अजमेर जिला शराब विक्रेता संघ का प्रदर्शन, वाइन शॉप बंद रखकर निकाली रैली

अजमेर। शराब नीति के विरोध में अजमेर जिला शराब विक्रेता संघ ने शुक्रवार को रैली निकालकर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कलक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा तथा शराब विक्रेताओं ने अपनी दुकानें भी बंद रखी। शराब विक्रेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी 3 दिनों में निस्तारण नहीं किया तो सभी विक्रेता दुकाने बंद कर प्रदर्शन करेंगे।

जिला शराब विक्रेता संघ के अध्यक्ष जितेंद्र रंगवानी ने बताया कि कोरोना महामारी और आर्थिक मंदी के चलते व सरकार की गलत आबकारी नीति की वजह से शराब ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। सभी अनुज्ञाधारी पिछले 6 माह से आर्थिक संकट में है और बिक्री से अधिक गारंटी होने के कारण सभी दुकानें माल (शराब) से भरी पड़ी है।

सरकार द्वारा संपत्ति की तरह नीलामी लगाकर शराब की मात्रा तो बढ़ा दी है। लेकिन जरुरत से ज्यादा शराब पिलाएं और साथ ही बीच बीच में विभाग द्वारा अनाधिकृत तरीके से राइडर लगाकर जो ग्राहक शराब नहीं पीता है उसे बेचने के लिए पाबंद कर रहे है।

इन परिस्थितियों में प्रदेश और अजमेर जिले के ठेकेदार दूकान आगे चलाने में असमर्थ हो रहे है। जिसे लेकर शुक्रवार को अजमेर जिला शराब विक्रेता संघ द्वारा रैली निकालकर प्रदर्शन कर कलक्टर प्रकाश राजपुरोहित को शराब विक्रेताओं ने 12 सूत्री मांग का ज्ञापन दिया।

ज्ञापन में शराब विक्रेताओं ने जिक्र किया है कि सरकार की गलत आबकारी नीति के चलते निजी कम्पनियों से मिली भगत कर जो शराब नहीं बिकती है, उस पर राइडर लगाया जाता है ताकि ठेकेदार द्वारा मजबूरी में नहीं बिकने वाला माल को भी उठान किया जाए। इस तरह के राइडर हटाया जाए।

आबकारी वर्ष की शुरुआत में प्रथम तिमाही अप्रैल, मई, जून में कोरोना महामारी की वजह से लॉकडाउन लगने व दुकानों का समय सुबह 6 से 11 बजे तक होने से तीन माह तक 70 प्रतिशत बिक्री प्रभावित हुई है जिसकी सरकार द्वारा 15-20 प्रतिशत की छूट दी गई जिसकी वजह से शराब ठेकेदारों द्वारा जुलाई अगस्त, सितम्बर की गारन्टी पूर्ण नहीं हो पा रही है। इसमें छूट दिलवाने की कृपा करवाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार द्वारा शराब ठेकेदारों को गारन्टी पर दुकानें दी हुई है परन्तु गारन्टी के साथ बेसिक लाइसेंस फीस और जोड़ दी गई है, गारंटी पूरी नहीं होने पर ठेकेदार माल नहीं उठा कर गारन्टी नकद जमा करा देते परन्तु जो माल नहीं उठता है उस पर 1000 प्रति पेटी गारन्टी अलग से ली जा रही है जो सरासर गलत है। अतः जो माल नहीं उठाया जा रहा है उस पर अलग से बेसिक लाइसेंस फीस की छूट दी जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार द्वारा आबकारी नीति में आरएसबीसीएल में आरटीडीसी को भी नीलामी में दुकाने दी गई थी। परन्तु नुकसान होने के कारण सरकारी उपक्रम द्वारा दुकानें सरेन्डर कर दी गई उन पर कोई बकाया नहीं निकाला गया न ही ब्लैक लिस्टेड किया गया उसी नियम के तहत जो भी ठेकेदार नुकसान के चलते दुकान सरेन्डर करना चाहता है उसे भी सरेन्डर करने की इजाजत दी जाए।

ज्ञापन में कहा गया है किसरकार द्वारा आबकारी नीति में बताया गया था जो दुकान पेंडिंग रहेगी उसे सरकार द्वारा चलाया जाएगा जबकि विभाग द्वारा वह दुकानें 60 से 70 प्रतिशत कम कर के नीलामी की जा रही है जिसमें उच्च नीलामी में दुकाने उठाने वाले ठेकेदार को नुकसान हो रहा है क्योंकि कम गारन्टी में दुकान उठाकर कम दर में शराब बेचने से उच्च दर पर दुकान लेने वाले की बिक्री प्रभावित होती है उसे रोका जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि प्रथम तिमाही कोरोना महामारी व द्वितीय आर्थिक मंदी होने की वजह से गारंटी पूर्ण करने के लिए तृतीय व चतुर्थी तिमाही का समय दिया जाए ना की उसे प्रथम व द्वितीय तिमाही में गारन्टी पूर्ति नहीं होने से पलेंटी नहीं ली जाए शेष तिमाही में गारन्टी पूर्ति करने का समय दिया जाए।

जिन दुकानों पर प्रथम व द्वितीय तिमाही का धरोहर राशि से अधिक बकाया चल रहे है उसे निरस्त कर सरकार द्वारा चलाया जाए ना की कम दर पर नीलाम किया जाए।

शराब ठेकेदार जितनी शराब राजस्थान की जनता पीती है उतनी ही पिला सकता है फिर भी शराब की गारन्टी का उठाव बचता है और ठेकेदार द्वारा उठाया नहीं जाता है उस पर सिर्फ आबकारी शुल्क लिया जाए व बीएलएफ नहीं लिया जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि आबकारी निति में अंग्रेजी शराब पर 20 प्रतिशत मार्जिन बताया गया था परन्तु वही 10-12 प्रतिशतही दिया जा रहा है। जिससे दुकानों के खर्चे पूरे नहीं हो रहे है उसे बढ़ाकर 20 प्रतिशत किया जाए। आबकारी नीति में जब दुकान की गारन्टी राशि दे दी गई है तो उस पर से कम्पोज़िट फीस एवं एमएसपी की बाध्यता ख़त्म की जाए।

ज्ञापन में कहा गया है कि अप्रैल मई जून में जिन अनुज्ञाधारियों द्वारा देशी की गारन्टी अधिक पूर्ति की गई थी उसको भी छूट का अधिकार देकर अन्य तिमाही में समायोजित किया जाए।सरकार द्वारा बची हुई कम्पोज़िट फीस भी माफ़ की जाए ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति बची हुई कम्पोजिट फीस चुकाने की नहीं है।