सिरोही के एक और प्रभारी मंत्री की काम से पहले माउंट आबू तफरीह

माउंट आबू के मिनिस्टर कॉटेज पहुंचे प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। जिले को एक और प्रभारी मंत्री ऐसे मिल गए हैं जो मुख्यमंत्री द्वारा सौंपे गए काम से पहले माउंट आबू में तफरीह को ज्यादा तरजीह देते दिख रहे हैं। जिले के ये दूसरे प्रभारी मंत्री हैं जो ऐसा करते दिख रहे हैं।

ऐसे ही एक प्रभारी मंत्री अशोक गहलोत से पहले वसुंधरा राजे ने दिए थे। महेंद्र चौधरी से पहले जिले के प्रभारी मंत्री रहते हुए राजेन्द्र राठौड़ को माउन्ट आबू में तफरीह का जबरदस्त शौक था। उनका ये शौक इतना गजब था कि वो जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठकें भी सिरोही जिले मुख्यालय की जगह माउंट आबू और आबूरोड में लेकर पूरे जिले के अधिकारियों को वहां बुलाकर दफ्तर खाली करवा देते थे। ये बात अलग है कि चौधरी फिलहाल ऐसा करते नहीं दिखे।
-मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को दिए थे बैठक के निर्देश
प्रदेश में गौवंश में लंपि वायरस का प्रकोप फैल रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इसे ही देखते हुए सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने जिलों में जाकर स्थिति जानने और लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए थे। 5 अगस्त को रात करीब 10 बजे मुख्यमंत्री ने इस सम्बंध में ट्वीट भी कर दिया था। जिले के प्रभारी मंत्री महेंद्र चौधरी 6 अगस्त को रात में जिले में पहुंच गए। लेकिन, उन्होंने जिले में लंपि रोग को लेकर बैठक लेने की बजाय माउंट आबू में तफरीह करना ज्यादा जरूरी समझा।

अब वो बैठक सोमवार को पावापुरी में लेंगे। तो जन चकल्लस में सवाल ये उठ रहा है कि बीमारी से मरती गायों की समस्या प्राथमिक है या प्रभारी मंत्री की माउंट आबू प्रवास में फुर्सत के रात दिन निकालना। ये माउंट प्रवास वो सिरोही में बैठक लेने के बाद भी कर सकते थे। राजस्व मंत्री, पशुपालन मंत्री और खाद्य और नागरिक आपूर्ति मंत्री अपने अपने क्षेत्रों में बैठकें ले भी चुके हैं। इनकी तस्वीरें राजस्थान सरकार के डीआईपीआर के सुजस पोर्टल पर जारी भी हो चुकी हैं।
-मुख्यमंत्री के आदेश ताक पर
सिरोही समेत प्रदेश के कई प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के आदेश ताक पर रखे हुए हैं। मुख्यमंत्री गहलोत ने सभी प्रभारी मंत्रियों और प्रभारी सचिवों को प्रत्येक 15 दिनों में अपने प्रभार वाले जिलों में दौरा करके फीडबैक लेने के निर्देश दिए हुए हैं। कई जिलों के प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिव ऐसा नहीं करते। परिणामस्वरूप गहलोत सरकार गवर्नेन्स के मामले में फेल होती जा रही है और लोगों में गहलोत सरकार की तमाम स्कीमों के बावजूद गवर्नेन्स नदारद होने से असंतोष स्पष्ट नजर आता है।

चिकित्सा मंत्री परसादीलाल मीणा के सिरोही में दौरे के दौरान प्रेस वार्ता में ये सवाल भी पूछा गया था कि प्रभारी मंत्री और प्रभारी सचिवों के इस तरह से मुख्यमंत्री के आदेशों को दरकिनार करना कहीं सरकार की कमजोरी तो नहीं है। इस पर मीना ने कहा था कि बीच में राज्यसभा और राष्ट्रपति चुनावों के कारण प्रभारी।मंत्री जा नहीं पा रहे थे आगे से ये नियमित जाएंगे और अगर नहीं जाएंगे तो मुख्यमंत्री  करवाई करेंगे।