अशोक गहलोत के सामने कड़ी टक्कर के आसार कम

Ashok Gehlot faces tough competitionAshok Gehlot faces tough competition
Ashok Gehlot faces tough competition

जोधपुर । राजस्थान विधानसभा चुनाव में राज्य के दो बार मुख्यमंत्री रह चुके अशोक गहलोत को उनकी परम्परागत सरदारपुरा सीट पर पटखनी देने के लिए सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने फिर शंभू सिंह खेतासर पर दांव खेला हैं लेकिन इस बार भी कड़ी टक्कर होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।

सरदारपुरा क्षेत्र से गहलोत का नाम आते ही माली बहुल क्षेत्र की जनता में एक खुशी की लहर दौड़ जाती हैं और उन्हें गहलोत के आगे कोई भी उम्मीदवार कमजोर नजर आने लगता हैं। इस बार भी उनके सामने भाजपा ने पिछले प्रत्याशी खेतासर को ही चुनाव मैदान में उतारा हैं जबकि खेतासर पिछले चुनाव में गहलोत के सामने 18478 तथा वर्ष 2008 में ओसियां विधानसभा क्षेत्र से महिपाल मदेरणा से चार हजार से अधिक मतों से चुनाव हार चुके हैं। वह पाली लोकसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

सरदारपुरा में माली समाज के साथ अल्पसंख्यक मतदाता भी काफी संख्या में होने के कारण गहलोत की स्थित काफी मजबूत मानी जा रही हैं। गहलोत ने सरदारपुरा से पहला चुनाव राज्य के पहली बार मुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 1999 में जीता था तब वहां वर्ष 1998 का चुनाव जीतने वाले कांग्रेस उम्मीदवार मान सिंह देवड़ा ने उनके लिए यह सीट खाली कर दी। इसके बाद गहलोत लगातार सरदारपुरा से चुनाव जीतते आ रहे हैं।

गहलोत को टक्कर देने के लिए भाजपा ने वर्ष 2003 में अर्थशास्त्री महेन्द्र झाबक को उनके सामने चुनाव मैदान में उतारा लेकिन झाबक 18991 मतों से चुनाव हार गए। इसी तरह वर्ष 2008 में भी गहलोत को मात देने के लिए माली समाज के प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक राजेन्द्र गहलोत को चुनाव मैदान में उतारा लेकिन यह चुनावी पैतरा भी सफल नहीं हुआ और राजेन्द्र गहलोत 15 हजार 340 मतों से चुनाव हार गए और अशोक गहलोत चुनाव जीतकर दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने। गहलोत सातवीं, दसवीं, ग्यारहवीं एवं बारहवीं लोकसभा के लिए भी चुने गये और केन्द्रीय मंत्री भी बनाये गये। वह राज्य में 1989 में अल्प अवधि के लिए गृह तथा जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी मंत्री भी रहे।

पिछली बार मोदी लहर में कांग्रेस की राज्य भर में केवल 21 सीटे ही जीत पाई लेकिन जोधपुर जिले की दस सीटों में सरदारपुरा से गहलोत ने अपनी परम्परागत सीट पर कब्जा बरकरार रख कर अपना राजनीतिक प्रभुत्व कायम रखा। इस बार भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तथा गहलोत का राजनीतिक दबदबे के आगे भाजपा प्रत्याशी खेतासर उन्हें कड़ी टक्कर दे पायेंगे यह फिलहाल चुनावी माहौल में नजर नहीं आ रहा। हालांकि इस बार बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के श्याम लाल एवं आम आदमी पार्टी (आप) के मुकेश जांगिड़ सहित कुल सत्रह उम्मीदवार चुनाव मैदान में अपना भाग्य आजमा रहे हैं जिनमें तीन महिला प्रत्याशी भी शामिल हैं।

जोधपुर की सरदारपुरा सीट पहले चुनाव से ही चर्चित रही हैं और वर्ष 1952 का पहला विधानसभा चुनाव पूर्व महाराजा हनवंत सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में जीता था और उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास को हराया था। श्री सिंह की चुनाव परिणाम आने से पहले ही एक हवाई दुर्घटना में मौत हो गई थी।

उनकी मौत के बाद हुए उपचुनाव में कम्युनिस्ट हरी किशन व्यास ने चुनाव जीता। इसके बाद 1957 एवं 1962 में आनंद सिंह कांग्रेस, 1967 में ओम दत्त जनसंघ, 1972 अमृत लाल गहलोत कांग्रेस, 1977 में माधोसिंह जनता पार्टी, 1980, 1985 एवं 1998 में मान सिंह देवड़ा कांग्रेस तथा 1990 में राजेन्द्र गहलोत ने भाजपा उम्मीदवार के रुप में चुनाव जीता। सरदारपुरा कांग्रेस का गढ़ माना जाता है और उसने यहां से नौ बार चुनाव जीता हैं जबकि भाजपा ने दो बार तथा एक बार जनसंघ, जनता पार्टी, कम्युनिस्ट एवं निर्दलीय उम्मीदवार ने चुनाव जीता।