तालिबानी चक्रव्यूह में फंसती शेख हसीना

शेख हसीना ने अपने पिता शेख मुजीबुर्र रहमान के आत्माघाती नक्शेकदम पर चलना शुरू कर दिया था। शेख मुजुबर्र रहमान ने इसी तरह भारत को आंख दिखाना शुरू कर दिया था और भारत की सेना की उपस्थिति को अपनी संप्रभुत्ता में हस्तक्षेप मानना शुरू कर दिया था।

खासकर भारतीय गुप्तचर एजेंसी ‘रा‘ की सक्रिया शेख मीजुुुर्बर रहमान को अच्छी नहीं लगती थी। जबकि भारतीय गुप्तचर एजेंसी ‘रा‘ को यह मालूम था कि पाकिस्तान अपनी नापाक चालें चल रहा और पाकिस्तान परस्त ताकतें साजिशों में लगी हुई हैं।

भारत ने जब यह देखा कि शेख मुजीर्बुर रहमान खुद जब अपने उपर मंडरा रहे खतरों को लेकर उदासीन हैं और खुशफहमी से भरे हुए हैं तब उनकी पाकिस्तान और पाकिस्तान परस्त आतंरिक ताकतों के खिलाफ सक्रियता का कोई अर्थ नहीं रह जाता है।

‘रा‘ ने अपनी सक्रियता लगभग समाप्त कर दी थी। इसका दुष्परिणाम यह हुआ कि शेख मुजीर्बुर रहमान मारे गये और उनके परिवार का सफाया कर दिया गया। उनके परिवार में सिर्फ शेख हसीना ही बची थी जो बांग्लादेश से बाहर थी।

अगर शेख मुजीबुर्र रहमान भारत को आंख दिखाने की कोशिश नहीं करते, भारत के अहसान को बोझ नहीं समझते, भारत को बांग्लादेश के मामलों में सक्रिय रहने से अलग नहीं करते तो फिर उनकी सरकार का तत्खापलट होता नहीं और न ही उनकी हत्या होती, उनका परिवार भी सुरक्षित होता।

दुर्भाग्य से शेख हसीना अपने पिता मुजुर्बर रहमान का इतिहास दोहरा रही हैं। शेख हसीना का आंख दिखाना भारत के लोगों को कहीं से भी अच्छा नहीं लगा, अब तक उन्हें भारत का अच्छा मित्र माना जाता था, सांप्रदायिकता के खिलाफ लड़ने वाला शख्स माना जाता था, उन्हें धर्मनिरपेक्षता के प्रति समर्पित माना जाता था, उन्हें पाकिस्तान के दुश्चक्र न फंसने वाली शख्सियत माना जाता था।

लेकिन उन्होंने भारत को आंख दिखा कर अपनी विशेषताएं खुद ही ध्वस्त कर दी, भारतीय लोगों के विश्वास पर खुद बुलडोजर चला दिया। भारत के लोगों को ऐसी उम्मीद कभी नहीं थी। भारत सरकार ने शेख हसीना के इस आंख दिखाने वाली गुस्ताखी पर कोई प्रतिक्रिया नही जाहिर की है, प्रतिक्रिया न जाहिर कर भारत सरकार ने अच्छा ही किया है। पर भारत सरकार ने उनकी गुस्ताखी को जरूर संज्ञान में लिया है।

खासकर सोशल मीडिया में शेख हसीना की आंख दिखाने वाली गुस्ताखी को खूब संज्ञान में लिया गया, सोशल मीडिया में इसके खिलाफ खूब प्रतिक्रिय हुई, शेख हसीना को नसीहतें भी दी गयी और सावधान भी किया गया। अगर भारत और बांग्लादेश के संबंध बिगड़ते हैं तो फिर इसका नुकसान किसको होगा?

