नए सौर वर्ष का आगाज़ करने लगी बंसत ऋतु

13 अप्रेल 2020 को सूर्य का मेष राशि में प्रवेश
सबगुरु न्यूज। नए सौर वर्ष के साथ ही बंसत ऋतु का स्थान ग्रीष्म ऋतु लेगी और ऋतु परिवर्तन के साथ सर्दी की ऋतु में उत्पन्न मौसमी बीमारियों का शनैः शनैः अंत होने लगेगा तथा ऋतु परिवर्तन के नई मौसमी बीमारियां दस्तक देने लग जाएंगी। ऋतु परिवर्तन के कारण केवल सूर्य के कारण तापमान ही नहीं बढता वरन वायु मंडल भी गर्म होने तथा उष्ण हवाओं के वेग से कई कीटाणुओं और विषाणुओं को समाप्त करने का स्वत: ही उर्जा चक्र तैयार हो जाता है। ऋतु परिवर्तन केवल सूर्य का अपनी धूरी पर परिक्रमा करने तथा अपनी स्थिति में बदलावों के कारण होता है। अर्थात पृथ्वी के परिक्रमा करने की वार्षिक गति ही ऋतु परिवर्तन करती है भले ही सूर्य का किसी स्थान पर ज्यादा गर्म तापमान सदा ही क्यो ना हो। वह हर ऋतु का प्रभाव ऋतु परिवर्तन पर ही देता है और तब मौसमी बीमारियों को खत्म करनें में सक्षम होगा।

प्रकृति अपने न्याय सिद्धांतों पर ही कार्य करती है और वही प्रकृति का धर्म है। पृथ्वी पर सीधे तौर पर प्रत्यक्ष रूप से सूर्य चन्द्र के प्रभाव दिखाईं देते हैं तथा अप्रत्यक्ष रूप से अनगिनत आकाशीय ग्रह नक्षत्रों और पिंडो के प्रभाव पडते हैं। सूर्य, चन्द्र और पृथ्वी की दैनिक गति स्थिति प्रकृति के कई रहस्यों का प्रकट करती है, हर बार मानव को नए अनुभव दे जाती है तथा हमेशा पड़ने वाले प्रभावों की भी पुनरावृत्ति करती रहती है लेकिन हर बार नए परिवर्तन को साथ लाती है।

मानव ने सूर्य व चन्द्रमा के पृथ्वी पर पडने वाले प्रभावों को देखकर, वर्षों तक अनुभव तथा सीख कर सभ्यता और संस्कृति का निर्माण किया।

सूर्य एक तारा है जो स्थिर होते हुए भी अपनी धुरी पर चारों ओर परिक्रमा करता है और एक परिक्रमा में उसे तीन सो साठ दिन लग जाते हैं। इस पूरी परिक्रमा में सूर्य को आकाश में फैले हुए बारह तरह के तारामंडल के सामने से गुजरना पड़ता है। इन्हीं तारा मंडल को हम राशि के नाम से जानते है। सूर्य की यात्रा का प्रारंभ मेष राशि से शुरू होता है और मीन राशि में यात्रा पूरी हो जाती है। बिनां रुके सूर्य अपनी यात्रा को लगातार करता रहता है।

सूर्य की यात्रा जब मेष राशि से शुरू होती तब बंसत ऋतु रहती है। हर दो तारामंडल की राशियों पर सूर्य का भ्रमण ऋतु परिवर्तन करता है और उसके प्रभाव सीधे पृथ्वी पर पडते हैं। ऋतु के अनुसार बंसत ॠतु मीन व मेष के सूर्य पर। ग्रीष्म ऋतु वृष व मिथुन के सूर्य पर। वर्षा ऋतु कर्क सिंह के सूर्य पर। शरद ऋतु कन्या तुला के सूर्य पर। हेमंत ऋतु वृश्चिक, धनु के सूर्य पर तथा शिशिर ऋतु मकर कुंभ राशि के सूर्य पर।

संत जन कहते हैं कि हे मानव, वर्तमान में विश्व कोरोना महामारी के संकट से परेशान हैं तथा इस महामारी ने अपने संक्रमण से विश्व के लाखों लोगों को प्रभावित कर दिया तथा लाखों को मृत्यु के मुख में डाल दिया है, विश्व में अभी तक इस मर्ज की दवा नहीं बनी है। केवल इसके संक्रमण से बचाव के लिए देश में भी लॉकडाऊन चल रहा है ताकि इस विश्व स्तर पर फैली महामारी से बचा जा सके और पीड़ितों का सावधानी से विज्ञान इलाज कर प्राणों की रक्षा करने के लिए जी जान से जुटा है।

नया सौर वर्ष और मेष का सूर्य ऋतु परिवर्तन के कारण आधे माह तक अपने को मजबूत बनाएगा तथा एक माह में अर्थात 14 मई तक वायुमंडल को अपनी उर्जा से बदल कर विज्ञान के सहायक के रूप में कार्य करेगा। विज्ञान इस कोरोना वायरस के संक्रमण पर नियंत्रण रखने में सफल होगा। इसी बीच सूर्य की ऊर्जा कई स्थानों को मानवीय प्रयासों से रोग मुक्त बना कर आर्थिक गतिविधियों को शुरू करवाने में सफल हो जाएगी।

इसलिए हे मानव तू अभी धैर्य रख और विज्ञान के परामर्श के अनुसार ही काम कर क्योंकि यह कोरोना वायरस अभी बेतरकीब ढंग से सर्वत्र फैला हुआ है और सामाजिक निकटता बढाते ही रोग ग्रस्त करने में देर नहीं लगाता। इसलिए हें मानव तू घर में ही बैठ और हर तरह से सावधान रह। डर मत और अपने दिमाग को यहां से हटा कर घर में ही रचनात्मक कार्य में लगा दे।

सौजन्य : ज्योतिषाचार्य भंवरलाल, जोगणियाधाम पुष्कर