गोवर्धनवासी सांवरे तुम बिन रहियो न जाए….साध्वी ऋतम्भरा

उदयपुर। उदयपुर के बीएन विश्वविद्यालय मैदान में स्थित भागवत धाम में चल रही भागवत कथा के छठे दिन कालयवन के प्रसंग पर राष्ट्रभक्तों का आह्वान करते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि समाज में सज्जनों की निष्क्रियता से दुर्जनों की ताकत बढ़ती है, इसलिए सज्जनों को जागना होगा। हिंदू समाज को सक्षम होने के लिए अपनी शक्ति को जगाना होगा। राष्ट्रहित में सज्जनों को आगे आकर दुर्जनों की शक्ति को कमजोर करना होगा।

उन्होंने कविता की पंक्तियां सुनाते हुए कहा कि अस्सी घाव लगे थे तन फिर भी व्यथा नहीं थी मन में, पानीपत के समरांगन में तुम्हें जगाने को चमक उठी थी सांगा की तलवार, जगाया तुमको कितनी बार…, शत्रु हृदय दहलाने वाला, चमक उठा था जिसका भाला, उस प्रताप के रण विक्रम को तुमने दिया बिसार… जगाया तुमको कितनी बार…। इन पंक्तियों का मर्म समझाते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रनिर्माण के लिए स्वयं को आहूत होना पड़ता है।

श्रुति ही सही शिक्षा

संदीपन आश्रम और गुरु शिष्य परंपरा पर साध्वी ने कहा कि आज की शिक्षा में गुरु शिष्य परंपरा का विलोपन हो गया है। छात्र गुरु के चाकू मारता है यह संस्कारों की कमी के कारण हैं। विद्यार्थी के चित्त में उतरे ऐसे संस्कार प्रदान करने वाली शिक्षा नहीं है यह। आज की शिक्षा पद्धति में लिखा-लिखा कर पढ़ाते हैं तो भी याद नहीं रहता। हम अपने मस्तिष्क का मात्र 5 से 10 प्रतिशत ही उपयोग ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि वैदिक काल में श्रुति, फिर याद रखना, स्मृति में रखना, उससे ज्ञानवान छात्र होते थे। इसीलिए इस देश को श्रुति व स्मृतियों का देश कहा जाता है। शिक्षा व संस्कार ऐसे ही प्रतिपादित किए जाते थे, वैदिक काल का विद्यार्थी साहसी व निर्भय होता था गुरु का आदर करता था।

कृष्ण रासेश्वर ने गोपियों को किया कृतार्थ

इसके बाद साध्वीश्री ने भागवत पुराण के दसवें स्कंध से कृष्ण लीलाओं को वर्णन करते हुए बताया कि गोपांगनाओं के साथ भगवान् श्रीकृष्ण रासरासेश्वर स्वरूप में प्रकटे और उन्हें कृतार्थ किया। इसके बाद इस स्कंध में आए गोपी गीत का गायन हुआ, जिन्हें गोपियों ने श्रीकृष्ण के वियोग में गाए और तभी भगवान श्रीकृष्ण रासरासेश्वर स्वरूप में गोपियों के मध्य से प्रकटे। जब कृष्ण ने गोपियों संग रास किया तो पूरा पंडाल नाच उठा।

कृष्ण गए तो सभी के बहे आंसू

गोकुल छोड़ जब कृष्ण मथुरा गए तो पूरा गोकुल रोया। इस प्रसंग का साध्वीश्री ने भावपूर्ण वर्णन कर दृश्य को भागवत धाम में साक्षात् कर दिया। उन्होंने कहा कि जब कृष्ण मथुरा जा रहे थे तो नदी, पेड़, पौधे, फूल, गैया, ग्वाल-बाल, गोपी सभी अश्रु बहा रहे थे। पूरा भागवत धाम इस प्रसंग पर भावों की गंगा में बह गया। इसके बाद कृष्णा रुक्मणी विवाह बारात में खूब नाच गान उल्लास हुआ। पूरे पंडाल में मंगल गीत गाए गए और बहुत देर तक लोग उल्लासित हो नाचते रहे।

गोवर्धनवासी सांवरे तुम बिन रहियो न जाए….

कार्यक्रम में भक्तों ने भजनों का आनन्द लिया। साध्वीश्री ने गोवर्धन वासी सांवरे तुम बिन रहियो न जाए … भजन गा कृष्ण की स्तुति की। इसके बाद ‘पार करेंगे कन्हैया, कृष्ण कन्हैया…’, ‘लूटकर ले गया जिगर सांवरा जादूगर….’, ‘मेरे घरे बिहारीजी को ब्याव गजानंद वेगा आवजो जी…’, ‘दे दइयो राधा दे दइयो राधा, कान्हा की बाँसुरिया राधा रानी दे दईयो…’ आदि भजनों पर भक्त झूम उठे।

गुरु की तस्वीर पाकर भावुक हुई साध्वीश्री

कथा के प्रारम्भ में साध्वीश्री की शिष्या साध्वी सुगन ज्योति के छोटे भाई भरत मालवीय ने अपने हाथों से बनाई साध्वी ऋतम्भरा के गुरुजी की तस्वीर भेंट की। इस भेंट से वे भावुक हो गईं। इसके बाद उन्होंने गणेशजी की स्तुति के साथ कथा का शुभारंभ किया।

व्यास पीठ पूजन

कथा के छठे दिन मुख्य यजमान प्रकाश अग्रवाल, अध्यक्ष दिनेश भट्ट, वरिष्ठ उपाध्यक्ष पारस सिंघवी व महिला समिति अध्यक्ष वीणा अग्रवाल, धीरेंद्र सच्चान सहित यजमानगण विष्णु कुमार सुवालका, शांतिलाल वेलावत, रतनदेवी माहेश्वरी ने व्यास पीठ का पूजन किया। वहीं प्रसाद का आशीर्वाद प्यारेकृष्ण अग्रवाल, खेराड़ वालों ने लिया। आरती का आशीर्वाद पुलिस कप्तान राजेंद्र प्रसाद गोयल सपत्नीक, लाल सिंह झाला, माया टंडन, गोविंद अग्रवाल व यशवंत सोमानी ने लिया। उदयपुर के विकास शर्मा सर्वमंगला ट्रस्ट के ट्रस्टी बने। वात्सल्य धाम की साध्वी शिरोमणि ने बताया कि वात्सल्य धाम की शिलाओं के लिए संकल्प भेंट के लिए भागवत श्रवणार्थियों में होड़ मची हुई है।

आज के कार्यक्रम

नित्य भागवत धाम के पूजन का रविवार को अंतिम दिवस है। हवन पूर्णाहुति के साथ यह पूजन संपन्न होगा। सुबह 7: 30 बजे साध्वी ऋतम्भरा दीक्षार्थी को अग्रसेन भवन में दीक्षा देंगी। विशाल भंडारा मिराज समूह के मदन पालीवाल की ओर से होगा।