राजपूत संघर्ष समिति के कांग्रेस को समर्थन पर समाज दोफाड!

अजमेर। अजमेर संसदीय सीट पर हो रहे उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने का फतवा जारी करने वाली राजपूत संघर्ष समिति के फैसले के खिलाफ को समाज में ही दोफाड की स्थिति बन आई है। राजपूत युवा जागृति मंच ने फतवे को सिरे से खारिज कर दिया है।

मंच के प्रदेशाध्यक्ष जितेंद्र सिंह कारंगा, देवेंद्र सिंह शेखावत, नरेन्द्र सिंह चुंडावत, प्रदीप सिंह गोयला ने बुधवार को प्रेस वार्ता कर सवाल उठाया कि आखिर राजनीतिक फतवे की जरूरत क्यों पडी। उन्होंने कहा कि समिति समाज के बीच आकर स्पष्ट करें कि कांग्रेस को समर्थन देने की क्या मजबूरी थी, क्या पढ़ा लिखा समझदार आम राजपूत स्वविवेक से मतदान करने का भी अधिकार नहीं रखता।

सामाजिक उत्थान और सेवा के लिए बनी संस्थाएं अपने भवनों को राजनीतिक अखाड़ा क्यों बना रही हैं। प्रत्येक समाज में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं के लोग होते हैं, ऐसे में इन संस्थाओं को किसने अधिकार दिया कि वह एक पार्टी के पक्ष में फतवा जारी करें।

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राजनीतिक फतवे जारी समाज के हित में नहीं है, राजपूत समाज आनंदपाल एनकाउंटर और फिल्म पद्मावत से संबंधित मामले आक्रोशित है। इन दोनों ही मामलों में वर्तमान राज्य सरकार सभी मांगे मान चुकी है। आनंदपाल मामले में सीबीआई की जांच और फिल्म पद्मावत मसले में सबसे पहले राजस्थान सरकार ने बैन लगाकर समाज की मांगों को पूरा किया है।

एनकाउंटर के अलावा दो अन्य मामलों में हो रही सीबीआई जांच में किसी भी सामाजिक नेता को प्रभावित नहीं किया जाए साथ ही समाज के नेताओं ओर युवाओं पर लगे झूठे मामलों का जल्द निस्तारण करते हुए उन्हें वापस लिए जाने मांग सरकार से करते हैं।

हमारे समेत किसी भी सामाजिक संगठन को हक नहीं कि राजनीतिक फतवे जारी करें। आम राजपूत को स्वविवेक से मतदान करने का हक है। कांग्रेस को समर्थन देने वाली तथाकथित संघर्ष समिति क्यों तीनों सीटों में से एक पर भी राजपूत को टिकट नहीं दिलवा सकी।

राजपूती स्वाभिमान और गौरवान्वित इतिहास से जुड़े फिल्म पद्मावत मामले में कांग्रेस शासित किसी भी प्रदेश में बैन नहीं लगाया गया, जबकि भाजपा शासित कई राज्यों में फिल्म पूर्णत: बैन की जा चुकी है। हम प्रधानमंत्री मोदी से मांग करते हैं कि इस विवादित फिल्म पर पूरे देश बैन लगाया जाए।

दुखद बात है कि समाज की कथित संघर्ष समिति ही स्वजातीय नौजवान भाई शक्तिसिंह हाडा को मांडलगढ़ से हराने का फतवा जारी कर रही है। क्या राजनीतिक लाभ और लालच में राजपूत का साथ देने का क्षत्रीय धर्म भी वे भूला चुके हैं। आम राजपूत ऐसे फतवों को सिरे से खारिज करते हुए स्वविवेक से मतदान करेगा।

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