मंत्री जनक राम के ओएसडी के ठिकानों पर छापेमारी में 1.73 करोड़ से अधिक की संपत्ति का खुलासा

पटना। लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर वैध आय के स्रोत से काफी अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) ने बिहार के खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम के आप्त सचिव सह विशेष कार्य पदाधिकारी (ओएसडी) मृत्युंजय कुमार और उनकी महिला मित्र के चार ठिकानों पर आज एक साथ छापेमारी कर एक करोड़ 73 लाख रुपए से अधिक की चल एवं अचल संपत्ति का खुलासा किया।

एसवीयू के अधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को यहां बताया कि कुमार के अररिया जिले के श्री कृष्णा नगर के खटिया टोला गांव के पैतृक घर, राजधानी पटना के श्री कृष्णापुरी स्थित एक फ्लैट तथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) पद से बर्खास्त उनकी महिला मित्र रत्ना चटर्जी के कटिहार के आवास के साथ ही भाई धनंजय कुमार के घर पर एक साथ छापेमारी की गई। पूर्व में वह कटिहार जिले में प्रखंड विकास पदाधिकारी के पद पर कई प्रखंड में पदस्थापित रहे हैं। इनका पूर्व में पदस्थापन अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन, पटना के पद पर भी रहा है।

सूत्रों ने बताया कि लोक सेवक के रूप में अपने पद का दुरुपयोग कर वैध आय से काफी अधिक संपत्ति अर्जित कर स्वयं, अपने भाई धनंजय कुमार तथा महिला मित्र रत्ना चटर्जी के नाम पर पटना में जमीन, फ्लैट, सिलीगुड़ी में दुकान के रूप में अचल संपत्ति अर्जित की। इसके लिए परिजनों, मित्रों और अन्य के माध्यम से काले धन को सफेद बनाने का भी प्रयास किया गया है।

सूत्रों ने बताया कि सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने नाजायज ढंग से अकूत संपत्ति अर्जित की है, जो उनके द्वारा वेतन एवं अन्य ज्ञात स्रोतों की तुलना में बहुत ही अधिक है। इसी के तहत उनके खिलाफ आय से अधिक एक करोड़ 73 लाख 4922 रुपए की संपत्ति गैरकानूनी ढंग से अर्जित करने का मामला दर्ज किया गया है। कुमार की पत्नी आरती मृदुभाषी से तलाक का मुकदमा चल रहा था लेकिन इसी दौरान उनकी वर्ष 2013 में निधन हो गया।

पटना स्थित आवास पर तलाशी के दौरान पाया गया कि श्री कुमार अपनी महिला मित्र चटर्जी के साथ ही नाजायज रूप से रह रहे हैं। चटर्जी के कटिहार स्थित आवास से लगभग 30 लाख रुपये बरामद किए गए हैं। तलाशी के दौरान पाया गया कि कुमार और चटर्जी के बैंक खाते से बड़ी राशि का आदान प्रदान किया गया है ताकि भ्रम की स्थिति बन सके तथा नाजायज आमदनी को छुपाया जा सके।

सूत्रों ने बताया कि ठाकुरगंज की सीडीपीओ रहते हुए चटर्जी को 09 सितंबर 2011 को राज्य सतर्कता अन्वेषण ब्यूरो ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। पद से बर्खास्त किए जाने के बाद चटर्जी की देखरेख एवं निजी खर्च का वहन कुमार ही करते हैं। कुमार के घर के निकट ही चटर्जी के घर का निर्माण किया जा रहा है, जिसका वहन कुमार कर रहे हैं।

सूत्रों ने बताया कि चटर्जी के नाम पर एक फ्लैट सिलीगुड़ी के ज्योति नगर में है, जिसे खरीदने के लिए कुमार ने अवैध रूप से कमाई मोटी राशि का भुगतान किया है। इस फ्लैट की कीमत 33 लाख रुपए है। कटिहार के फ्लैट से तीन लाख रुपए नकद, 30 सोने की बिस्किट, पोर्न सीडी एवं अश्लील साहित्य बड़ी संख्या में बरामद की गई।

पटना के पाटलिपुत्र थाना के लोयला स्कूल के निकट 32 लाख रुपए की एक प्लॉट भी है। चटर्जी के नाम सिलीगुड़ी के सेवक रोड के प्लेनेट मॉल में एक दुकान भी है। चटर्जी के कटिहार स्थित आवास की तलाशी में 45 लाख रुपए मूल्य के स्वर्ण आभूषण, भारतीय जीवन बीमा निगम में निवेश से संबंधित तीन दस्तावेज, जिसका भुगतान 40 हजार रुपए मासिक किया जाता है। इसी तरह कई बैंकों के खाते भी जब्त किए गए हैं। बरामद दस्तावेजों को खंगाला जा रहा है।

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष अक्टूबर में ही खान एवं भूतत्व मंत्री जनक राम के निजी आप्त सचिव बबलू आर्य को संसद भवन में फर्जी पास बनवाने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।