चंबल में कम हुईं ‘खूनी होली’,पुलिस-प्रशासन की पहल

'Bloody Holi

SABGURU NEWS |भिंड मध्यप्रदेश के चंबल संभाग में पुलिस-प्रशासन की एक पहल ने पिछले दो साल में ‘खूनी होलियों’ का ग्राफ खासा नीचे गिरा दिया है।

चंबल संभाग के भिंड, मुरैना, श्योपुर और दतिया में बड़ी संख्या में जमीनी विवाद के चलते सैकड़ों परिवारों में दुश्मनियों के मामले थे। इसी जमीनी विवाद में चंबल संभाग में हत्याओं का ग्राफ लगातर बढता जा रहा था। संभाग में दस्यु समस्या के लिए भी यही जमीनी विवाद मुख्य तौर पर जिम्मेदार था।

पुलिस अधीक्षक प्रशांत खरे ने बताया कि चंबलरेंज के तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) उमेश जोगा की सोच ने यहां के लोग में बदलाव आया है। पुलिस ने जमीन संबंधी विवाद के लिए थाना स्तर पर शिविर लगाकर दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर उनमें सुहल कराई।

इन शिविरों के कारण ही चंबल अंचल में हत्याओं का ग्राफ कम हुआ है भिंड जिले के बरोही थाना क्षेत्र के ग्राम डोगरपुरा में चिम्मन सिंह व लालजी सिंह के बीच 45 साल पहले जमीन को लेकर विवाद हुआ। जमीन विवाद के कारण इन सालों में छह हत्या हो गईं।

पिछले साल रक्षाबंधन से पहले पुलिस-प्रशासन ने दोनों परिवारों से बातचीत की। दोनों पक्षों की महिलाएं राजी हो गईं। दोनों परिवारों के पुरुष जेल में थे। दोनों पक्षों ने तय किया कि रक्षाबंधन के दिन दोनों परिवारों की बेटियां अपने-अपने भाइयों को राखी बांधने जेल जाएंगी और उपहार के रूप में अपने भाइयों से आपस में समझौता मांगेंगी। बहनों की इस शर्त के बाद दोनों पक्षों के लोगों ने दुश्मनी खत्म कर ली।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों में 30 से 40 साल पुराने दुश्मनी के ऐसे मामलों में राजीनामा हुआ है, जिनमें अब तक दर्जनों हत्याएं हो चुकी हैं। पिछले दो सालों में संभाग के चारों जिलों में हत्या की 100 वारदात कम हुई हैं। हत्या के प्रयास की वारदातें भी 578 से घटकर 325 रह गई हैं। जमीनी विवादों का निराकरण के लिए 2017 में पुलिस-प्रशासन ने संयुक्त शिविर शुरू किए। चंबल अंचल में अब तक कुल 111 शिविर लगाए गए, जिनमें एक हजार 688 जमीनी विवादों का निराकरण किया गया।

मुरैना कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार कहते हैं कि हत्या व हत्या के प्रयास जैसी संगीन वारदातों की मुख्य वजह जमीनी विवाद है, इसलिए अंचल में शिविर आयोजित किए गए। जिन परिवारों के बीच झगडा होता था, उन्हें समझाया जाता था। मुरैना जिले में भी प्रशासन ने पुलिस के साथ बैठकर समस्याओं का निराकरण किया तो अच्छे परिणाम सामने आए हैं।

मुरैना में पिछले दिनों जिले के पचेखा गांव में 30 साल पहले की एक दुश्मनी शिविर में समाप्त कराई गई। इस मामले में भी तीन हत्याएं हो चुकीं थीं और कई लोग जेल में थे। 

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