ट्रेनों में जहरखुरानी के मामले में दो अभियुक्तों को तीन साल की सजा

अजमेर। ट्रेनों में जहरखुरानी के तीन साल पुराने मामले में गुरुवार को एडीजे 5 कोर्ट ने दो अभियुक्तों को तीन-तीन साल की सजा सुनाई साथ ही 7 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया।

अपर लोक अभियोजक शिशि प्रकाश इंदोरिया ने बताया कि कानपुर निवासी दोनों अभियुक्त रज्जन उर्फ शिवचरण तथा सुरेन्द्र सिंह के खिलाफ 2015 में पीडित भिंड निवासी अमर शर्मा की रिपोर्ट के आधार पर मामला दर्ज हुआ था।

पीडित 18 जुलाई 2015 को अपने दो और साथियों के साथ आगरा की ओर जा रहा था। सफर के दौरान चार पांच लोगों के समूह ने उनसे जान पहचान बढा ली तथा साथ खाना भी खाया। अजमेर स्टेशन पर आने पर उनमें से एक ने सबके लिए चाय मंगा ली। इसी बीच उनमें से एक ने बिस्कुट का पैकट निकाला और एक खुद खाया फिर तीन अलग अलग हम लोगों को भी दिए। थोडी देर बाद मुझे नशा सा छाने लगा।

अर्ध बेहोशी की हालत में मुझे लगा कोई मेरे सामान की तलाशी ले रहा है। इसके बाद अधिक अंधेरी सी छा् गई। होश आने पर मैने खुद को एसएमएस अस्पताल जयपुर में भर्ती पाया। मैने अपना सामान संभाला तो बैग में रखे 8 हजार रुपए, मोबाइल फोन व कपडे नहीं मिले। मेरे दोनों साथी आयरन और चन्द्रपाल भी भर्ती मिले। चन्द्रपाल के भी 7 हजार रुपए नगद व अन्य सामान, आयरन के 6 हजार रुपए नकद तथा मोबाइल आदि चोरी कर लिए गए थे।

जीआरपी ने इस मामले में पीडितों को घटना के दिन आगरा फोर्ट ट्रेन की बनाई गई सीडी दिखाकर संदिग्धों की पहचान कराई। पुलिस ने अनुसंधान को आगे बढाते हुए मोबाइल नंबरों तथा कॉल डिटेल के आधार पर उन्हें इस्तेमाल कर रहे लोगों को भी खोज निकाला। उनसे प्राप्त जानकारी के आधार तक अभियुक्तों रज्जन तथा सुरेन्द्र को कानपुर से धर दबोचा। पूछताछ के दौरान उन दोनों ने घटना कारित करना स्वीकार किया।

इस मामले में प्रोसिक्यूशन ने 12 गवाह, 27 दस्तावेजी साक्ष्य तथा अहमदाबाद रेलवे स्टेशन की सीडी सबूत के तौर पर कोर्ट में पेश की। साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर एडीजे 5 की न्यायाधीश सीमा अग्रवाल ने रज्जन उर्फ शिवचरण तथा सुरेन्द्र सिंह को दोषी करार देते हुए धारा 328, 379 व 34 के तहत दोषी मानते हुए तीन तीन साल की सजा सुनाई तथा 7 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।