बारिश में यदि आप इन जगह नहीं घूमे तो आप कही नहीं घूमे

मानसून में चारो तरफ हरियाली हो जाती है, बारिश की बूंदों में भीगते हुए घूमने का मजा कुछ अलग होता है,पानी को देखकर कर ही लोगो लोगो के चेहरों पर खुशी छलक जाती है। बारिश में जो प्रकर्ति का श्रृंगार होता हे वो मन को आकर्षित करता है, कल -कल करते झरने मन मोह लेते है । घूमने के शौकीन लोगों को मानसू बहुत पसंद आता है ऐसे में अगर आपने मित्रो और अपने परिवार केसाथ छुट्टी के लिए जाना चाहते है तो  हम आपको कुछ ऐसे टूरिस्ट डेस्टिनेशंस के बारे में बताने जा रहे हैं जहां आप घूमने जा सकते हैं।

lonawala
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1. लोनावला

आप अगर मुंबई में रहते हैं तो आपके लिए मानसून में जाने की सबसे बढ़िया जगह है लोनावाला!समुद्र स्तर से 625 मीटर ऊंचाई पर स्थित।मानसून की शुरुआत के साथ सह्याद्री पर्वत श्रृंखलाएं और हरे घाट, झरने और सुखद जलवायु और आकर्षक हो जातें हैं। शहर की हलचल से शीघ्र बचने के लिए यह अति सुंदर पहाड़ी क्षेत्र है ।लोनावाला मुंबई से 97 किमी और पुणे से केवल 64 किमी दूर है।

कैसे पहुंचे – लोनावला में एक रेलवे स्टेशन है जहां पुणे और मुंबई से कई गाड़ियां रोज़ आती हैं । पास एयरपोर्ट है पुणे में, जो वहाँ से 60 किलोमीटर दूर है।और आप अगर मुंबई या पुणे से आ रहे हैं तो अपनी कार से भी आ सकते हैं, केवल डेढ़ घंटे का रास्ता है दोनों शहरों से ।लोनावाला के निकटतम हवाई अड्डा पुणे हवाई अड्डा, 62 किमी दूर है। जो वायुमार्ग से पुणे, गोवा, मुंबई और बंगलौर जैसे प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

uaipur
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2. उदयपुर

उदयपुर किसी जन्नत से कम नहीं है। उदयपुर को दुनिया के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक माना जाता है और उदयपुर को पूर्व का वेनिस भी कहते है । यह एक ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि यह कई शताब्दियों से मेवाड़ की ऐतिहासिक राजधानी बना हुआ है। शहर का मुख्य आकर्षण सिटी पैलेस जो पिचोला झील के मध्य में स्थित है। उदयपुर की यात्रा के लिए सबसे अच्छा समय मानसून के मौसम में होगा क्योंकि मानसून में भयंकर वाली गर्मी से राहत मिलती है।उदयपुर में सिटी पैलेस, बगोरे की हवेली, कुमाभाल्गढ़ किला, लेकपिछोला, सज्जन गढ़,लेक सिटी, जग मंदिर, जगदीश मंदिर, फतेहसागर लेक, सहेलियों की बारी,भारतीय लोककला संग्रहालय, अम्बरी घाट, विंटेज क्लासिक कार संग्रहालय,मंसापूर्ण करनी रोपवे,जैसमंद लेक आदि कई दर्शनीय स्थल है ।

कैसे पहुंचे – उदयपुर में एक रेलवे स्टेशन है जहां पूरे भारतवर्ष से काफी गाड़ियां रोज़ आती हैं। महाराणा प्रताप एयरपोर्ट भी है ।उदयपुर में तो आप एयरोप्लेन से भी आ सकते हैं । और आप राजस्थान में से ही कही से आ रहे हैं तो अपनी कार से भी आ सकते हैं।

