आदमपुर में टूट नहीं पाया भजन लाल परिवार का सियासी तिलस्म

सिरसा। हरियाणा में आदमपुर विधानसभा सीट पर पूर्व मुख्यमंत्री चौधरी भजन लाल परिवार के आधी सदी के सियासी तिलस्म को 15वीं बार हुआ चुनाव भी नहीं तोड़ पाया। इस सीट पर भजनलाल के पौत्र भव्य बिश्नाई ने जीत दर्ज की है।

भव्य बिश्नोई ने इस उप चुनाव जीतकर पहली बार विधानसभा पहुंचने की परिवार की परम्परा को कायम रखा है। भजनलाल परिवार की तीसरी पीढ़ी विधानसभा में प्रवेश कर रही है। उन्होंने आदमपुर उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश को 15,714 मतों के अंतर से हराया हैं।

भजन लाल परिवार हालांकि अपने सियासी सफर में कई दलों कांग्रेस, हरियाणा जनहित कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में गया मगर क्षेत्र की जनता ने दिल नहीं बदला और भजन लाल परिवार को ही हर बार विधानसभा भेजा है।

हरियाणा के अस्तित्व में आने के बाद से आदमपुर विस सीट पर भजन लाल परिवार का ही कब्जा रहा है। वर्ष 1968 से अब तक 15 बार चुनाव हुए जिनमें दो बार 2008 तथा 2012 में उप-चुनाव हुए। इस सीट पर भजन लाल नौ बार, कुलदीप बिश्नोई तीन बार जबकि जसमा देवी तथा रेणुका बिश्नोई एक एक बार विधायक चुनी गई।

कुलदीप बिश्नोई के कांग्रेस छोड़ भाजपा का दामन थाम उनके इस्तीफा देने से यह सीट रिक्त होने के कारण इस सीट पर तीसरी बार उप चुनाव हुआ और इस परिवार के युवा भव्य बिश्नोई को जीत का सेहरा बांधा।

खास बात यह भी है कि आदमपुर विधानसभा सीट पर चौधरी भजनलाल, उनकी पत्नी जसमा देवी, बेटा कुलदीप और पुत्रवधु रेणुका बिश्नोई विधायक रह चुके हैं। भजनलाल, कुलदीप और रेणुका तीनों उपचुनावों में जीतकर विधायक बन चुके हैं।

कुलदीप बिश्नोई का जन्म 22 सितम्बर 1968 को हुआ। उन्होंने साल 1987 में सियासत में कदम रखा। अपने पिता चौधरी भजनलाल से राजनीति का ककहरा सीखा। 1998 में आदमुपर उपचुनाव के जरिए सक्रिय सियासत में एंट्री की और पहली बार विधायक बने। साल 2004 का भिवानी का लोकसभा चुनाव ऐतिहासिक था।

हरियाणा की सियासत में लालों की परम्परा के वाहक रहे देवीलाल, भजनलाल एवं बंसीलाल के घरानों की पौध इस चुनाव में आमने-सामने थी। इस चुनाव में चौधरी देवीलाल के पौते अजय सिंह चौटाला और चौधरी बंसीलाल के बेटे सुरेंद्र सिंह मैदान में थे। 36 बरस के कुलदीप ने करीब 2 लाख 90 हजार वोट लेते हुए सुरेंद्र सिंह को करीब 58 हजार वोटों के अंतर से पराजित किया और पहली बार सांसद बने।

वर्ष 1987 में लोकदल की लहर के बीच चौधरी भजनलाल की पत्नी जसमा देवी आदमपुर से विधायक चुनी गई थीं। आदमपुर उपचुनाव के जरिए कुलदीप बिश्नोई पहली बार साल 1968 में जबकि पत्नि रेणूका बिश्नोई 2011 में हरियाणा विधानसभा की सदस्य बनीं। इसी तरह 2008 के उपचुनाव में चौधरी भजनलाल ने जीत दर्ज की थी।

अधिकारिक तौर पर तो आदमपुर उप चुनाव भाजपा प्रत्याशी भव्य बिश्नोई व कांग्रेस प्रत्याशी जय प्रकाश के बीच लड़ा गया मगर चुनावी मैदान व सभाओं में मुकाबला कुलदीप बिश्नाई व कांग्रेस के बीच बना हुआ था। सभाओं में प्रत्याशी भव्य बिश्नोई से कहीं ज्यादा कुलदीप बिश्नोई के नाम का राग अलाप सुनने को मिल रहा था।

