अभिनेता दिलीप के फोन को फोरेंसिक लैब में भेजने की मांगी गयी अनुमति

कोच्चि। केरल अपराध शाखा ने अलुवा मजिस्ट्रेट अदालत में अर्जी दायर कर मलयालम अभिनेता दिलीप के मोबाइल फोन को तिरुवनंतपुरम की फोरेंसिक लैब भेजने की बुधवार को अनुमति मांगी।

इससे पहले वर्ष 2017 के अभिनेत्री यौन उत्पीड़न मामले की जांच कर रहे जांच अधिकारियों को कथित रूप से धमकाने के मामले में अभिनेता दिलीप के खिलाफ दर्ज एक नए मामले के संबंध में दिलीप और अन्य आरोपियों के सभी छह मोबाइल फोन सोमवार को एक सीलबंद लिफाफे में उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपे गए थे।

रजिस्ट्रार जनरल ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद सभी मोबाइल फोन अलुवा मजिस्ट्रेट कोर्ट को भेज दिए। हालांकि क्राइम ब्रांच ने उन्हें अपने हिरासत में लेने की मांग की है।

अभिनेता ने अपराध शाखा की मांग के खिलाफ कदम उठाते हुए आरोप लगाया कि वह सबूतों में हेरफेर करेगी क्योंकि फोरेंसिक लैब राज्य अपराध शाखा का हिस्सा है।
इससे पहले, सभी छह मोबाइल फोन जिनमें तीन अभिनेता दिलीप द्वारा, दो उनके भाई अनूप और एक अन्य उनके बहनोई सूरज द्वारा उपयोग किए जा रहे थे – उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपे गए थे।

रविवार को, फोरेंसिक जांच के लिए मुंबई भेजे गए अभिनेता के मोबाइल फोनों को रजिस्ट्रार जनरल के समक्ष जमा करने के न्यायालय के निर्देश के अनुसार कोच्चि वापस लाया गया।

अभिनेता ने, हालांकि, मोबाइल फोन सरेंडर करने के लिए तीन दिन का समय मांगा लेकिन अदालत ने उनकी याचिका खारिज कर दी और उन्हें केवल दो दिन का समय दिया।

अभिनेता यह दावा करते हुए अपने मोबाइल फोन को सरेंडर करने से हिचकिचा रहे थे कि उन्होंने अपनी पूर्व पत्नी और वकील के साथ निजी बातचीत की थी। दिलीप के वकील एडवोकेट बी रमन पिल्लई ने भी मोबाइल फोन फॉरेंसिक लैब को सौंपने का विरोध किया।

इससे पहले दिलीप के अलावा उसके भाई अनूप, बहनोई टीएन सूरज, रिश्तेदार अप्पू, दोस्त बैजू चेंगमनाद और अलुवा मूल के सरथ से क्राइम ब्रांच ने तीन दिन तक पूछताछ की थी। जांच कर रहे अधिकारियों को धमकाने के मामले में अभिनेता को पहला आरोपी माना गया है। अभिनेता के भाई अनूप और उनके बहनोई सूरज ने भी अग्रिम जमानत के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

दिलीप के खिलाफ गैर जमानती मामला एक ऑडियो क्लिप के आधार पर दायर किया गया है जिसमें उन्होंने अधिकारियों को कथित तौर पर धमकी दी। साथ ही अपराध शाखा के निदेशक बालचंद्र कुमार के एक बयान को भी इस मामले में आधार बनाया गया है।

अपनी अग्रिम जमानत में, अभिनेता दिलीप ने दावा किया कि उन्होंने अधिकारियों को धमकी नहीं दी और बाद में उनके खिलाफ साजिश रची गयी। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ मामला मनगढ़ंत सबूतों के आधार पर है। इससे पहले, उच्च न्यायालय ने अभिनेता द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई दो फरवरी तक के लिए स्थगित कर दी थी।