Cherrapunjee
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3. चेर्रापुंजी

ग्रह पर दूसरा सबसे वर्षा वाला स्थान है। चेरापूंजी में घूमते समय आप हर समय बादलों को अपने आस-पास पाते हैं।चेर्रापुंजी पूरे वर्ष में सबसे ज़्यादा वर्षा होती है। यदि आप बारिश से प्यार करते हैं, तो मॉनसून के दौरान आपको चेर्रापुंजी का दौरा करना चाइये जो विशाल परिदृश्य और पहाड़ियों से ढका हुआ है, यहा की रोमांचक मॉनसून ट्रेकिंग यात्रा भी बहुत प्रसिद्ध है। आप यहां अनोखे नारंगी फूल से शहद पा सकते हैं और मेघालय की चाय को पीना न भूले क्यूंकि ये असम या दार्जिलिंग चाय से काफी अलग है। चेरापूंजी के इर्द-गिर्द बसी पहाड़ियों पर यहां-वहां अनेक झरने हैं। आप चाहे किसी भी घाटी पर हो, आपको अपने आस-पास या तो किसी झरने की आवाज सुनाई देगी, या फिर कोई झरना ही जरूर दिखेगा।

कैसे पहुंचे – चेर्रापुंजी में रेलवे स्टेशन है जहां पूरे भारतवर्ष से काफी गाड़ियां रोज़ आती हैं । सबसे पास एयरपोर्ट है शिल्लोंग में, जो वहाँ से 53 किलोमीटर दूर है । और आप अगर उत्तर पूर्व भारत से आ रहे हैं तो अपनी कार से भी आ सकते हैं, सड़कें अच्छी हैं ।

munnar
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4. मुन्नार

केरल का एक खूबसूरत हिल स्टेशन है मुन्नार। खूबसूरती ऐसी कि जैसे यह धरती के स्वर्ग की तरह लगता है।  उच्च पहाड़ आधा धुंध में आते हैं, जबकि बारिश हर चीज को पुनर्जन्म सा दे देती है। अगर आपको पहाड़ो के बीच में कुछ शांत समय की तलाश है तो दक्षिण में मुन्नार एक आदर्श जगह है। मुन्नार को चाय के बागानों का शहर भी कहा जाता है। यहां चाय के कई बगीचे भी देखने को मिल जाएंगे।अगस्त में ये एक पर्यटक मौसम नहीं होने के नाते, आप बिना किसी भीड़ के और सीजन की कीमतों के इन सभी का आनंद ले सकते हैं!

कैसे पहुंचे – मुन्नार के सबसे निकट रेलवे स्टेशन अलुवा में है जो वहाँ से 110 किलोमीटर दूर है । सबसे पास एयरपोर्ट है कोचीन में, जो वहाँ से 110 किलोमीटर दूर है ।और आप अगर दक्षिण से आ रहे हैं तो अपनी कार से भी आ सकते हैं, सड़कें अच्छी हैं |

orchha
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5. ओरछा

ओरछा, भारत के केन्द्र में मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिले में स्थित है। मानसून में भारत में आने के लिए सबसे अच्छी जगहों में से एक यह है । ओरछा में मौसम हमेशा सुहावना बना रहता है।यह शहर, 1501 में राजा रुद्र प्रताप द्वारा निर्मित है। बढ़ती पहाड़ियों से घिरी, ओरछा बेतवा नदी पर स्थित है और कस्टर्ड सेब की मीठी गंध से घिरी हुई है। इस लहराती भूमि में विशाल मंदिर और किले हैं।

कैसे पहुंचे – ओरछा के सबसे निकट रेलवे स्टेशन झाँसी में है जो वहाँ से 18 किलोमीटर दूर है ।सबसे पास एयरपोर्ट है ग्वालियर में, जो वहाँ से 123 किलोमीटर दूर है ।और आप अगर मध्य भारत से आ रहे हैं तो अपनी कार से भी आ सकते हैं, सड़कें अच्छी हैं ।