सियासत के जानकारों की मानें तो भाजना ने अपना चुनाव चिन्ह कमल अवश्य भव्य बिश्नोई को थमा दिया मगर चुनावी दंगल में मुखर होकर जंग कुलदीप बिश्नोई, रेणुका बिश्नोई व भव्य बिश्नोई ने ही लड़ी ओर अपने परिवार के सियासी तिलस्म को बचाने में कमयाब रहे।

आदमपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के परिणाम में एक साथ कई रिकॉर्ड बने हैं। पहला यह कि चौधरी भजनलाल परिवार ने इस सीट पर लगातार 15वीं बार जीत दर्ज की है। दूसरा आदमपुर सीट पर भजनलाल के बाद उनकी पत्नी जसमां देवी, बेटा कुलदीप बिश्रोई और पुत्रवधू रेणूका बिश्रोई के बाद अब पौता भव्य विधायक बना है।

तीसरा हरियाणा के इतिहास में एक ही परिवार से कोई चौथा सदस्य उपचुनाव जीतकर पहली बार हरियाणा विधानसभा में पहुंचा। 1993 में चंद्रमोहन कालका से उपचुनाव जीतकर पहली बार विधायक चुने गए। 1998 में कुलदीप बिश्रोई आदमपुर से उपचुनाव जीतकर विधायक बने तो 2011 में रेणूका बिश्रोई ने आदमपुर में उपचुनाव जीतकर विधायक बनने में सफलता हासिल की।

हरियाणा में इससे पहले एक परिवार से चौधरी देवीलाल के भाई साहिबराम, ओमप्रकाश चौटाला और अभय चौटाला भी पहली बार उपचुनाव जीतकर विधायक बने हैं। जयप्रकाश जेपी भजनलाल के बाद कुलदीप बिश्नोई और अब भव्य से चुनाव हारे हैं। यह पांचवां रिकार्ड है कि आदमपुर के अब तक के राजनीतिक इतिहास में पहली बार इस सीट पर कमल खिला है।

देवीलाल परिवार के बाद भजनलाल परिवार ने सबसे अधिक उपचुनाव जीतने का रिकॉर्ड बनाया है। खुद देवीलाल 1959 में सिरसा, 1974 में रोड़ी, 1985 में महम से तो ओमप्रकाश चौटाला 1970 में ऐलनाबाद, 1990 में दड़बा, 1993 में नरवाना से उपचुनाव जीते। इसी तरह से अभय सिंह चौटाला वर्ष 2000 में रोड़ी, 2010 और 2021 में ऐलनाबाद से उपचुनाव जीतकर विधायक चुने गए।

इसी तरह से चौधरी भजनलाल 2008 में आदमपुर से उपचुनाव जीते। उनसे पहले 1993 में चंद्रमोहन कालका से, 1998 में कुलदीप आदमपुर से, 2011 में रेणूका आदमपुर से और अब भव्य आदमपुर से उपचुनाव में विजयी हुए हैं। एक अन्य लाल परिवार बंसीलाल घराने से बंसीलाल 1986 में तोशाम से तो उनकी पुत्रवधु किरण चौधरी 2005 में तोशाम से ही उपचुनाव जीत चुकी हैं।

वर्ष 2014 में भारतीय जनता पार्टी के सत्ता में आने के बाद प्रदेश में चार उपचुनाव हो चुके हैं। भाजपा के पहले शासनकाल में जनवरी 2019 में जींद में उप चुनाव हुआ। जींद की सीट इनैलो के विधायक हरिचंद मिढ़ा के निधन के बाद रिक्त हुई थी। जींद उपचुनाव में भाजपा ने मिढा़ के बेटे डा. कृष्ण मिढ़ा को टिकट दी और भाजपा ने यह उपचुनाव जीता।

इसके बाद कांग्रेस के विधायक श्रीकृष्ण हुड्डा के निधन के बाद बरौदा सीट पर नवंबर 2020 में उपचुनाव हुआ, जिसमें कांग्रेस के इंदुराज नरवाल को जीत मिली। इसी तरह से जनवरी 2021 में अभय सिंह चौटाला ने ऐलनाबाद सीट से किसान आदोंलन के समर्थन में त्यागपत्र दिया।

अक्तूबर 2021 में ऐलनाबाद में हुए उपचुनाव में अभय ने फिर जीत दर्ज की। अब कुलदीप बिश्नोई के कांग्रेस को तिलांजली देने के बाद खाली हुई सीट पर उप चुनाव हुआ तो उनके बेटे भव्य बिश्नोई ने भाजपा की टिकट पर चुनाव लडक़र जीत दर्ज की है।