मुंबई। बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु राधे मां उर्फ सुखविंदर कौर को उनके व्यक्तित्व अधिकारों की सुरक्षा और ऑनलाइन सामग्री से प्रतिष्ठा को कथित नुकसान पहुंचने के मामले में दीवानी मुकदमा दायर करने की अनुमति दे दी है। न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने 9 अक्टूबर 2026 को पारित आदेश में उन्हें गूगल और अन्य संबंधित पक्षों के खिलाफ प्रस्तावित मुकदमा दायर करने की मंजूरी दी।
यह मामला डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कथित आपत्तिजनक सामग्री से जुड़ा है। राधे मां की ओर से अदालत में दलील दी गई कि कुछ ऑनलाइन सामग्री उनके व्यक्तित्व अधिकारों, प्रतिष्ठा और सद्भावना को नुकसान पहुंचा रही है। इसी आधार पर उन्होंने संबंधित सामग्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
अदालत ने किस आधार पर दी अनुमति?
राधे मां की ओर से पेश अधिवक्ता हसमित त्रिवेदी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता मुंबई में रहती हैं और यहीं अपनी आध्यात्मिक तथा सामाजिक गतिविधियां संचालित करती हैं। उनके अनुसार, विवादित ऑनलाइन सामग्री मुंबई में भी देखी जा सकती है और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म यहां के उपयोगकर्ताओं को अपनी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि कथित सामग्री के प्रसार से उनकी प्रतिष्ठा, सद्भावना और व्यक्तित्व अधिकारों को पहुंचने वाला नुकसान भी अदालत के क्षेत्राधिकार में आता है। उन्होंने यह भी बताया कि कुछ संबंधित पक्ष भारत से बाहर स्थित हैं और इंटरनेट पर सामग्री का प्रसार केवल मुंबई तक सीमित नहीं है।
इन दलीलों के आधार पर बॉम्बे हाईकोर्ट से लेटर्स पेटेंट के खंड 12 के तहत मुकदमा दायर करने की अनुमति मांगी गई थी। अदालत ने याचिका और प्रस्तावित वादपत्र का अवलोकन करने के बाद अनुमति प्रदान कर दी।
क्या है लेटर्स पेटेंट का खंड 12?
लेटर्स पेटेंट का खंड 12 बॉम्बे हाईकोर्ट के मूल दीवानी क्षेत्राधिकार से संबंधित है। कुछ मामलों में जब विवाद के कारण का एक हिस्सा अदालत की क्षेत्रीय सीमा के बाहर उत्पन्न होता है, तब हाईकोर्ट में मुकदमा दायर करने के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता हो सकती है।
इस मामले में अदालत ने केवल यह तय किया कि राधे मां प्रस्तावित मुकदमा बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर कर सकती हैं। आदेश में ऑनलाइन सामग्री से जुड़े उनके आरोपों की सत्यता या व्यक्तित्व अधिकारों के कथित उल्लंघन पर अंतिम फैसला नहीं दिया गया है।
डिजिटल युग में व्यक्तित्व अधिकारों का बढ़ता महत्व
व्यक्तित्व अधिकार किसी व्यक्ति की पहचान, नाम, तस्वीर, आवाज और विशिष्ट छवि के अनधिकृत इस्तेमाल से सुरक्षा से जुड़े हैं। इंटरनेट और सोशल मीडिया के विस्तार के साथ ऐसे मामलों में कानूनी विवाद बढ़े हैं, जिनमें किसी व्यक्ति की पहचान या प्रतिष्ठा का कथित रूप से गलत इस्तेमाल किया जाता है।
राधे मां का प्रस्तावित मुकदमा भी इसी व्यापक कानूनी संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अब मामले की आगे की सुनवाई में यह देखा जाएगा कि याचिकाकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों और मांगी गई राहत पर कानून के तहत क्या निर्णय लिया जाता है।



