लोकतंत्र में सक्रिय विपक्ष अनिवार्य : नरेन्द्र मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने लोकतंत्र में विपक्ष की सक्रिय भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सोमवार को कहा कि विपक्ष को सदन में अपने संख्या बल की चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि सरकार के लिए उसका हर शब्द और भावना मूल्यवान है।

मोदी ने 17वीं लोकसभा के पहले सत्र के पहले दिन संसद भवन परिसर में मीडिया के समक्ष अपने वक्तव्य यह बात कही। उन्होेंने सभी सदस्यों से सदन में सत्ता पक्ष एवं विपक्ष की भावना के बजाय निष्पक्ष भाव से जन कल्याण के लिए काम करने का अनुरोध किया।

उन्होंने कहा कि अगले पांच साल के दौरान सदन की गरिमा को ऊपर उठाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होेंने विपक्ष की महत्ता स्वीकार करते हुए कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का होना, विपक्ष का सक्रिय होना, विपक्ष का सामर्थ्‍यवान होना यह लोकतंत्र की अनिवार्य शर्त है और मैं आशा करता हूं कि प्रतिपक्ष के लोग नंबर की चिंता छोड़ दें। देश की जनता ने जो उनको नंबर दिया है, वो दिया है, लेकिन हमारे लिए उनका हर शब्‍द मूल्‍यवान है, उनकी हर भावना मूल्‍यवान है।

सदन में सार्थक बहस की उम्मीद करते हुए उन्होंने कहा कि सदन में जब हम उस कुर्सी पर बैठते हैं, सांसद के रूप में बैठते हैं, तब पक्ष-विपक्ष से ज्‍यादा निष्‍पक्ष की भावना बहुत महत्‍व रखती है और मुझे विश्‍वास है कि पक्ष और विपक्ष के दायरे में बंटने की बजाय निष्‍पक्ष भाव से जनकल्‍याण को प्राथमिकता देते हुए हम आने वाले पांच साल के लिए इस सदन की गरिमा को ऊपर उठाने में प्रयास करेंगे।

उन्होेंने भरोसा जताया कि लोकसभा का कार्यकाल पहले की तुलना में अधिक परिणामकारी होगा और जनहित के कामों में अधिक ऊर्जा, अधिक गति और अधिक सामूहिक चिंतन के भाव का अवसर मिलेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनाव के बाद, नई लोकसभा के गठन के उपरांत आज प्रथम सत्र प्रारंभ हो रहा है। सांसदों में नई उमंग, नया उत्‍साह और नए सपने हैं। उन्होंने कहा कि यह चुनाव विशेष रहा है। इसमें आजादी के बाद सबसे ज्‍यादा मतदान हुआ है और सबसे ज्‍यादा महिला प्रतिनिधि चुनी गई हैं।

पहले की तुलना में बहुत अधिक महिला म‍तदाताओं ने मतदान किया है। कई दशकों के बाद एक सरकार को दोबारा पूर्ण बहुमत के साथ और पहले से अधिक सीटों के साथ जनता-जनार्दन की सेवा करने का अवसर मिला है।

मोदी ने कहा कि सांसद अच्छे विचार रखते हैं और बहस को जीवंत बनाते हैं। अगर कोई सांसद सदन में तर्कपूर्ण तरीके से सरकार की आलोचना करता है तो उससे लोकतंत्र को बल मिलता है। उन्होंने कहा कि इस लोकतंत्र को बल देने में आप सबसे मेरी बहुत अपेक्षाएं हैं।

शुरू में तो जरूर उन अपेक्षाओं को पूरा करेंगे, लेकिन पांच साल तक इस भावना को प्रबल बनाने में आप भी बहुत बड़ी सकारात्‍मक भूमिका अदा कर सकते हैं। और अगर सकारात्‍मक भूमिका होगी और सकारात्‍मक विचारों को बल देंगे तो सदन में भी सकारात्‍मकता की दिशा में जाने का सबका मन बनेगा।

उन्होंने नये सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि 17वीं लोकसभा में हम उसी नई ऊर्जा, नये विश्‍वास, नए संकल्‍प, नए सपनों के साथ, साथ‍ मिल करके आगे चलेंगे। देश की आम जनता की आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण करने में कहीं कमी नहीं रखी जानी चाहिए।

मोदी ने ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि गत पांच वर्ष के दौरान जब सदन स्वस्थ वातावरण में चला है तो देशहित के अच्छे निर्णय हुए हैं। उन्होेंने कहा कि उन अनुभवों के आधार पर मैं आशा करता हूं कि सभी दल बहुत ही उत्‍तम प्रकार की चर्चा, जनहित के फैसले और जनाकांक्षाओं की पूर्ति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

‘सबका साथ सबका विकास’ ने देश की जनता में एक अदभुत विश्‍वास भर दिया और उस विश्‍वास को लेकर आम जनता की आशा-आकांक्षाओं और सपनों को पूरा करने के लिए आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे।

उन्होंने नए सांसदों का स्वागत करते हुए कहा कि 17वीं लोकसभा में हम नई ऊर्जा, नये विश्‍वास, नये संकल्‍प, नए सपनों के साथ, साथ‍ मिल करके आगे चलेंगे। देश की सामान्‍य जनता की आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण करने में कहीं कमी नहीं रखी जानी चाहिए।