चाचा शिवपाल के तंज पर पहली बार अखिलेश ने दिया जवाब

इटावा। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के मौके पर प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष शिवपाल ने शुक्रवार को समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव का नाम लिए बगैर उनकी तुलना द्वापर युग में राक्षसराज कंस से की तो अखिलेश ने भी दुर्योधन का जिक्र कर चाचा शिवपाल पर निशाना साधा।

दरअसल, शिवपाल का जन्माष्टमी के मौके पर यदुवंशियों के नाम एक पत्र उनके लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय से जारी किया गया जिसमें उन्होंने अखिलेश का नाम लिए बगैर भगवान श्रीकृष्ण के मामा कंस का पिता के प्रति अत्याचार का जिक्र किया गया वहीं अखिलेश ने मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक सभा को संबोधित करते हुए दुर्याेधन का जिक्र कर परोक्ष रूप से शिवपाल पर निशाना साधा।

शिवपाल इससे पहले भी कई बार महाभारत और रामायण के किस्से बता कर अखिलेश पर निशाना साध चुके हैं लेकिन पहली दफा अखिलेश ने पलटवार करते हुये शिवपाल पर निशाना साधा है। अखिलेश की ओर से दुर्याेधन नाम का जिक्र करके रखी गई बात को शिवपाल के लिए जवाब माना जा रहा है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर प्रसपा अध्यक्ष ने यदुवशिंयो को जसवंतनगर विधायक के पैड पर बधाई संदेश जारी किया जिसमें उन्होने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में जब भी कोई कंस अपने (पूज्य) पिता को छल बल से अपमानित कर पद से हटाकर अनधिकृत आधिपत्य स्थापित करता है तो धर्म की रक्षा के लिए मां यशोदा के लाल ग्वालों के सखा योगेश्वर श्रीकृष्ण अवतार लेते हैं।

शिवपाल ने बधाई संदेश की शुरुआत में प्रिय ययाति सुत यदुवंशियों को संबोधित करते हुए पत्र लिखा। उन्होंने गीता में भगवान कृष्ण के संदेश- यदा यदा ही धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम। का उल्लेख करते हुए अत्याचारियों को दंड देकर धर्म की स्थापना किए जाने की बात कही है।

उन्होने कहा कि प्रसपा का उदय भी ईश्वर द्वारा रचित किसी विराट नियति और विधान का परिणाम है। धर्म की रक्षा में दायित्व निभाने की बात करते हुए समाज में शांति, समरसता, एकता और लोक कल्याण के लिए सभी से अपील की। शिवपाल ने ग्वाल कुमारों और यदुवंश के पालनहारों को लिखी 8 लाइन की छोटी सी कविता भी साझा की, जिसकी अंतिम पंक्तियां हैं- मैं चला धर्म ध्वज लिए हुए, अपना कर्तव्य निभाने को, आह्वान तुम्हारा यादव वीरों, देर न करना आने को।

शिवपाल का तंज चर्चा के केंद्र मे बना हुआ था कि सपा प्रमुख अखिलेश ने ग्वालियर मे एक सभा को संबोधित करते हुये कहा कि आप सब लोग जानते हैं कि दुर्योधन ने क्या था, पूरी सेना मांग ली, लेकिन जीत उसी की हुई जहां पर भगवान श्रीकृष्ण जी साथ खडे थे।

राजनीतिक पंडित ऐसा मान करके चल रहे है कि महाभारत के पात्रो का जिक्र कर कोई पहली दफा जुबानी जंग शुरू नहीं हुई है। पहले किसी की ओर से बयान आया उसके बाद दूसरी ओर से जबाब स्वरूप उसी भाषा का इस्तेमाल किया गया है। जब शिवपाल ने कंस का इस्तेमाल किया तो अखिलेश ने दुर्याधन का प्रयोग करने में कोई गुरेज नही की।

चाचा शिवपाल ने इशारों में कंस से कर दी अखिलेश की तुलना