कला साधकों की आजीविका की सुरक्षा के लिए आगे आए सरकार : संस्कार भारती

जोधपुर/नई दिल्ली। कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था संस्कार भारती ने कोरोना महामारी के कारण कला साधकों के समक्ष जीवन यापन एवं जीवन रक्षा की गंभीर स्थिति को देखते हुए सरकार से मांग की कि है कि वह कार्यक्रमों के आयोजन, विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियां, फैलोशिप, सम्मान, आकाशवाणी के कार्यक्रम, मंदिरों में होने वाले कार्यक्रम तथा कला साधकों की पेंशन इत्यादि को तुरंत शुरू कराए।

संस्कार भारती की अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी की विगत 15 एवं 16 अप्रैल को राजस्थान के जोधपुर में आयोजित एक बैठक में यह मांग की गई। प्रबंधकारिणी की आठ सत्रों में चली दो दिवसीय बैठक में संस्कार भारती के विभिन्न प्रांतों से पदाधिकारियों ने भाग लिया जिसमें कला एवं कला क्षेत्र से संबंधित विभिन्न विषयों पर गहन चिंतन मनन किया गया।

संगठन की आज यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया कि मूलतः कोरोना महामारी से उत्पन्न परिस्थितियों द्वारा देश भर में कलाओं की प्रत्यक्ष प्रस्तुति पर पाबंदियां अभी भी जारी है जिससे कला साधकों के समक्ष जीवन यापन एवं जीवन रक्षा की गंभीर स्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रबंधकारिणी ने प्रस्ताव पारित करते हुए केंद्र सरकार, राज्य सरकारों, कला संस्थाओं एवं समस्त समाज से आह्वान किया है कि कला जगत के उन्नयन के लिए प्रत्यक्ष कार्यक्रम आयोजन तुरंत प्रारंभ करें।

साथ ही रुकी हुई विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्तियां, फैलोशिप, सम्मान, आकाशवाणी के कार्यक्रम, मंदिरों में होने वाले कार्यक्रम तथा कला साधकों की पेंशन इत्यादि शीघ्र प्रारंभ होनी चाहिए। प्रबंधकारिणी ने अपने सभी कार्यकर्ताओं से आह्वान किया है कि कोरोना काल में रुका नियमित कार्यक्रम का क्रम तथा अमृत महोत्सव के विशेष आयोजन शीघ्रता से प्रारंभ हो।

उल्लेखनीय है अखिल भारतीय प्रबंधकारिणी की बैठक में पारित हुए प्रस्ताव के अंतर्गत स्वाधीनता का अमृत महोत्सव के निमित्त देश भर में 75 विस्मृत नायकों के जीवन प्रसंगों पर 75 नाटकों के मंचन का संकल्प लिया गया। इनमें से अब तक 11 भाषाओं के 51 नाटक तैयार हो चुके हैं और उनमें से 17 नाटकों का तो मंचन भी हो चुका है।

चित्रकला विधा के माध्यम से देश भर में अपरिचित नायकों की चित्र प्रदर्शनी का आयोजन हो रहा है। साथ ही आगामी 13 से 14 मई 2022 को। मुंबई विश्वविद्यालय के साथ मिलकर “सिने-टॉकीज़” सेमिनार का आयोजन किया जाएगा, जिसमें भारतीय सिनेमा का स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान विषय पर विस्तृत विचार विमर्श किया जाएगा। सेमिनार का उद्घाटन संभवत: केंद्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री जी किशन रेड्डी करेंगे। देश भर की सिनेजगत की मुख्य हस्तियों इस आयोजन में सम्मिलित होंगी।

बैठक में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के आग्रह पर पंडित ओमकारनाथ ठाकुर द्वारा आकाशवाणी पर 15 अगस्त 1947 को प्रातः 6:30 पर बजे वंदे मातरम का गायन प्रस्तुत किया गया।