माउंट आबू: CM गहलोत के अधिकारी गुजरात पंहुचा रहे हैं कांग्रेस का कुशासन सन्देश, धरने और अनशन जारी

माउंट आबू में आम आदमी को न्याय के समर्थन और खास लोगों को नवाजने के विरोध में अनशन पर बैठे होटल व्यवसाई विजय लालवानी।
माउंट आबू में आम आदमी को न्याय के समर्थन और खास लोगों को नवाजने के विरोध में अनशन पर बैठे होटल व्यवसाई विजय लालवानी।

सिरोही। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशा के विपरीत काम करके गहलोत के अधिकारियो ने राजस्थान के साथ गुजरात की जनता को भी कमजोर सरकार का सन्देश देना शुरू कर दिया है। उनकी कार्यप्रणाली स्पष्ट जता रही है कि सिर्फ कांग्रेस के कुछ आला नेताओं को खुश करके अधिकारी राज्य के आम लोगो पर कुशासन का चाबुक चलाने के लाइसेंस अशोक गहलोत सरकार से ले चुके हैं। इसका सन्देश अब स्वायत्त शासन के जयपुर से माउंट आबू तक के अधिकारी देने लगे हैं।

अशोक गहलोत गुजरात चुनाव से पहले गुजरात में कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक बनाए गए हैं। लेकिन, माउंट आबू में गहलोत सरकार के अधिकारी जिस तरह से कांग्रेस के चुनिंदा नेताओं के व्यसायिक लाभ के लिए स्थानीय लोगों के लिए नियमों की गलत व्याख्या करके उन्हें 34 साल बाद भी प्रताड़ित कर रहे हैं, उससे माउंट आबू में एक के बाद अनशनों औऱ धरनो का दौर शुरू हो गया है।

एक सप्ताह के भीतर माउंट आबू में तीसरा अनशन शुरू हो गया है। माउंट में सबसे ज्यादा गुजरात के पर्यटक आते हैं और उनके माध्यम से गहलोत सरकार के अधिकारियों का जन उत्पीड़न का सन्देश गुजरात लेकर जा रहे हैं।

माउंट आबू में दोहरे मापदण्ड अपनाकर गहलोत शासन के अधिकारियों द्वारा फैलाये कुशासन को लेकर लगाया गया अनशन स्थल पर लगाया बैनर।
माउंट आबू में दोहरे मापदण्ड अपनाकर गहलोत शासन के अधिकारियों द्वारा फैलाये कुशासन को लेकर लगाया गया अनशन स्थल पर लगाया बैनर।

एक सप्ताह में तीसरा धरना

माउंट आबू में 34 सालों से मकानों के निर्माण, पुनर्निर्माण, मरम्मत आदि की अनुमति नहीं मिल रही है। लेकिन, कथित रूप से सरकार के बड़े नेता के करीब माने जाने वाले नेता के पुत्र की होटल उपखण्ड अधिकारियों और आयुक्तों ने पुनर्निर्माण करवा दी। जबकि आम आदमी को एनजीटी और हाइकोर्ट के नाम पर माउंट आबू उपखण्ड अधिकारी और नगर पालिका आयुक्त अटकाए हुए हैं। आम आदमी को अनुमति नहीं देने को लेकर शैतानसिंह आदि ने सिरोही में सांकेतिक धरना हुआ था।

इसी दौरान कांग्रेस नेता के द्वारा कथित रूप से सीवेज लाइन को कब्जा करके जमीन पर अतिक्रमण करने की पीड़ित बताकर महिला व्यवसाई मंजू गुरबानी ने अनशन किया था। इस दौरान पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया ने गहलोत सरकार को बेशर्म बताकर ट्वीट भी किया था, जिसे बाद में उन्होंने हटा दिया। चर्चा ये भी है कि विधायक द्वारा गहलोत सरकार विरोधी इस ट्वीट को हटवाने के पीछे जालोर-सिरोही क्षेत्र और माउंट आबू के स्थानीय उन्हीं की पार्टी के दो नेताओं की भूमिका है।

