समाजवादी गढ़ इटावा को भगवामय बनाने में जुटी भाजपा

इटावा। समाजवादी पार्टी का गढ़ रहे उत्तर प्रदेश के इटावा मे भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठनों की सक्रियता राजनीतिक हलको में जोरदार चर्चा के केंद्र मे बनी हुई है।

अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के तीन दिन के अधिवेशन के आज पहले दिन प्रदर्शनी का शुभांरभ पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री और इटावा के सांसद रामशंकर कठेरिया ने किया। कठेरिया ने अपने संबोधन मे कहा कि कभी वो भी अखिल भारतीय विधार्थी परिषद के सदस्य हुआ करते थे और आज आप देख सकते है वो कहां पर आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि इस संगठन के प्रतिनिधियों का फीस माफ करने का काम नहीं होता है और ना ही प्रधानाचार्य के सामने प्रदर्शन करने का समय होता है। इस संगठन के प्रतिनिधि राष्ट्र निर्माण मे अपनी भूमिका का निर्वाह करते है।

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कानपुर प्रांत का 60वां तीन दिनी प्रांत अधिवेशन 22 से 24 फरवरी तक आयोजित हो रहा है। दूसरे दिन राज्य के कानून मंत्री बृजेश पाठक सम्मेलन में शामिल होंगे।

अखिल भारतीय विधार्थी परिषद का यह अधिवेशन पहली बार इटावा में हो रहा है। जिसे इटावा के कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का विषय माना जा रहा है। तीन दिन का अधिवेशन डा.भीमराव आंबेडकर कृषि इंजीनियरिग कालेज में आयोजित किया जा रहा है। जिसमें कानपुर बुंदेलखंड क्षेत्र के 500 चुने हुए कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं। अधिवेशन को लेकर विद्यार्थी परिषद के 200 कार्यकर्ता प्रचार प्रसार व व्यवस्था जुटाने में दिन रात जुटे रहे।

मई 2017 मे विहिप की दुर्गा वाहिनी का प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न कराया गया जिसे राजनैतिक तौर पर काफी अहम माना गया। उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव के गृहनगर इटावा में दक्षिण में यमुना किनारे स्थित श्री सिद्ध गुफा जीव रक्षा गौशाला में विश्व हिंदू परिषद के महिला अनुसांगिक संगठन दुर्गावाहिनी कानपुर प्रांत का अभ्यास वर्ग आयोजित किया।

इससे पहले मई 2019 मे बंजरग दल का इटावा के केके डिग्री कालेज में 26 मई से 3 जून तक शौर्य प्रशिक्षण समारोह आयोजित कराया जा चुका है। बंजरग दल के शौर्य प्रशिक्षण वर्ग में कानपुर प्रान्त के अंतर्गत 21 जिलों के करीब 200 कार्यकर्ताओं ने 26 मई से 3 जून तक कार्यक्रम में भाग लिया। सप्ताह भर प्रवास मे राष्ट्र रक्षा के अलावा अन्य संकटों से निपटने के करतब भी सीखें। इस कार्यक्रम मे सभी शिक्षाथिर्यो को दंड,राइफल और बाघा के कठिन समस्याओं को निपटने के गुरू सिखाये गए।

असल मे भारतीय जनता पार्टी के सहयोगी संगठन करीब 5 साल से इटावा से समाजवादी प्रभाव को नाकाम करने की दिशा में सक्रिय भूमिका अदा करने जुटे हुए हैं। इसी कडी मे साल 2016 के मई में इटावा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का 22 दिवसीय संघ शिक्षा वर्ग का आयोजन कराया गया जिसके जरिये 2017 के विधानसभा चुनावों में अहम भूमिका अदा करने का इरादा था जिसके तहत भाजपा के इटावा सदर और भरथना सुरक्षित सीटो पर कब्जा करके अपने पक्ष में माहौल भी बनाया।

आरएसएस के 95 वर्ष के इतिहास में पहली बार इटावा में संघ का कोई कार्यक्रम आयोजित हुआ। आरएसएस के पथसंचलन पर मुस्लिमों की ओर से बडे पैमाने पर पुष्पवर्षा करने के कारण इटावा का पथसंचलन देशभर मे सुर्खियों में आ गया था। यही कारण है कि समाजवादी गढ में भाजपा और उसके सहयोगी संगठन की ताकत लगातार बढती हुई दिखाई दे रही है।

इसके बाद विश्व हिंदू परिषद और उत्तर प्रदेश मे आदित्यनाथ योगी की अगुवाई मे भारतीय जनता पार्टी की सरकार के काबिज होने के बाद आरएसएस (राष्ट्रीय स्वंयसेवक संध) की हलचल में एकाएक बडा इजाफा हुआ।

भारतीय जनता पार्टी और उसके संगठनो की तैयारियों का बडा फायदा एक बार फिर से भारतीय जनता पार्टी को साल 2019 के संसदीय चुनाव मे तब मिला जब भारतीय जनता पार्टी ने इटावा संसदीय सीट पर एक बार फिर से कब्जा कर लिया।

2014 के संसदीय चुनाव में जहां अशोक दोहरे भाजपा से जीत पाए थे वही 2019 में आगरा से दो दफा सांसद रहे प्रो.रामशंकर कठेरिया को इटावा भारतीय जनता पार्टी को प्रत्याशी बना कर भेजा गया। इटावा के मूल निवासी प्रो.रामशंकर ने अपनी सूझबूझ से चुनाव लड कर कामयाबी हासिल कर ली। इस तरह से एक बार फिर से भाजपा संसदीय चुनाव मे सपा गढ में जीत का मजा चख चुकी है।

समाजवादी गढ़ में एबीवीपी का यह तीन दिन शिविर 2022 के विधानसभा चुनावों के मद्देनजर खास माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसे इटावा में हिंदुवादी संगठनों की दस्तक के रूप में देखा जा रहा है।

इससे पहले इटावा में 1996 मे विश्व हिंदू परिषद का ब्रज प्रांत का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया था तब राममंदिर आंदोलन प्रभावी भूमिका मे आ चुका था। कहा यह जा रहा है कि भारतीय जनता पार्टी अपने सहयोगी संगठनों के जरिये समाजवादी गढ मे अपनी जडे जमाने की कोशिश में प्रभावी तौर पर जुट गई है जब भी किसी भी सहयोगी संगठन का कोई आयोजन होता है उसके बाद भीतरी तौर पर बनने वाली रणनीति के क्रम मे सहयोगी संगठनों के नुमाइंदे जोरदारी से जनता के बीच अपनी जडे जमाने में जुट भाजपा का जनमत बढाने में जुट जाते हैं।