हम प्राथमिकता से वंचित वर्ग आरक्षण लागू करने का काम करेंगे : तिवाड़ी

bharat vahini party chief ghanshyam tiwari addressing public meeting in dholpur and alwar

धौलपुर/अलवर/जयपुर। भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि जो जनप्रतिनिधि जाति के आधार पर सोचता है और जाति के आधार पर प्रतिनिधित्व करता है तो उसे जनप्रतिनिधि होने का अधिकार नहीं है।

तिवाड़ी ने कहा कि हमने घोषणा पत्र जारी नहीं किया क्योंकि घोषणा पत्र में जो वादे किए जाते हैं वो कभी पूरे नहीं होते। इसीलिए हमने घोषणा पत्र नहीं दृष्टि—पत्र जारी किया है। हमनें इसमें मतदाताओं को ध्यान में रखकर वाहिनी की प्राथमिकताएं तय नहीं की है। हमने जनगणना देखकर दृष्टि—पत्र में दूरदृष्टिपूर्ण प्राथमिकताओं को शामिल किया है।

तिवाड़ी ने शनिवार को धौलपुर और अलवर की विधानसभा क्षेत्रों में वाहिनी के प्रत्याशियों के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया। तिवाड़ी ने पहले अलवर के बहरोड़ से मुकेश शर्मा और फिर बसेड़ी से दीपक कैन के समर्थन में आयोजित चुनावी सभा को संबोधित किया। बसेड़ी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित सभा के बाद वे हेलिकॉप्टर से जयपुर रवाना हो गए।

तिवाड़ी ने कहा कि ईबीसी आरक्षण के लिए भी ब्राह्मण, राजपूत, वैश्य और अन्य आरक्षण से वंचित समाजों को सरकार से सवाल पूछना चाहिए और इसके लिए आंदोलन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजपूत, ब्राह्मण, वैश्य, कायस्थ के साथ ही आरक्षण से वंचित अन्य समाज के बच्चों के साथ वर्तमान सरकार ने धोखा किया है।

उन्होंने कहा कि हम पिछले 4 साल से लगातार वंचित वर्ग के आरक्षण की लड़ाई लड़ रहे हैं, जिसे यह सरकार स्वीकृति के बावजूद दबाकर बैठी है। उन्होंने कहा कि ईबीसी वर्ग के लोगों को इन चुनावों में वाहिनी को वोट देकर भाजपा को सबक सिखाना चाहिए। अगर वंचित वर्ग को आरक्षण चाहिए तो भारत वाहिनी पार्टी को प्रदेश में जिताकर राजस्थान को बचाना होगा।

उन्होंने कहा कि इस सरकार ने काला कानून, एसआईआर बिल, 13 नंबर के बंगले पर कब्जा करने जैसे काले कारनामों को शह देने से आमजन में असंतोष की लहर पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि काला कानून जैसा बिल अगर विधानसभा में पास हो जाता तो हम लोग आज यहां बैठकर बात नहीं कर रहे होते।

वहीं इस प्रदेश सरकार ने स्थानान्तरण को गृह उद्योग में ही परिवर्तित कर दिया। तिवाड़ी ने कहा कि हमारा राज्य भले ही पीएसी की पीएआई रिपोर्ट में पिछड़ा घोषित किया जा चुका है। अगर इस स्थानान्तरण की दर को विकास दर में जोड़ दिया जाए तो राजस्थान की विकास दर भारत की विकास दर से भी ज्यादा हो जाएगी।