मणिपुर में राजनीतिक संकट सुलझा : भाजपा ने फिर जीती हारी हुई बाजी

इंफाल। मणिपुर में उत्पन्न राजनीतिक संकट तेजी से करवट बदल रहा है। राज्य में सत्तारूढ़ बिरेन सिंह सरकार से हाल ही में समर्थन वापस लेने की घोषणा करने वाले नेशनल पीपुल्स पार्टी के चार विधायकों ने गुरुवार को राज्यपाल डा. नजमा हेपतुल्ला से मिलकर भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार को समर्थन देने संबंधी पत्र सौंपा।

मौजूदा संकट को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा तथा असम के वित्त मंत्री एवं पूर्वाेत्तर जनतांत्रिक गठबंधन के अध्यक्ष हिमंता बिस्वा शर्मा के साथ एनपीपी के चारों विधायक युमनाम जॉयकुमार सिंह, एल जयंतुकमार सिंह, एल हाओकिप और एन कायिसिली नयी दिल्ली में भाजपा नेताओं से मुलाकात के बाद आज ही लौटे थे।

एनपीपी के इन विधायकों ने भाजपा के तीन विधायकों समेत कुल नौ विधायकों ने बिरेन सरकार से समर्थन वापस लेने की घोषणा कर गंभीर राजनीतिक संकट उत्पन्न कर दिया था। इन विधायकों में एक एआईटीसी का विधायक एवं एक निर्दलीय विधायक भी शामिल थे।

इन सभी नौ विधायकों ने बाद में कांग्रेस से हाथ मिलाकर धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील मोर्चा (एसडीएफ) का गठन कर लिया। एसडीएफ ने तो सरकार के गठन का दावा तक पेश कर दिया लेकिन राज्यपाल ने विधानसभा में शक्ति परीक्षण कराने की उनकी मांग पर कोई ध्यान नहीं दिया। राज्य में राजनीतिक संकट का फायदा उठाने के लिए कांग्रेस के दो प्रमुख नेता अजय माकन एवं गौरव गोगोई यहां आए लेकिन कोरोना को लेकर उन्हें होटल में ही क्वारंटीन कर दिया गया।

संगमा और शर्मा ने संकट का समाधान करने के लिए पहले भी मणिपुर का दौरा किया था लेकिन उन्हें बैरंग वापस लौटना पड़ा था। दोनों नेता दोबारा आए और एनपीपी विधायकों से बात की। बाद में दोनों नेता एनपीपी के सभी विधायकों के साथ दिल्ली गए जहां पार्टी के शीर्ष नेताओं से उनकी बातचीत हुई।

इसके बाद शर्मा ने बुधवार को नई दिल्ली में घोषणा की कि एनपीपी के चारों विधायक फिर भाजपा सरकार का समर्थन करेंगे। इस बीच, राज्यपाल डॉ हेपतुल्ला ने सोशल नेटवर्क प्लेटफॉर्म पर आज घोषणा की कि एनपीपी के चारों विधायकों ने सरकार को समर्थन जारी रखने का पत्र उन्हें सौंपा है।

कांग्रेस नेताओं ने भाजपा नेताओं पर क्वारंटीन दिशा-निर्देशों का खुला उल्लंघन करने तथा राज्य नेताओं के साथ बैठक को लेकर खुले तौर पर घूमने का भी आरोप लगाया है। भाजपा के वरिष्ठ नेता राम माधव भी बुधवार को यहां आए और मुख्यमंत्री एन बिरेन सिंह से मुलाकात की।

केंद्रीय जांच ब्यूरो की एक टीम भी नई दिल्ली से आई तथा पूर्व मुख्यमंत्री एवं एसडीएफ नेता ओ इबोबी सिंह से बुधवार को उनके आवास बाबूपारा में उनसे पूछताछ की। एनपीपी की नाराजगी की प्रमुख वजह उप मुख्यमंत्री वाई जॉयकुमार को कोई विभाग नहीं दिया जाना तथा स्वास्थ्य मंत्री एल जयंतकुमार को राज्य रेफरल अस्पताल जेएनआईएमएस में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दिया जाना और कोरोना एवं स्वास्थ्य मामलों पर निर्णय लेते समय अपमानित किया जाना शामिल था।

इसके अलावा भाजपा ने गठबंधन सरकार होने के बावजूद मोर्चा बनाने से इनकार कर दिया था। साथ ही भाजपा सरकार को भाजपा सरकार करार देती रही। राज्य से राज्यसभा की इकलौती सीट के लिए हुए चुनाव में भाजपा ने कांग्रेस उम्मीदवार को शिकस्त देकर राजनीतिक उलटफेर की संकेत पहले ही दे दी थी।

कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष पर मनमाना रवैया अपना कर भाजपा की जीत सुनिश्चित करने के गंभीर आरोप लगाए लेकिन भाजपा ने फिर से एनपीपी का समर्थन हासिल कर यह साबित कर दिया कि हारी हुई बाजी जीतने में उसकी कोई सानी नहीं है।

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