भारत वाहिनी पार्टी वैचारिक पृष्ठभूमि से हुई मजबूत : घनश्याम तिवाड़ी

जयपुर। पूर्व उपराष्ट्रपति भैरोंसिंह शेखावत के जन्मदिवस धनतेरस पर भारत वाहिनी पार्टी के प्रदेश कार्यालय ‘मातृमंदिर’ में श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके तानाशाही एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन को याद किया गया।

इस अवसर पर लोकेश कुमार शेखावत पूर्व कुलपति(जय नारायण व्यास विश्व विद्यालय, जोधपुर), अतुल गर्ग सेवानिवृत्त आईएएस, कर्नल रामेश्वर बेनीवाल (शौर्य चक्र विजेता), एडवोकेट धर्मपाल सिंह एवं सतवीर सिंह वर्मा (रिटायर्ड सूबेदार) ने भारत वाहिनी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

इस दौरान वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी ने कहा कि सामाजिक, अकादमिक और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े इन प्रतिष्ठित व्यक्तियों के वाहिनी में शामिल होने पर पार्टी वैचारिक पृष्ठभूमि पर अधिक मजबूत हुई है।

वाहिनी से पूर्व में आईआईटियन, शिक्षाविद, सीए, एडवोकेट, डाक्टर्स जैसे प्रोफ़ेशनल जुड़ चुके हैं। तिवाड़ी ने कहा कि अब अगली सरकार किसकी बनेगी उसमें वाहिनी की भूमिका अग्रणी रहेगी।

तिवाड़ी ने बताया कि जयनारायण व्यास विश्व विद्यालय के पूर्व कुलपति लोकेश कुमार शेखावत के पिता स्वर्गीय नारायण सिंह राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापकों में से एक थे।

वहीं इनके सगे काकोसा लक्ष्मण सिंह राजस्थान में संघ के वरिष्ठ प्रचारक के रूप में अनेक ज़िम्मेदारियों पर काम किया। अतुल गर्ग के बारे में बताते हुए कहा कि वे प्रशासनिक क्षेत्र में चिरपरिचित नाम है, वे राजस्थान में स्काउट एंड गाइड के स्टेट कमिश्नर के पद पर रहे हैं।

रिटायर्ड कर्नल रामेश्वर बेनीवाल शौर्य चक्र विजेता हैं, जिन्होंने सीमा पर देश के लिए लड़ते हुए अपना एक हाथ गंवा दिया था। जेपी आंदोलन से जुड़े समाजवादी विचारधारा के एडवोकेट सतपाल चौधरी और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय रिटायर्ड सूबेदार सतपाल सिंह ने वाहिनी की सदस्यता ग्रहण की।

कार्यक्रम में लोकेश कुमार शेखावत ने राजस्थान में फैले भ्रष्ट और तानाशाही माहौल को ख़त्म करने की बात कही। उन्होंने कहा कि राजस्थान में एबीवीपी, बीजेपी संगठनों के कार्यकर्ता और मूल मतदाता आज इन संगठनों से नाराज हैं। इसी कारण से उप चुनावों में 17 में से एक भी सीट भाजपा को नहीं मिली।

रिटायर्ड आइएएस अतुल गर्ग ने सरकार की नीति का विरोध करते हुए घनश्याम तिवाड़ी को संघर्ष का पुरोधा बताया। वहीं एडवोकेट धर्मपाल चौधरी और सतपाल सिंह ने भारत वाहिनी पार्टी और तिवाड़ी के कार्य को राजस्थानी संस्कृति के रक्षा करने में मील का पत्थर बताया।