मणिपुर पूर्व मुख्यमंत्री इबोबी सिंह से सीबीआई ने की पूछताछ

इंफाल। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने मणिपुर में जारी राजनीतिक संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस नेता ओ इबोबी सिंह से बुधवार को बाबूपारा स्थित निवास पर मणिपुर विकास सोसायटी (एमडीएस) में हुए 332 करोड़ रुपए के घोटाले के संबंध में पूछताछ की।

सिंह को आज इंफाल पश्चिम के लाम्फेलपाट स्थित सीबीआई अदालत के समक्ष पेश होने को कहा गया था लेकिन कोरोना वायरस (कोविड-19) महामारी के प्रकोप के कारण जारी प्रतिबंधों को देखते हुए सीबीआई टीम उनके निवास स्थान पर ही पहुंच गई।

सीबीआई पूछताछ के बाद सिंह ने कहा कि वह जांच में सहयोग करने को तैयार हैं तथा सीबीआई जो भी सूचना मांगेगी वह उपलब्ध करा देंगे। सीबीआई जांच एमडीएस में लंबे समय तक हुए घोटालों पर आधारित है जबकि सिंह करीब एक साल तक जुलाई 2013 से अगस्त 2014 तक एमडीएस के अध्यक्ष रहे थे।

कांग्रेस नेता ने कहा कि अध्यक्ष होने के नाते उनकी एमडीएस की कार्यप्रणाली से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने कहा कि जब वह अध्यक्ष थे तो कभी उनके समक्ष ना तो कोई फाइल पेश की गयी और ना ही कभी उन्हाेंने किसी चेक या दस्तावेज पर कोई हस्ताक्षर ही किए। सिंह ने कहा कि सीबीआई की टीम ने कुछ दस्तावेज मांगे और उन्होंने इसे आसानी से दे भी दिया।

उन्होंने कहा कि उनके आवास से बड़ी संख्या में नोटबंदी के दौरान की धनराशि की बरामदगी की रिपोर्ट सामने आयी थी लेकिन वास्तविकता यह है कि उक्त धनराशि एक लाख रुपए से कम थी जो उनके परिवार और दोस्तों ने उनके बेटे की शादी में उपहार के रूप में दी थी। परंपरा के अनुसार, इस तरह के पैसे को कुछ समय के लिए रखा जाता है और वह इसके बारे में भूल गए थे।

सीबीआई ने एमडीएस घोटाले के सिलसिले में सिंह से पूछताछ की। सीबीआई ने इससे पहले पिछले वर्ष नवंबर में सिंह के इंफाल और थोउबल स्थित आवासों पर छापेमारी की थी। उस समय सिंह दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ आंदोलन में शामिल होने गए थे।

गौरतलब है कि मणिपुर इन दिनों राजनीतिक संकट के दौर से गुजर रहा है। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के तीन विधायकों, नेशनल पीपुल्स पार्टी के चार विधायकों तथा एआईटीसी के एक और एक निर्दलीय विधायक के सरकार से समर्थन वापस लेने के कारण यहां राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है।

इस संकट के बीच सिंह ने एक धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील मोर्चा (एसपीएफ) के गठन की घोषणा की है तथा सरकार के गठन का दावा पेश किया है। पूर्व मुख्यमंत्री दो बार राजभवन जाकर राज्यपाल डॉ नजमा हेपतुल्ला से सदन में शक्ति परीक्षण की मांग कर चुके हैं।