अपने ही संस्थापक के इतिहास से अनजान कैसे हो सकते हैं भाजपा नेता!

भाजपा की वेबसाइट पर दी गई डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जीवनी।
भाजपा की वेबसाइट पर दी गई डॉ श्यामाप्रसाद मुखर्जी की जीवनी।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। व्हाट्सएप और फेसबुक और आम तौर पर नेहरू पर चर्चा करते भाजपाई खुद अपने नेताओं से कितने नावाकिफ हैं इसकी बानगी बुधवार को श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर देखने को मिली।

सोशल मीडिया पर भाजपा व अन्य समूहों में वायरल सिरोही के ही एक कार्यक्रम की वीडियो क्लिप में वक्ता भाजपा नेता मांगूसिंह ने भाजपा संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी के संदर्भ में जो जानकारी देते सुनाई दे रहे हैं उसे सुनने का बाद कभी बौद्धिक लोगों का मंच मानी जाने वाली भाजपा में बौद्धिकता भी आत्महत्या करती प्रतीत हुई। ये स्थिति तब है जब वे स्वयं हाल में भाजपा द्वारा लगाए गए प्रशिक्षण शिविरों में भी प्रमुख भूमिका में थे।

भाजपा द्वारा श्यामाप्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर स्मृति दिवस का आयोजन प्रस्तवित था। वायरल वीडियो ऐसे ही एक कार्यक्रम का बताया जा रहा है। इसमें अपने वक्तव्य के दौरान वक्ता मांगूसिंह पुण्यतिथि को जंयन्ति बना दिए। लेकिन, ये भूल सामान्य है।

लेकिन, इसके बाद जो कहा उससे लगता है कि भाजपा को इतिहास को किंवदंती बनाने वाले ऐसे नेताओं के लिए और कुछ नहीं तो खुद सन्गठन की वेबसाइट पढ़ना आवश्यक किया जाए। हो सके तो सांगठनिक सामान्य ज्ञान की ही परीक्षा भी ली जाए।

वक्ता के मानसपटल में शायद किसी व्यक्ति के महान होने के लिए उनके माता पिता के कम समय में ही देहावसान और बचपन की परिस्थितियां अनुकूल नहीं होना जरूरी होने की छाप बैठ चुकी है। तो उन्होंने मुखर्जी के संघर्षों की शुरुआत ही इस बात से की कि उनके बाल्यकाल की परिस्थितियां अनुकूल नहीं थी। उनके माता पिता की छांव कम समय में ही हट गई थी।

भाजपा जिलाध्यक्ष और अन्य नेता अपने नेताओं के लिए अगर अपनी वेबसाइट पढ़ने की अनिवार्यता भी लागू कर देते तो सिरोही जिला भाजपा के नेता और इन जैसे अन्य नेताओं का सांगठनिक सामान्य ज्ञान मजबूत हो जाता।
-क्या लिखा है भाजपा की वेबसाइट में?
खुद भाजपा की वेबसाइट में इसका इतिहास दिया है। इसका उपयोग जैसा चाहे किया जा सकता है। ये अंग्रेजी और हिंदी दोनो में ही है। इसके इंटरफेस पर ही श्यामाप्रसाद मुखर्जी की तसवीर के साथ भाजपा का इतिहास दिया हुआ है।
इसमें पहली लाइन में ही लिखा है कि उनकी मृत्यु के बाद उनकी माता योगमाया देवी ने कहा था कि ‘मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माता के पुत्र की मृत्यु है।’ ये इंगित करता है कि उनकी मृत्यु के बाद भी उनकी माता थीं।इसी साइट में जानकारी दी है कि वो सम्पन्न परिवार के थे और 1924 में पिता आशुतोष मुखर्जी की मृत्यु के बाद उन्होंने कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकालत के लिए नामांकन करवाया था। यानी पिता के देहावसान के समय वो 24 वर्ष के थे। इसके बाद उन्होंने 1926 में बैरिस्टरी की परीक्षा के लिए लंदन गए।

भाजपा की वेबसाइट में दिए कंटेंट में कहीं भी भाजपा नेता मांगूसिंह के कथनानुसार मुखर्जी की विपन्नता और कम समय में ही माता पिता का साया उठ जाने का जिक्र नहीं है।
ये ही हाल रहा तो जैसे जानकारियों के अभाव में  कांग्रेस नेता नेहरू से जुड़ी भ्रांतियों को नहीं दूर कर सके वैसे ही ऐसे भाजपाई मुखर्जी के साथ न्याय कर पाएंगे ये संदिग्ध दिख रहा है। ऐसे में भाजपा जिलाध्यक्ष को ऐसे नेताओं के सामान्य ज्ञान अभिवृद्धि के लिए ही सही, लेकिन नियमित प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना आवश्यक है।

जिला भाजपा में ये स्थिति पहली बार देखने को मिली है। दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर भी उनके एकात्म मानववाद की बात तो होती है, लेकिन वो है क्या उसे परिभाषित कोई नहीं कर पाते है। भाजपा अपनी वेबसाइट और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के कार्यकाल में राजस्थान के वाचनालयो रखवाई गई डॉ महेशचन्द्र शर्मा रचित एकात्म मानववाद की पुस्तकों को पढ़ने की अनिवार्यता लागू कर देती भी भाषणों में ये हालात नहीं होते।

यूँ श्यामाप्रसाद मुखर्जी खुद एक अच्छे चिंतक और विचारक थे। राजनीति, हिंदुत्वऔर नेहरू मतभेद के इतर उनके बारे में बताने के लिए इतना कुछ है कि उन्हें पढ़ लें तो खुद कांग्रेस भी इन सब पर अंगुली नहीं उठा सकती। संविधान सभा में उनके द्वारा रखे विचार मार्गदर्शक हैं।