सिरोही में किसानों ने निकाली रैली, कई भाजपा नेताओं ने किया सम्बोधित

सिरोही में किसान संघर्ष रैली की अगुवाई करते नेता।
सिरोही में किसान संघर्ष रैली की अगुवाई करते नेता।

सिरोही। किसान संघर्ष समिति की ओर से किसान नेता एवं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी ने विशाल किसान रैली को सम्बोधित करते हुए सिरोही जिले में अघोषित बिजली कटौती, पेयजल की समस्या व किसानों की मांगों को लेकर कांग्रेस की गहलोत सरकार पर जमकर हमला बोला।

उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार के राज में किसान बिजली, पानी की समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन गहलोत सरकार के कान में जू तक नही रेंग रही है। ऐसे में किसानों को मजबूर होकर कांग्रेस की गहलोत सरकार के खिलाफ हल्ला बोल करना पड रहा है।

सिरोही में किसान संघर्ष समिति ने निकाली रैली।

अगर आने वाले समय में सरकार ने बिजली, पानी व किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो इससे भी बडा जन आंदोलन करना पडेगा। किसान संघर्ष समिति कांग्रेस सरकार को आगाह करती है कि अगर किसानों की समस्याओं को दूर नहीं किया तो ये तो सिर्फ ट्रेलर है पिक्चर अभी बाकी है।

किसान नेता लुम्बाराम चौधरी ने किसानों व आमजन की समस्याओं को गिनातें हुए कहा कि कई दिनों से सिरोही में पानी कि बहुत भारी किल्लत हो रही है कई जगह तो पानी की एक बूंद भी नहीं आ रही है।

राजस्थान सरकार को बत्तीसा बांध का कार्य एग्रीमेंट के अनुसार तीन साल के अन्दर पूरा करना था मगर सरकार द्वारा बाई पास रोड बनाने में तीन साल लगा दिए। इससे बांध के कार्य निर्माण में रूकावट हुई। समय पर काम पूरा करवाती तो आज जिले में पानी कि समस्या इतनी नहीं होती। लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ता। सरकार चाहती तो बत्तीसा बांध से पाइपों के जरिये सिरोही के बांधों को जोड़कर पानी की समस्या दूर कर सकती थी मगर वर्तमान सरकार अभी भी पाइपों से बांध का पानी लेने के लिए कोई ध्यान नहीं दे रही।

चौधरी ने वर्तमान सरकार से मांग करते हुए कहा कि माही बांध का पानी सूखा प्रभावित एवं पानी की भयंकर समस्या से हमेशा ग्रसित सिरोही क्षेत्र के लिए कडाणा बांध पर गुजरात सरकार द्वारा निर्मित सुजलाम सुफलाम नहर से पूर्व में संपन्न समझौते के तहत अपने हक़ का पानी माही जल पेयजल एवं सिंचाई हेतु उपलब्ध करावे, जिससे पेयजल समस्या दूर होगी।

भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष लुम्बाराम चौधरी ने कांग्रेस सरकार से मांग कि फसल बीमा योजना के क्लेम की राशि व अकाल राहत कोष की राशि किसानों के खाते में भेजना, सिरोही जिला मुख्यालय पर अनाज व सब्जी मंडी का निर्माण कार्य जल्द से जल्द पूरा करवाने व व्यापारियों को जल्द दुकान अलोटमेन्ट करवाना, सिरोही जिले के पटवारी की खाली पोस्ट पर नई नियुक्ति करवाने, सिरोही जिले में पटवारी, अध्यापक व अन्य थर्ड ग्रेड कर्मचारियों की भर्ती जिले वाईज की जाए या जिले के स्थानीय युवाओं को बीस नम्बर अलग से दिए जाएं, जिससे आने वाले समय में सिरोही जिले की पोस्ट खाली नहीं रहेगी।

उन्होंने मांग की कि ग्राम सेवा सहकारी समिति को प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालयों पर खुलवाने, मनरेगा को कृषि से जुडवाने, तारबंदी के लिए आवेदन की नई गाइड लाइन जारी करे तथा किसानों से तारबंदी के आवेदन लेना चालू करवाए। घोषणा के बाद तुरंत ऑनलाइन पोर्टल बंद कराए, आबूपर्वत के पर्वत (पहाड़ियों) का पानी बहकर गुजरात जाता है उस पानी को बांध बनाकर रोका जाए, आबूपर्वत को ईको सेंसिटिव जॉन घोषित है उसका दायरा समान रखकर वन विभाग कि दीवार को जीरो पॉइंट माना जाए।

इसके अलावा सरकार दवारा पूरे सिरोही जिले में प्रत्येक ग्राम पंचायत पर सरकारी अनुदान से चारा डीपों खोला जाए व भूमि सम्बन्धित सेटलमेंट का ऑफिस पहले सिरोही था उसे जोधपुर स्थानांतरित कर दिया गया इससे छोटे किसानों को बड़ी भारी परेशानी होती है अत: भूमि सेटलमेंट ऑफिस को जोधपुर से पुन: सिरोही में स्थापित किया जाए।

इससे पहले जिले भर से सिरोही मुख्यालय पर राम झरोखा मैदान में किसान एकजुट होकर ट्रेक्टर रैली के रूप में सरजावाव दरवाजा से जेल चौराह, नगर परिषद्, अम्बेडर सर्कल, पुराना बस स्टेण्ड होते हुए कांग्रेस सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौपा।

किसान संघर्ष समिति की ओर भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष गणपतसिंह राठौर, परबतसिंह सिंदरथ, मदनसिंह थल, शंकर प्रजापत, दिलीपसिंह, गंगासिंह, शांतिलाल पुरोहित, भाजयुमो के पूर्व जिलाध्यक्ष हेमंत पुरोहित, भाजपा पदाधिकारी अशोक पुरोहित ने भी किसान रैली को सम्बोधित किया।

इस जन आंदोलन रैली में हिम्मत राजपुरोहित, देवीसिंह मांकरोडा, नारायणसिंह देलदर, विशनसिंह कैलाशनगर, मांगूसिंह बावली, बाबूसिंह मांकरोडा, प्रकाश पटेल, ओटाराम प्रजापत, प्रगाराम चौधरी, हमीराराम चौधरी, उकाराम मेघवाल, दीपेन्द्रसिंह पीथापुरा, दीपाराम चौधरी, गीता पुरोहित, दम्यंती डाबी, मणीदेवी, सीता घांची, ओबसिंह, अनिल प्रजापत, गोविंद माली, महेन्द्र माली, भवानीसिंह, तेजसिंह गोयली, सीताराम भील, मोहब्बत सिंह, सुरेश सगरवंशी, महिपाल चारण, ललित प्रजापत, हिम्मतसिंह, शैतानसिंह परमार, नैनसिंह राजपुरोहित, जुजाराम देवासी, नरपतसिंह, जितेन्द्रसिंह, रामसिंह ओर कई सैकडों की तादाद में किसान शामिल हुए।