हाल में ही स्वयत्तशासन मंत्री के ही कथित करीब माने जा रहे एक और व्यक्ति की बिल्डिंग को नियमित करने के आदेश जारी करने के आरोप स्वायत्त शासन मंत्रालय और माउंट आबू नगर पालिका आयुक्त द्वारा करने के आरोप लगे हैं। जिस व्यक्ति को ये कथित अनुमति मिली है, पिछले शासन में उनके यहां स्वयत्तशासन मंत्री की आवाजाही भी रही थी।

राजनीतिक हलको में चर्चा ये भी है कि माउंट आबू के ही प्रकरण को उठाते हुए सिरोही विधायक संयम लोढ़ा द्वारा स्वयत्तशासन मंत्री पर ‘आपके प्रिय स्थान’ टिप्पणी करने के कारण सम्भवतः उनका इस कार्यकाल में यहां आना नहीं हुआ। इस अनुमति के प्रकरण को लेकर एक और होटल व्यवसाई विजय कुमार ने माउंट आबू के सामूहिक हितो की मांग को लेकर अनशन शुरू कर दिया है।

फेल हुए संघर्ष समिति के भाजपाई

माउंट आबू के लोगों को उनका जायज हक दिलवाने के लिए संघर्ष समिति बनाई गई थी। निःसन्देह इसने वसुंधरा राज में तो जोनल मास्टर प्लान के रूप में लोगों को उनका हक काफी हद तक दिलवा दिया। लेकिन, हाल में पुनर्गठन के बाद ये संघर्ष समिति एकदम नकारा साबित होती नजर आ रही है।

सूत्रों के मुताबिक इसकी बैठक में एक योजना के तहत ये कोशिश की गई कि इसे आम जनता की बजाय भाजपा के नेताओं की लीडरशिप रहे ताकि यदि निर्माण अनुमतियां मिलनी शुरू हो भी जाए तो श्रेय भाजपा के मिले कांग्रेस को नहीं। लेकिन ये भाजपा के नेता नगर पालिका माउंट आबू के जनप्रतिनिधि और संघर्ष समिति के पदाधिकारियों की दोहरी भूमिका में पूर्णतया विफल रहे। माउंट आबू के लोगों को राहत पहुंचाने के सारे अधिकार माउंट आबू नगर पालिका के पास आ चुके हैं ऐसे में भाजपा की चुप्पी शक के दायरे में है।

माउंट आबू भाजपा की चुप्पी का राज सांसद देवजी पटेल के हाल में वायरल हुए वीडियो में खुलता दिख रहा है। जिसमें ये सन्देश साफ है कि हम कांग्रेस और भाजपा नेताओं का काम माउंट आबू में हो रहा है, बाकी स्थानीय लोग अपना अपना देख लेवें। माउंट आबू नगर पालिका और संघर्ष समिति के भाजपा नेता सांसद के वायरल्ड वीडियो के सन्देश की रीति का अनुकरण करते ज्यादा नजर आ रहे हैं। इसलिए शायद अब संघर्ष समिति और भाजपा को दरकिनार कर धरनों के माध्यम से अलग अलग लोग अपने अपने स्तर पर धरना देने लगे हैं।

वैसे सोमवार को अनशन पर बैठे विजय कुमार द्वारा संघर्ष समिति ने अध्यक्ष को दिया गया ज्ञापन सोशल मीडिया पर वायरल होकर अध्यक्ष को ये सन्देश देता ज्यादा दिखाई दे रहा है कि ‘रहने दो भाई साहब, आपसे नहीं होगा हम आबुवासी खुद अपनी-अपनी देख लेंगे।’ क्योंकि संघर्ष समिति का अध्यक्ष न होते हुए भी विजय कुमार ने अनशन के माध्यम से व्यापक माउंट आबू की बात कही है, जिसकी जिम्मेदारी संघर्ष समिति अध्यक्ष को सौंपी गई थी।