इतिहास के पुरोधा कर्तव्यनिष्ठ साधक थे नवल किशोर उपाध्याय : डॉ. रंगा

अजमेर। स्व.डॉ नवल किशोर उपाध्याय शिक्षा के प्रति समर्पित, समाज व राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानने वाले व्यक्तित्व व कृतित्व के धनी तथा इतिहास के पुरोधा कर्तव्यनिष्ठ साधक थे। ये विचार राजकीय महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ मधुर मोहन रंगा ने स्वामी कॉन्पलेक्स के बैंक्विट हॉल में ‘नवलदीप’ पुस्तक के लोकार्पण समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में व्यक्त किए।

इस पुस्तक का लोकार्पण भारतीय इतिहास संकलन समिति की अजमेर इकाई की ओर से डॉ नवल किशोर उपाध्याय की प्रथम पुण्यतिथि पर किया गया। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि देश के जाने-माने पर्यावरणविद् एवं महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति केसी शर्मा थे। अध्यक्षता भारतीय इतिहास संकलन समिति, अजमेर के अध्यक्ष डॉ पीसी चांदावत ने की। विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव गौरव बजाड़ उपस्थित थे।

मुख्य अतिथि प्रो. केसी शर्मा ने कहा कि उपाध्याय जी ने इतिहास लेखन की विधा से जुड़कर शोधपूर्ण लेखों, पुस्तकों तथा संगोष्ठियों के माध्यम से सांस्कृतिक समन्वय एवं सामाजिक एकरूपता का भाव जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य किया है।

लोकार्पण समारोह की अध्यक्षता करते हुए डॉ.पीसी चांदावत ने कहा कि कक्षा से लेकर संगोष्ठी तक उपाध्याय जी ने अपने स्पष्ट, तथ्यात्मक, निर्भीक व ओजस्वी वाणी से अपने आप को राष्ट्रवादी इतिहास के प्रखर प्रवक्ता के रूप में स्थापित किया था।

विशिष्ट अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव गौरव बजाड़ ने कहा कि उपाध्याय जी एक श्रेष्ठ गुरु थे जिन्होंने अपने विद्यार्थियों में सदैव ऊर्जा, उमंग और उल्लास का संचार किया। वे एक कुशल मार्गदर्शक व पथ प्रदर्शक भी थे। इस अवसर पर कर्नल मनीष जोशी ने उपाध्याय जी के पारिवारिक संस्मरणों का उल्लेख किया।

कार्यक्रम में छात्र आरनव जोशी ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के अंत में भारतीय इतिहास संकलन समिति के प्रवक्ता जितेंद्र जोशी ने सभी आगंतुक अतिथियों का आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन समिति के सचिव डॉ हरीश बेरी ने किया। समारोह में मंजु उपाध्याय, सोनल उपाध्याय, डॉ नवल किशोर भाभड़ा, डॉ सूरज राव, अजय यादव, दर्शना शर्मा, डॉ. लक्ष्मी कान्त व्यास, संजय सोनी, सुशील बिस्सु समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।