वस्तुओं की बढ़ती कीमतें, जीवनयापन का खर्च और ईरान युद्ध को लेकर जनता में असंतोष प्रमुख कारण रहे। डेमोक्रेटिक पार्टी ने अपने प्रचार अभियान में ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों, टैरिफ और ईरान के साथ युद्ध के प्रभावों को प्रमुखता से उठाया।
मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने चुनाव को ट्रंप की नीतियों पर अपनी नाराजगी जाहिर करने के अवसर के रूप में देखा। सर्वेक्षणों में भी बड़ी संख्या में मतदाताओं ने राष्ट्रपति की नीतियों पर कांग्रेस की ओर से अधिक निगरानी और नियंत्रण की जरूरत जताई थी।
जनवरी से बदलेगा अमरीकी कांग्रेस का समीकरण
डेमोक्रेट्स के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने से ट्रंप प्रशासन के लिए आने वाले दो वर्ष चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। नई कांग्रेस जनवरी 2027 में कार्यभार संभालेगी। इसके बाद डेमोक्रेट्स सरकारी नीतियों की जांच, प्रशासनिक फैसलों पर सवाल और राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे को रोकने की स्थिति में होंगे।
सीनेट में बहुमत मिलने से राष्ट्रपति की ओर से प्रस्तावित नियुक्तियों को मंजूरी देने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। वहीं प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेट्स को प्रशासन के कामकाज की जांच और विभिन्न मुद्दों पर सुनवाई कराने का अवसर मिलेगा। हालांकि राष्ट्रपति के पास कांग्रेस से पारित विधेयकों को वीटो करने का अधिकार बना रहेगा।
ट्रंप ने हार को व्यक्तिगत झटका मानने से किया इनकार
चुनावी नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार को अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक पराजय मानने से इनकार किया। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवारों के प्रदर्शन पर सवाल उठाए और संकेत दिया कि डेमोक्रेट्स के साथ कुछ मुद्दों पर सहयोग संभव है, लेकिन अपने विरोध में आने वाले विधेयकों को वीटो करने का अधिकार भी इस्तेमाल करेंगे।
इस चुनाव के परिणामों ने 2028 के राष्ट्रपति चुनाव से पहले ही अमेरिकी राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। डेमोक्रेट्स के लिए यह जीत राजनीतिक वापसी का बड़ा अवसर है, जबकि रिपब्लिकन पार्टी को ट्रंप के नेतृत्व और अपनी चुनावी रणनीति पर नए सिरे से विचार करना पड़ सकता है।


