अमर जवान ज्योति का नए राष्ट्रीय समर स्मारक की लौ में विलय

नई दिल्ली। इंडिया गेट पर अमर जवान ज्योति की लौ का वहीं नए निर्मित राष्ट्रीय समर स्मारक की लौ में आज अपराह्न एक भव्य सैन्य समारोह में विलय किया गया। समारोह की अध्यक्षता एयर मार्शल बलभद्र राधाकृष्ण ने की।

शहीद सैनिकों के सम्मान में प्रज्ज्वलित इस लौ के विलय को लेकर राजनीतिक विरोध भी हुआ। कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने इसके खिलाफ ट्वीट कर इस कदम का विरोध किया।

समारोहर की शुरुआत इंडिया गेट पर अखंड रूप से प्रज्ज्वलित ज्योति से शुरू हुई। वहां एक सैनिक ने अमर जवान ज्योति की लौ से दूसरे सैनिक के हाथ में मशाल प्रज्ज्वलित की और उसे निक परेड के साथ राष्ट्रीय समर स्मारक पर बने अमर जवान स्तम्भ की लौ तक ले जाया गया।

देश के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीर सैनिकों के सम्मान में राष्ट्रीय समर स्मारक के अमर जवान स्तंभ पर एयर मार्शल बालभद्र राधाकृष्ण ने पुष्पचक्र समर्पित किया और अमर जवान ज्योति से लाई गई लौ को समर स्मारक की लौ में समाहित किया गया।

थल सेना, नौ सेना और वायु सेना के सैनिकों की टोलियों ने राष्ट्रीय समर स्मारक पर लौ को बिगुल के साथ सलामी दी। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय समर स्मारक पर करीब 26,000 शहीद सैनिकों के नाम अंकित हैं। इस बीच, युवा कांग्रेस ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर अमर जवान ज्योति की लौ को समाहित करने पर विरोध जताया।

अमर जवान ज्योति के संबंध में कांग्रेस की आपत्ति पर शुक्रवार को केन्द्र सरकार ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि जवानों को समर्पित इस अखंड ज्योति को बुझाया नहीं जा रहा है बल्कि इसे राष्ट्रीय युद्ध स्मारक में ज्योति में समाहित किया जाएगा।

इससे पहले कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट किया कि अत्यंत दु:ख का विषय है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी वह आज बुझ जाएगी। कुछ लोग देशभक्ति और बलिदान को नहीं समझ सकते – कोई बात नहीं… हम अपने जवानों के लिए एक बार फिर अमर जवान ज्योति जलाएंगे।

पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं भारतीय जनता पार्टी के नेता राज्यवर्द्धन राठौर ने गांधी पर देश विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाते हुए उनसे ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’ एक बार जरूर जाने और देश के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का अनुरोध किया।

राठौर ने गांधी के उस बयान पर पलटवार करते हुए एक ट्वीट में इसका जवाब दिया। उन्होंने कहा कि देश विरोधी मानसिकता रखने वाले राहुल गांधी जी से अनुरोध करता हूं कि वह ‘नेशनल वॉर मेमोरियल’ एक बार जरूर जाएं और देश के बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करें।

आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि इंडिया गेट पर अंकित नाम केवल कुछ शहीदों के हैं जिन्होंने प्रथम विश्व युद्ध और एंग्लो-अफगान युद्ध में अंग्रेजों के लिए लड़ाई लड़ी थी और इस प्रकार यह हमारे औपनिवेशिक अतीत का प्रतीक है। वर्ष 1971 के युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए लौ जलते देखना एक अजीब बात थी, लेकिन इंडिया गेट पर उनके किसी भी नाम का उल्लेख नहीं था।

उल्लेखनीय है कि अमर जवान ज्योति को पाकिस्तान के खिलाफ 1971 के युद्ध में शहीद होने वाले 3,843 भारतीय जवानों की याद में पहली बार 1972 में प्रज्वलित किया गया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 फरवरी 1972 को इसका उद्घाटन किया था। राष्ट्रीय समर स्मारक इंडिया गेट के दूसरी तरफ सिर्फ 400 मीटर की दूरी पर स्थित है।

उल्लेखनीय है कि इंडिया गेट का निर्माण ब्रिटिश हुकूमत ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान शहीद हुए सैनिकों की याद में 1931 में किया था। वहीं नेशनल वॉर मेमोरियल का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 1919 में किया था।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रमुख रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के रणबांकुरों और देश की सुरक्षा में शहीद हुए लाखों सूरमाओं के बीच कोई विवाद या प्रतिस्पर्धा हो ही नहीं सकती। ये बहस उत्पन्न करना ही व्यर्थ एवं दुर्भाग्यपूर्ण है, क्योंकि सभी का योगदान माँ भारती के लिए अमूल्य व अमिट है।

भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास बीवी ने कहा कि यह बहुत दुख की बात है कि हमारे वीर जवानों के लिए जो अमर ज्योति जलती थी, उसके लिए सरकार यह तर्क दे रही है कि बजट की कमी चलते यह निर्णय लिया गया है।