सरूपगंज प्रकरणः नियमानुसार निरस्त हो जाना चाहिए आदर्श शिक्षा समिति का आवंटन!

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सबगुरु न्यूज-सिरोही। जिला प्रशासन द्वारा सरकार को प्रतिवर्ष सरकार द्वारा व्यावसायिक उपयोग के लिए आवंटित की जाने वाली जमीनों के स्टेट्स की रिपोर्ट जाती है। इसमें बताया जाता है कि आवंटी ने भूमि पर नियत समय में उपयोग करके आवंटन की शर्तों की पालना करते हुए लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया है या नहीं। आदर्श शिक्षा समिति के सरूपगंज के प्रकरण में समिति ने आवंटन शर्त के अनुसार तय समय सीमा में इस भूमि का उपयोग नहीं किया। ऐसे में इसका आवंटन 175 आरटी एक्ट के तहत वैसे ही रद्द हो जाना चाहिए था।

सरकारें किसी भी निजी संस्थान को सामाजिक सरोकारों के तहत भूमि आवंटित करती है। आवंटित भूमि पर शिक्षा के क्षेत्र में या रोजगार उपलब्ध करवाने या अन्य समाजोत्थान के काम के लिए उपयोग करने के लिए नियत समय दिया जाता है। इसी के अनुसार सरकारें संबधित क्षेत्र की रोजगार और अन्य सुविधाओं की योजनाएं बनाती हैं।

आदर्श शिक्षा समिति को यह भूमि 2004 में इस शर्त के अनुसार आवंटित और कब्जा सुपुर्दगी की गई थी कि समिति दो वर्ष के अंदर ही इस भूमि पर भवन निर्माण करके शिक्षकों के रूप में रोजगार दिलवाएगी और बच्चों को बेहतर समाज बनाने के लिए शिक्षा देगी। समिति ने 2018 तक इस भूमि पर एक ईंट तक नहीं रखी।

ऐसे में 175 आरटीएक्ट के तहत आदर्श शिक्षा समिति का आवंटन स्वतः ही रद्द हो जाता है। इसी वर्ष पूर्व जिला कलक्टर संदेश नायक ने तो सख्ती से इस नियम की पालना करते हुए बिना उपयोग की गई आवंटित सरकारी भूमियों को सरकार के कब्जे में लिया था।

प्रतिवर्ष जिला कलक्टरों पास जाने वाली आवंटित सरकारी भूमियों पर नियमानुसार उपयोग नहीं होने की सूचि में आदर्श शिक्षा समिति की इस जमीन का भी नाम जरूर होना चाहिए। यदि यह नाम नहीं है तो संबंधित तहसीलदारो पर इसके लिए कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता है।

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-समिति का पत्र बताता है कि न कब्जा था न निर्माण था
आदर्श शिक्षा समिति के सचिव ने सिरोही जिला कलक्टर को 12 फरवरी 2016 को एक पत्र लिखा था। इस पत्र में लिखा था कि आदर्श शिक्षा समिति सिरोही के आदर्श विद्या मंदिर सरूपगंज के लिए भूमि आवंटित की गई थी। इस भूमि पर किसी व्यक्ति का कब्जा है। इसे खाली करवाने का अनुरोध किया था।

इतना ही नहीं इसमें नोट भी डाला गया है कि इस संबंध में प्रशासन को बार बार अवगत करवाया गया है, इसके बावजूद भी इसे गंभीरता से नहीं लिया गया है। यह पत्र ही इस बात को सिद्ध कर रहा है कि आदर्श शिक्षा समिति का बेवा देवीबाई की कब्जाशुदा भूमि पर कब्जा नहीं था। इसके अलावा इस भूमि पर 2015 का आरएए कोर्ट का स्टे भी है।

अधिवक्ता कानून के जानकारों के अनुसार ऐसे में स्टे वेकेट होने और कब्जा होने की सूरत में आदर्श शिक्षा समिति को इस भूमि पर उपखण्ड मजिस्ट्रेट के माध्यम से कब्जा लिए जाने की प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। इसके विपरीत बेवा ने आरोप लगाया है कि उनकी कब्जेशुदा भूमि पर आदर्श शिक्षा समिति के लोगों ने शनिवार को जबरन घुसकर कब्जा करने का प्रयास किया है।

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-सरूपगंज थानाधिकारी के खिलाफ कलक्टर को शिकायत
इस मामले में सरूपगंज थानाधिकारी और तहसीलदार की भूमिका सबसे संदिग्ध रही है। बेवा देवीबाई ने मंगलवार को जिला कलक्टर के समक्ष उपस्थित होकर उनके कब्जाशुदा भूमि पर सरूपगंज थानाधिकारी के कथित मेल-मिलाप से भूमि को जबरन हडपने के संबंध में शिकायत की है। इसमें सरूपगंज थानाधिकारी द्वारा उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करने और उनके परिवार के लोगों को गिरफ्तार करने का आरोप लगाते हुए संपूर्ण प्रकरण की जांच की मांग की है।

इधर, पीडिता देवीबाई की रिपोर्ट लिखने के लिए उनके साथ सरूपगंज थाने पहुंचे भाजपा के पदाधिकारी देव नामदेव, कांग्रेस पदाधिकारी व सबंधित वार्ड के पंच आजाद मेघवाल और बेवा के पुत्र कमलेश को रविवार रात को शांतिभंग में गिरफ्तार करने के बाद उपखण्ड मजिस्ट्रेट परबतसिंह चुंडावत के समक्ष पेश किया गया। जहां से तीनों को जमानत पर छोड दिया गया।
-इनका कहना है….
प्रतिवर्ष उपखण्ड क्षेत्र में सरकार द्वारा आवंटित भूमियों की स्टेटस रिपोर्ट जिला कलक्टर को जाती है। इस भूमि पर आवंटन के बाद यदि शर्तों के अनुसार कार्य नहीं किया हुआ होगा तो उस रिपोर्ट में इनका नाम भी जरूर होगा। पीडित उनके समक्ष संपूर्ण दस्तावेज लेकर उपस्थित होते हैं, तो वह इस प्रकरण में कानूनसम्मत कार्रवाई करेंगे।
परबतसिंह चुडावत
उपखण्ड अधिकारी, पिण्डवाड़ा।