इसका सर्वाधिक नुकसान भारत को नहीं बल्कि बांग्लादेश को ही होगा और खासकर शेख हसीना को ही होगा। शेख हसीना यह सोच रही है कि भारत को आंख दिखा कर वह बहुत बड़ी जीत हासिल की हैं या फिर भारत को कड़ा संदेश दे दिया है तो यह उनकी बहुत बड़ी भूल होगी। बांग्लादेश में स्थितियां तेजी के साथ विकट हो रही हैं।

सांप्रदायिक शक्तियों का तालिबानीकरण हो रहा है। तालिबानीकरण खुद शेख हसीना के शासन के लिए ठीक नहीं है। तालिबानी शक्तियों का लक्ष्य शेख हसीना को हटाना और बांग्लादेश को अफगानिस्तान और पाकिस्तान की तरह तालिबानी देश घोषित कराना है?

बांग्लादेश में हिन्दू मंदिरेां और पूजा पंडालों में जो श्रृंखलाबद्ध हमले हुए हैं वे पूर्व नियोजित रहे हैं। बांग्लादेश का मीडिया भी यह मानता है कि हमले पूर्व नियोजित थे, साजिशन थे। पूजा पंडाल में साजिशकर्ताओं ने स्वयं कुरान की प्रति रखवाई थी और अफवाह फैला कर हिंसा की थी।

बांग्लादेश के हिन्दू पहले से ही डरे हुए हैं। डरे हुए हिन्दू बांग्लादेश को छोड़कर बाहर जाने के अवसर तलाशते रहते हैं। इसलिए बांग्लादेश के हिन्दुओं के अंदर इतनी शक्ति है नहीं कि वे कुरान का अपमान करें। कुरान के अपमान का दुष्परिणाम हिन्दुओं को पहले से मालूम है। जहां भी कुरान का अपमान हुआ है वहां मुस्लिम समुदाय हिंसा मचाती है, कत्लेआम करती है। इसलिए हिन्दू यह गुस्ताखी कर ही नहीं सकते हैं।

सबसे बड़ी बात यह है कि हिन्दू समुदाय कुरान ही क्यों बल्कि सभी धर्मगंथों में विश्वास रखती है। हिन्दू समुदाय का किसी भी धर्म ग्रंथ का अपमान करने या फिर उसकी खिल्ली उड़ाने का स्वभाव और मानसिकताएं नहीं होती है। हिन्दू मंदिरों और पूजा पंडालों पर सिर्फ हमले ही नहीं हुए हैं बल्कि वीभत्स ढंग से हिंसा भी हुई है। दो लोगों की हत्याएं भी हुई हैं, दर्जनों लोगों को घायल कर दिया गया है। सबसे बड़ी बात यह है कि छोटी-छोटी बच्चियों के साथ बलात्कार हुए हैं। हिन्दुओं के घरों को सरेआम जलाया गया है।

पाकिस्तान और उसकी बदनाम गुप्तचर एजेंसी आईएसआई सहित अन्य मुस्लिम आतंकवादी संगठनों की उपस्थिति, सक्रियता और हस्तक्षेप भी स्पष्ट है। बांग्लादेश का तालिबानी करण तेजी के साथ हो रहा है। बांग्लादेश को एक तालिबानी देश में तब्दील करने की मजहबी प्रक्रिया बहुत तेज चल रही है। अफगानिस्तान का तालिबानीकरण करने के बाद तालिबानी शक्तियों के हौसलें बढ़े हैं। तालिबानी शक्तियां गैर मुसलमानों का निशाना बनाना शुरू कर दिया था।

अफगानिस्तान से भी हिन्दूुओं और सिखों का सफाया हो रहा है। कश्मीर मंें जो मुस्लिम आतंकवाद की आंच लगभग बुझ गयी थी उस मुस्लिम आंतकवाद की आंच को फिर से लहरायी जा रही है। कश्मीर में हिन्दुओं की हत्या योजनाबद्ध ढंग से हो रही है। लगभग एक दर्जन हिन्दुओं की हत्या अभी तब हो गई है।

जिस तरह से अफगानिस्तान, भारत के कश्मीर में हिन्दुओं की हत्याएं हो रही हैं, हिन्दुओं को भगाने की साजिशें हो रही हैं उसी प्रकार से बांग्लादेश में हिन्दुओं की हत्याएं हो रही है और हिन्दुओं को भगाने की साजिशें जारी है। बांग्लादेश के हिन्दुओं को सरेआम मुसलमान बनने या फिर जान गंवाने की धमकी दी जा रही है।

