जनमत सर्वेक्षण से गोवा में बिकनी को मिली इजाजत : विधानसभा उपाध्यक्ष

Bikinis allowed in Goa because of historic Opinion Poll in 1967: Deputy speaker

पणजी। गोवा के एक ऐतिहासिक जनमत संग्रह के रूप में माने जाने वाले 1967 के जनमत सर्वेक्षण से पूर्व पुर्तगाली उपनिवेश को अपनी विशेष पहचान बनाए रखने में भले ही मदद मिली हो, लेकिन विधानसभा उपाध्यक्ष व भाजपा विधायक माइकल लोबो का मानना है कि तटवर्ती राज्य में बिकनी की इजाजत देने का एक कारण जनमत सर्वेक्षण भी है।

लोबो ने मंगलवार को जनमत सर्वेक्षण दिवस के मौके पर आयोजित समारोह में भाषण दिया। इस भाषण में लोबो ने कहा कि गोवा के महाराष्ट्र में विलय के खिलाफ जनमत सर्वेक्षण की वजह से गोवा में बिकनी को इजाजत दी गई। यह भाषण बुधवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

लोबो ने कहा कि यहां (गोवा) जो विकास हुआ है, उसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय पर्यटक यहां आते हैं। इसकी हद तक जाते हुए जनमत सर्वेक्षण की वजह से समुद्र तट पर बिकनी की इजाजत दी गई है।

लोबो ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र में इसकी (बिकनी) इजाजत नहीं है। हमें खुलकर बोलना चाहिए। महाराष्ट्र में इसकी इजाजत नहीं है, अन्यथा वहां पर्यटन विकसित होता।

ऐतिहासिक जनमत संग्रह को गोवा में जनमत सर्वेक्षण दिवस के रूप में जाना जाता है। यह 16 जनवरी, 1976 को हुआ था, जिसमें 54.20 फीसदी लोगों ने गोवा को एक अलग राज्य बनाने के रूप में वोट दिया, जबकि 43.50 फीसदी ने पड़ोसी महाराष्ट्र के साथ विलय के लिए वोट किया था।

महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्टी ने विलय का समर्थन किया था, जबकि जैक सेक्वेरिया की अगुवाई वाली यूनाइटेड गोवंस ने भारतीय संघ में गोवा के स्वतंत्र राज्य की वकालत की थी।