अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की साधारण सभा संपन्न

अजमेर। राजस्थान में अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड की 30वीं साधारण सभा एवं खुला अधिवेशन आज यहां जवाहर रंगमंच सभागार में ध्वनिमत एवं सर्व सम्मति से विभिन्न प्रस्तावों पर मोहर लगाने के साथ सम्पन्न हुआ।

संघ की यह साधारण सभा वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 के लिए रही। वर्तमान में संघ का कुल वार्षिक बजट 900 करोड़ रुपए रखा गया। अजमेर डेयरी सदर रामचंद्र चौधरी ने अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में घोषणा की कि 15 जनवरी 2022 तक किसी पशुपालक का पैसा बकाया नहीं रखा जाएगा,सभी का समय पर भुगतान होगा। उन्होंने जिले की 892 ग्रामों से आने वाले दूधों से बकाया भुगतान का भरोसा दिलाया।

एक अन्य घोषणा में उन्होंने सर्वाधिक फैट दिए जाने का भी भरोसा दिलाया जिससे पशुपालकों को उचित भाव मिल सकें। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में लियन सीसन में न्यूनतम 700 रुपए प्रति किलो फैट सात माह तक एवं फ्लस सीजन में रुपए 650 प्रति किलो फेट सौ दिन के लिए रखा जाएगा। शेष 21 फरवरी 2022 से 31 मार्च 2022 तक 700 रुपए प्रति किलो फैट पुनः दी जाएगी जिससे दुग्ध उत्पादकों को औसत वर्ष भर 46 रुपए प्रति लीटर की दर से भुगतान किया जाएगा जो देश प्रदेश में ही नहीं बल्कि विश्व में सर्वाधिक होगा।

चौधरी ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा मुख्यमंत्री संबल योजना के तहत वर्तमान में दो रुपए प्रति लीटर समर्थन मूल्य दिए जाने तथा अजमेर डेयरी को गत दिनों 9.45 करोड़ रुपए का भुगतान किए जाने पर आभार व्यक्त करते हुए मांग की कि कर्नाटक सरकार की भांति दुग्ध उत्पादन पर पांच रुपए प्रति लीटर न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जाए।

उन्होंने भारत सरकार पर सहकारी क्षेत्र की डेयरियों का गला घोंटने का आरोप लगाते हुए कहा कि जीएसटी पांच प्रतिशत से बढ़ाकर बारह प्रतिशत करने से हमारी आर्थिक स्थिति बिगड़ी है। हमें जीएसटी की मद में चार करोड़ रुपए सालाना का भुगतान करना पड़ रहा है। हमारी मांग है कि केंद्र सरकार ने जिस तरह काले कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की उसी तरह जीएसटी को भी कम करें।

चौधरी ने घोषणा की कि जीएसटी नहीं हटाने की स्थिति में राज्य के पशुपालक आने वाले दिनों में दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने से पीछे नहीं हटेंगे। चौधरी जो कि पिछले तीस वर्षों से अजमेर डेयरी के अध्यक्ष निर्वाचित होते आ रहे वे आज अपने भाषण के दौरान बहुत ज्यादा भावुक हो गए।

उन्होंने कहा कि मेरी बची हुई जिंदगी पशुपालकों के लिए ही है। हम डेयरी को डेनमार्क के समकक्ष लाना चाहते है। यही कारण है कि नवीन प्लांट में विभिन्न देशों की विदेशी तकनीक को इस्तेमाल किया गया है और इसके लिए हमें कर्जा लेना पड़ा है। डेयरी को कर्जे से मुक्त करने और पशुपालकों का समय पर भुगतान करना मेरी प्राथमिकता है।

भुगतान में तेजी एवं पारदर्शिता लाने के लिए दुग्ध उत्पादक समितियों का डिजिटलाइजेशन कार्य किया जा रहा है। अगले वर्ष एक अप्रैल 2022 से संघ द्वारा समस्त दुग्ध उत्पादकों का दूध का भुगतान सीधा उनके बैंक खातों में भिजवाया जाएगा। आज की साधारण सभा में दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के 550 से ज्यादा अध्यक्षों ने भाग लिया।