जब कोई इतनी बड़ी घटना साजिशन होती है, पूर्व प्रायोजित होती है तो उसकी गूंज दूर तक जाती ही है। यही कारण है कि बांग्लादेश के अंदर हिन्दुओं की हत्याओं और उत्पीड़न की घटनाओं की गूंज भारत तक पहुंची है। अगर भारत के लोगों ने हिन्दुओं की हत्याओं के खिलाफ अपनी प्रतिक्रियाएं दी है तो फिर यह कौन सा गुनाह है।

एकाएक घटी घटनाओं पर कोई सरकार अपनी नाकामी से इनकार कर सकती है। ये घटनाएं तो साजिशन थी, पूर्व प्रायोजित थी। साजिशन और पूर्व प्रायोजित घटनाओं को न रोकना सरकार की ही विफलता मानी जाती है। इस कसौटी पर शेख हसीना की विफलता क्यों नहीं मानी जानी चाहिए। एक अच्छी सरकार इस तरह की पूर्व प्रयोजित और साजिशन धटनाओं को रोकती है।

अब यहां यह प्रश्न उठता है कि पूर्व प्रायोजित घटनाओं को शेख हसीना की सरकार क्यों नहीं रोक पायी? क्या उनकी अपनी गुप्तचर एजेंसी ऐसी पूर्व घटनाओं की जानकारी नहीं दी थी? यह कोई इस दशहरे पर ही ऐसी घटना नहीं घटी है। हर हिन्दू त्यौहारों पर इस तरह की घटना घटती है और हिसंक इस्लामिक तत्व अपनी हिंसा का शिकार हिन्दुओं को बनाते है।

पूर्व पाकिस्तान को बांग्लादेश बनाने में हिन्दुओं के बलिदान को नहीं भूलना चाहिए। हिन्दुओं ने कितना बड़ा बलिदान दिया था, यह भी स्पष्ट है। हिन्दुओं ने इसकी बहुत ही वीभत्स कीकत चुकायी थी। दस लाख से अधिक हिन्दू महिलाओं के साथ पाकिस्तान के सैनिक और पुलिस ने बलात्कार किए थे। हजारों हिन्दुओं को मौत का घाट उतार दिया गया था।

पाकिस्तान की सेना और पुलिस इसलिए हिन्दुओं को निशाना बनाती थी कि हिन्दू बांग्लादेश के निर्माण के अभियान में आगे थे। अगर हिन्दुओं का समर्थन नहीं होता और हिन्दुओं का बलिदान नहीं होता तो फिर बांग्लादेश का निर्माण भी संभव नहीं था। भारत की सेना ने बांग्लादेशी बनाने मे कितनी बड़ी वीरता दिखायी थी, यह भी मालूम है। भारत की सेना की वीरता का ही प्रमाण था कि पाकिस्तान की सेना को समर्पण करना पड़ा था। कोई एक दो हजार नहीं बल्कि 90 हजार पाकिस्तान सैनिक भारत के कज्बे में थे।

शेख हसीना को अपने पिता शेख मुजीबुर्र रहमान की आत्मघाती कदम पर चलने का दुष्परिणाम भुगतना पड़ सकता है। हिंसक इस्लामिक तत्व से शेख हसीना को ही अधिक खतरा है। इस्लामिक हिंसक तत्व तख्ता पलट कर सकते हैं। सेना और पुलिस का भी तेजी के साथ इस्लामिक करण हुआ है। इसलिए शेख हसीना को हमेशा भारत का साथ और सहयोग चाहिए। शेख हसीना को 1972 के धर्मनिरपेक्ष संविधान की ओर लौटना होगा। 1972 का धर्मनिरपेक्ष संविधान ही बांग्लादेश का तालिबान करने से रोक सकता है।

आचार्य श्री विष्णुगुप्त
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