समाजसेवी ओममुनि के पौत्र विश्रुत झंवर बने सीए, दादा-चाचा की तपस्या रंग लाई

ब्यावर (अजमेर)। समाज की निःस्वार्थ सेवा करने वाले को इसका फल जरूर मिलता है। ब्यावर निवासी ओममुनि इसका उदाहरण हैं। वे सरकारी स्कूल में प्रधानाध्यापक रहे। नौकरी के दौरान ही वे आर्य समाज के माध्यम से समाजसेवा करते रहे।

पूरी तरह से आस्तिक ओममुनि के जवान बड़े पुत्र विश्वकीर्ति झंवर का कुछ साल पहले दुर्घटना में निधन हो गया। एकबारगी लगा कि वे बुढ़ापे में क्रूर काल के इस प्रहार को नहीं झेल पाएंगे। मगर ओममुनि ने हिम्मत नहीं हारी।

उन्होंने पुत्र के परिवार को संभाला और समाजसेवा भी जारी रखी। वे घर में रोजाना यज्ञ करते हैं। दिन भर समाज सेवा में लगे रहते हैं। यही संस्कार बच्चों को दिए। उनके 80वें जन्मदिन पर ओममुनि को दोहरी खुशी मिली। उनका पौत्र स्वर्गीय विश्वकीर्ति झंवर का बेटा विश्रुत झंवर सीए बन गया। इसी मौके पर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने समाजसेवा के लिए उनका अभिनन्दन भी किया।

नगर आर्य समाज के प्रधान आचार्य वेदप्रकाश और मंत्री डॉक्टर दिनेश शर्मा ने उन्हें शॉल ओढ़ाकर सम्मान स्वरूप नोटों की थैली भेंट की। जो उन्होंने तत्काल सामाजिक कार्यों के लिए दान कर दी। इस मौके पर ओममुनि ने कहा कि प्रभु की सेवा में मन लगाने वाले का ध्यान भी प्रभु ही रखते हैं। वे कृपानिधान हैं।

उन्होंने बताया कि मुझे आर्य समाज से जोड़ने एवं समाजसेवा की प्रेरणा देने वाले वैद्य रविदत्त जी थे। ब्यावर निवासी वैद्य जी भारतीय जनसंघ की राजस्थान इकाई के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। ओममुनि के छोटे पुत्र श्रुतिशील झंवर भी सीए हैं और मुंबई में एक बड़ी कम्पनी में निदेशक के पद पर हैं। श्रुतिशील और उनकी पत्नी का भी विश्रुत को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने भतीजे विश्रुत का सतत मार्गदर्शन दिया। आप ओममुनि को मोबाइल नंबर 9950999679 पर बधाई दे सकते हैं।