शराब पीने से हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने अल्कोहल नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बल देते हुए कहा है कि शराब पीने से हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत हो रही है और संबंधित कंपनियां युवाओं तथा नशे के आदी लोगों को निशाना बना रही हैं।

शराब की बाजार तकनीकों पर जारी एक नयी रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि दुनिया भर में, हर साल 30 लाख लोग शराब के हानिकारक उपयोग के परिणामस्वरूप मर जाते हैं। हर 10 सेकंड में एक व्यक्ति की मौत शराब का सेवन करने से हो रही है। दुनिया भर में हर साल कुल मौतों में से पांच प्रतिशत मौत अल्कोहल का सेवन करने से होती

हैं। रिपोर्ट के अनुसार अल्कोहल से संबंधित मौतों में युवाओं का अनुपात 13.5 प्रतिशत है। इनकी आयु 20-39 वर्ष के बीच है। ये मौतें कैंसर, लीवर तथा अन्य शारीरिक जटिलताओं और सड़क दुघर्टना से होती हैं।

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि अल्कोहल की ऑनलाइन मार्केटिंग तकनीकों के प्रभावी विनियमन की आवश्यकता है। शराब की ऑनलाइन मार्केटिंग युवा लोगों और अधिक शराब पीने वालों को लक्षित करती है, जो अक्सर उनके स्वास्थ्य की हानिकारक होता है।

अल्कोहल के सेवन के नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर बल देते हुए डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि शराब की डिजिटल मार्केटिंग सीमा पार से होती है। इसमें लक्षित देश की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक परिस्थितियों का ध्यान नहीं रखा जाता है। जिससे इसके प्रभाव अनुमान से परे होते हैं।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस घेब्रेयसस ने कहा कि शराब युवाओं, उनके परिवारों और समाज, उनके जीवन और क्षमता खत्म करती है।” उन्होंने कहा कि शराब नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था बेहद कमजोर है। अल्कोहल मार्केटिंग का बेहतर, अच्छी तरह से लागू और अधिक सुसंगत विनियमन दुनिया भर में युवा जीवन को बचाएगा और सुधारेगा।

रिपोर्ट के अनुसार अल्कोहल के लिए सोशल मीडिया पर लक्षित विज्ञापन विशेष रूप से प्रभावी है। वर्ष 2019 में अमेरिका में प्रमुख अल्कोहल कंपनियों के मीडिया खर्च का 70 प्रतिशत से अधिक प्रचार, उत्पाद प्रदर्शन और सोशल मीडिया में ऑनलाइन विज्ञापनों पर था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन में अल्कोहल, ड्रग्स और एडिक्टिव बिहेवियर इकाई के डैग रेकवे ने कहा कि डिजिटल मीडिया के बढ़ते महत्व का मतलब है कि शराब की मार्केटिंग तेजी से सीमा पार हो गई है। यह उन देशों के लिए और अधिक कठिन है जो शराब विपणन को अपने अधिकार क्षेत्र में प्रभावी ढंग से नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस क्षेत्र में देशों के बीच अधिक सहयोग की जरूरत है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक, क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख खेल आयोजनों में अंतरराष्ट्रीय अल्कोहल कंपनियों द्वारा उपयोग की जाने वाली एक अन्य महत्वपूर्ण रणनीति है। इस तरह के आयोजन नए दर्शकों के लिए अपने ब्रांड के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं। इसके अलावा, अल्कोहल उत्पादक दुनिया के विभिन्न हिस्सों में दर्शकों और संभावित उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए स्पोर्ट्स लीग और क्लबों के साथ साझेदारी करते हैं।

फिल्मों और धारावाहिकों में उत्पाद प्रदर्शन के लिए कई अंतरराष्ट्रीय चैनलों पर तालमेल किए जाते हैं। वर्ष 1996 और 2015 के बीच बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली 100 अमेरिकी फिल्मों के विश्लेषण के अनुसार, उनमें से लगभग आधे में ब्रांडेड शराब दिखाई गई थी।शराब विनियमन की कमी बच्चों और किशोरों, महिलाओं और भारी शराब पीने वालों के लिए विशेष रूप से प्रभावित करती है।

अध्ययनों से पता चला है कि कम उम्र में शराब पीना शुरू करना युवा वयस्कता और उसके बाद खतरनाक शराब पीने का एक पूर्वसूचक है। इसके अलावा, किशोरों को शराब के सेवन से नुकसान होने की अधिक संभावना होती है। दुनिया के युवा और बढ़ती आबादी वाले क्षेत्रों, जैसे कि अफ्रीका और लैटिन अमरीका को विशेष रूप से लक्षित किया जा रहा है।

शराब उत्पादन और बिक्री के लिए महिलाओं में शराब की खपत एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। दुनिया में शराब का तीन चौथाई हिस्सा पुरुषों सेवन करते हैं। शराब कंपनियां महिलाओं की शराब पीने की दर को अपने बाजार को विकसित करने के अवसर के रूप में देखती हैं। अक्सर महिलाओं द्वारा शराब पीने को सशक्तीकरण और समानता के प्रतीक के रूप में दर्शाया जाता है।

वे स्तन कैंसर और घरेलू हिंसा जैसे विषयों पर कॉर्पोरेट सामाजिक जिम्मेदारी पहल का आयोजन करती हैं और शराब के ब्रांडों को बढ़ावा देने के लिए खेल या कला जैसे क्षेत्रों में अपनी सफलता के लिए जानी जाने वाली महिलाओं के साथ जुड़ती हैं। डब्ल्यूएचओ 2018 के एक अध्ययन में, यह पाया गया कि, अधिकांश देशों में पारंपरिक मीडिया में शराब के विज्ञापन के लिए कई प्रकार के नियम हैं जबकि लगभग आधे में इंटरनेट और सोशल मीडिया इसके लिए कोई विनियमन नहीं है।

रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि सरकारों को सार्वजनिक स्वास्थ्य रणनीतियों में इसके सीमा पार पहलुओं सहित शराब के विपणन के व्यापक प्रतिबंधों या प्रतिबंधों को एकीकृत करने की आवश्यकता है और इस क्षेत्र में देशों के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत है।