कर्नाटक में भाजपा की सत्ता में वापसी

बेंगलूरु। वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर पहली बार कर्नाटक में सरकार बनाने वाली भारतीय जनता पार्टी बदलते राजनीतिक घटनाक्रम के बाद अगले कुछ दिनों में सत्ता में वापसी के लिए तैयार है।

जनता दल(सेक्युलर)-कांग्रेस गठबंधन सरकार मंगलवार को विधानसभा में बहुमत साबित करने में विफल रही और इस तरह से पिछले छह दिनों से चल रहे सियासी नाटक का अंत हो गया। मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने 18 जुलाई को सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश किया था।

उन्होंने मतदान टालने की भरसक कोशिश की जिसके कारण राज्य में छह दिनों तक अनिश्चितता की स्थिति बनी रही। कुमारस्वामी तमाम प्रयासों के बावजूद सरकार बचाने में सफल नहीं हाे सके और आज छह मतों से उनकी सरकार गिर गई। सदन में विश्वास प्रस्ताव के पक्ष में 99 और विपक्ष 105 वोट पड़े।

वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को 110 सीटें मिली थी और वह सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। पार्टी के वरिष्ठ नेता बीएस येद्दियुरप्पा ने पांच निर्दलीय विधायकों के समर्थन से कर्नाटक में पहली बार भाजपा की सरकार बनाई थी। वर्ष 2010 में भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण येद्दियुरप्पा को अपने पद से हटना पड़ा था। उन्हेें 23 दिनों तक न्यायिक हिरासत में भी रहना पड़ा था।

येद्दियुरप्पा की जगह पार्टी के वरिष्ठ नेता डीवी सदानंद गौड़ा ने सत्ता की कमान संभाली, लेकिन पार्टी में गतिरोध के कारण उन्हें भी इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद पार्टी के वरिष्ठ नेता जगदीश शेट्टार राज्य के मुख्यमंत्री बने थे।

येद्दियुरप्पा के पार्टी छोड़ने और कर्नाटक जनता पार्टी नाम से नई पार्टी बनाने के कारण 2013 में हुए विधानसभा चुनाव पर भाजपा को हार का मुंह देखना पड़ा था और राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी थी।

येद्दियुरप्पा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रभाव में भाजपा में वापस लौटे और 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी। पार्टी को 104 सीटें मिली, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े 113 को हासिल नहीं कर पाई, जिसके कारण विपक्ष में बैठना पड़ा।

इसके बाद मोदी की लहर में पार्टी ने लोकसभा चुनावों में राज्य की 28 सीटों में से 25 सीटों पर जीत हासिल की और उसका विश्वास एक बार फिर लौटा। भाजपा के लिए लोकसभा चुनाव मनोबल को बढ़ाने वाला साबित हुआ।

कर्नाटक की गठबंधन सरकार सहयोगियों के मतभेदों का सामना कर रही 14 महीने पुरानी जद (एस)-कांग्रेस गठबंधन सरकार का मंगलवार को पतन हो गया। इस तरह से भाजपा के एक बार फिर सत्ता में वापसी हो रही है और येद्दियुरप्पा एक बार फिर सत्ता की बागडोर संभाल सकते हैं।

उधर, दिल्ली में कांग्रेस ने गठबंधन सरकार के गिरने पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि कर्नाटक की सरकार गिराने के लिए भाजपा के विधायकों की खरीद फरोख्त करके नैतिकता तथा लोकतांत्रिक मूल्यों को पराजित किया है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने एक बयान जारी करके कहा कि कर्नाटक में खरीद फरोख्त के जरिए चुनी हुई सरकार गिराकर भाजपा ने अत्यधिक जघन्य उदाहरण पेश किया है। कांग्रेस और जद-एस ने अपनी लड़ाई मजबूती से लड़ी है और उसकी नैतिक जीत हुई है।

गठबंधन सरकार गिराने के लिए उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य के राज्यपाल, महाराष्ट्र सरकार तथा भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व पर आरोप लगाया और कहा कि इन सबने मिलकर कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या की है।

भाजपा ने सरकार गिराने के लिए विधायकों को मोटी रकम देने तथा मंत्री पद देने का लालच देकर यह यह नाटक कराया है। उसने विधायकों को अपने पक्ष में करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग का भी इस्तेमाल किया और सरकार गिराने के लिए केंद्र की सत्ता का दुरुपयोग किया।

वेणुगोपाल ने कहा कि उनके पास वीडियो है जिसमें भाजपा नेता विधायकों को पैसा देकर गठबंधन सरकार गिराने के लिए कह रहे हैं। भाजपा ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि राज्य के लोगों के लिए एक भ्रष्ट और अवैधानिक गठबंधन के सत्ता से हटना एक बड़ी खुशखबरी है।