अजमेर नगर निगम चुनाव : वार्ड 69 में निर्दलीय संदीप तंवर के कार्यालय का उदघाटन

अजमेर। नगर निगम अजमेर के चुनाव में वार्ड 69 से निर्दलीय पार्षद प्रत्याशी संदीप तंवर ने चुनाव प्रचार के दूसरे चरण को और गति देते हुए गुरुवार को समर्थकों के साथ विभिन्न क्षेत्रों में सघन जनसंपर्क किया।

विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमा चुके संदीप तंवर को एक बार फिर अलमारी चुनाव चिन्ह मिला है। उन्होंने दोपहर करीब 12 बजे बक्शीजी की कोठी में अपने चुनाव कार्यालय का श्रीगणेश किया। इस मौके पर बडी संख्या में उनके समर्थक और वार्ड के वाशिंदे मौजूद रहे।

कार्यालय उदघाटन के साथ ही तंवर ने समर्थकों के साथ अलग अलग टोलियां बनाकर व्यापक जनसंपर्क शुरू कर दिया। उन्होंने बक्शीजी की कोठी, माली मोहल्ला, पट्टी कटला, घोसी मोहल्ला तथा पीर मिट्ठा गली में मतदाताओं से संपर्क साधा।

राजनीतिक छवि के साथ साथ समाजसेवी के रूप में छवि होने के चलते तंवर पूरे आत्मविश्वास के साथ पार्षद चुनाव में उतरे हैं। उन्होंने भाजपा से टिकट पाने की कोशिश की लेकिन सफल नहीं हुए और निर्दलीय के रूप में ताल ठोंक दी। इस वार्ड में भाजपा के अशोक मुदगल, कांग्रेस से दीनदयाल के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी गीता गुर्जर और पंकज व्यास भी भाग्य आजमा रहे हैं।

वार्ड की राजनीतिक पृष्ठभूमि

नए सीमांकन के बाद भी वार्ड के जातिगत समीकरणों में अधिक बदलाव नहीं आया है। गत बार इस वार्ड से बीजेपी से भागीरथ जोशी जीते थे, उनका असमय निधन होने पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस के पंडित दीनदयाल विजयी हुए और भाजपा से यह वार्ड छिन गया। कांग्रेस ने दीनदयाल को एक बार फिर मौका दिया है, वहीं भाजपा के अशोक मुदगल की पहचान बूथ लेवल के कार्यकर्ता रूप में रही है। इस बार गीता गुर्जर ने कांग्रेस से और पंकज व्यास ने भाजपा से टिकट हासिल करने का प्रयास किया था लेकिन सफल नहीं होने पर निर्दलीय के रूप में चुनावी समर में उतर पडे। निर्दलीय प्रत्याशी संदीप तंवर अपने तेज तर्रार तेवरों और राष्ट्रवादी सोच के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं। उन्हें इस बार नेशनल फ्यूचर पार्टी का समर्थन भी मिला है।

पोस्टर फाडे जाने से रोष

वार्ड 69 में शांति पूर्ण तरीके से चल रहे चुनाव प्रचार में गुरुवार देर शाम उस समय उबाल आ गया जब अज्ञात लोगों ने निर्दलीय प्रत्याशी संदीप तंवर के पोस्टर फाड डाले। मामला संज्ञान में आने के बाद तंवर ने कहा कि असामाजिक तत्वों की करतूत से निपटना पुलिस और प्रशासन का काम है, उनके समर्थक सदैव शांतिपूर्व चुनाव के पक्ष में रहे हैं।