सिरोही में भाजपा किसान मोर्चा सम्मेलन : गहलोत सरकार को जमकर कोसा

सिरोही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार ने आजादी के बाद पहली बार कृषि सुधारों की प्रक्रिया को बढ़ाकर छोटे व मध्यम किसानों की चिंता करके उनके हित में कानून बनाया है। इससे देश के मध्यम व छोटे किसानों को भी अब योजनाओं का लाभ मिलेगा। ये बात भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हरिराम रणवा ने मोर्चा के जिला स्तरीय किसान महासम्मेलन में बड़ी तादाद में उमड़े किसानों व भाजपा कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कही।

गुरुवार को केंद्र व प्रदेश भाजपा किसान मोर्चा के नेताओं की टीम सिरोही मुख्यालय पहुंची और जिले के किसानों से रूबरू हुई। स्थानीय स्वामीनारायण मंदिर सभागार में उपस्थित किसानों को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष रिणवा ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि खुद कांग्रेस की सरकारें पहले कहती थी कि कृषि सुधार करना आवश्यक है, वो अब पलट रहे हैं उन्हें किसानों की फिक्र नहीं है।

मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री सेलाराम चारण ने कृषि सुधारों का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी सरकार ने फसल बीमा का दायरा बढाकर जो लाभ पहले छोटे किसानों को नहीं मिल पाता था अब किसानों के समग्र कल्याण के बारे में सोचा है और किसान क्रेडिट कार्ड भी आवंटित किए हैं। उन्होंने सभी से किसानों के कल्याणकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार किए जाने की अपील की।

इसी प्रकार मोर्चा के प्रदेश महामंत्री ओपी यादव ने आने वाले दिनों में किसान मोर्चा की भूमिका और कार्यों के बारे में विस्तार से बताया। यादव ने किसान मोर्चा को गांव, गली ढाणी, चौपाल तक ले जाकर किसानों के हित में लिए जा रहे फैसलों और किसानों की समस्याओं के निदान में सहयोगी बनने का आग्रह किया।

मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष हेमाराम चौधरी ने बताया कि मोदी सरकार द्वारा मंडियों को मजबूत करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाए जा रहे हैं। इसी प्रकार किसान नेता घेवाराम बिश्नोई ने कहा कि देश में किसान सम्मान निधि योजना के तहत करीब 10 करोड़ किसानों को इसका लाभ मिला है।

भाजपा जिलाध्यक्ष नारायण पुरोहित ने गहलोत सरकार को किसान विरोधी बताते हुए कहा कि चुनाव पूर्व कर्जमाफी जैसी लोकलुभावन घोषणा की जाती है जिसका लाभ छोटे किसानों को नहीं होता। इन सब बातों पर प्रधानमंत्री ने गहन चिंतन करके उनके समग्र कल्याण की किसान नीति बनाई है जिसका लाभ किसानों को मिलेगा।

रेवदर विधायक जगसीराम कोली ने कथित किसान आंदोलन करने वाले लोग लोगों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वो आंदोलन भटक गया है। इनको देश के किसान का कोई समर्थन नहीं है। आंदोलन के नेता बन रहे लोग किसानों के नाम पर केवल गुमराह कर रहे हैं।

आबू-पिंडवाड़ा विधायक समाराम गरासिया में कांग्रेस के लोगों द्वारा एमएसपी खत्म करने के भ्रम फैलाने को उनका दुष्प्रचार बताया और कहा कि एमएसपी है और आगे भी रहेगी। पूर्व राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने सभी को एकजुट होकर राज्य कांग्रेस सरकार की किसान विरोधी एवं जन विरोधी नीतियों का विरोध करने की हुंकार भरी।

पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष तारा भंडारी ने कहा कि किसानों की सच्ची हितैषी भारतीय जनता पार्टी है और कार्यकर्ता किसान कल्याण की योजनाओं से किसानों को लाभ दिलाएं। इसी क्रम में जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया, लुंबाराम चौधरी, कमलेश दवे, दिलीप सिंह मांडाणी आदि ने भी संबोधित किया।

मंच पर किसान मोर्चा के प्रदेश कोषाध्यक्ष दीपक कुमावत, प्रदेश मीडिया प्रभारी गौरी कुमावत, जिला महामंत्री जयसिंह राव, पूर्व जिला महामंत्री एडवोकेट वीरेंद्रसिंह चौहान, सिरोही शहर मंडल अध्यक्ष लोकेश खंडेलवाल, महिला मोर्चा प्रदेशमंत्री रक्षा भंडारी, मोर्चा जिलाध्यक्ष अंशु वशिष्ठ, किसान नेता जीवनसिंह रायपुर, नरपतसिंह राणावत आदि भी मौजूद रहे।

इससे पूर्व दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। अतिथियों का किसान मोर्चा की ओर से साफा, तलवार, माला, दुपट्टा आदि से स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष हेमंत पुरोहित एवं अमरसिंह ने किया। सम्मेलन के बाद कलेक्टर के नाम किसान हित में राज्य सरकार की फसल बीमा योजना की अंतिम तिथि को बढ़ाने की मांग एवं अन्य समस्याओं का ज्ञापन दिया गया।

गहलोत सरकार को किसान विरोधी बताया

किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष गणपतसिंह राठौड़ ने राज्य कांग्रेस सरकार पर कर्ज माफी में वादाखिलाफी करने का आरोप लगाकर कहा कि प्रदेश के किसानों को मुख्यमंत्री गहलोत ने ठगा है, आज प्रशासनिक अव्यवस्थाओं के कारण केंद्र की लाभकारी योजनाओं का भी लाभ किसानों को नहीं मिल रहा। उन्होंने आने वाले दिनों में किसान हित में सड़कों पर उतरने की बात कही।

बड़ी तादाद में उमड़े किसान व कार्यकर्ता, हॉल छोटा पड़ा

राज्य गहलोत सरकार से त्रस्त किसान व आमजन किस प्रकार भी बेहाल है इसकी बानगी यह रही कि अल्प समय की सूचना पर आयोजकों की उम्मीद से अधिक किसान सम्मेलन में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा और हॉल खचाखच भरने के बाद उतने ही बाहर खड़े नजर आए।