एक बार फिर से चंद्रमा का गुरूर तोड़ने के लिए ग्रहण तैयार

Chandra grahan important update Thursday July 2020
Chandra grahan important update Thursday July 2020

सबगुरु न्यूज। वर्ष 2020 खगोलीय घटना के हिसाब से बहुत ही महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कभी सूर्य पर ग्रहण तो कभी चंद्र पर ग्रहण पड़ने से खगोलशास्त्री और ज्योतिषाचार्य उत्साहित हैं। जल्दी-जल्दी पड़ रहे ग्रहण को ज्योतिषियों ने कोरोना महामारी से भी जोड़ दिया है। देश के कई ज्योतिष इस महामारी का प्रभाव बढ़ने की बात कर रहे हैं तो कुछ ऐसे भी हैं जो इसके घटने का भी दावा कर रहे हैं। एक महीने बाद एक बार फिर से 5 जुलाई को चंद्र ग्रहण पड़ने जा रहा है। ज्योतिषियों के अनुसार इस चंद्र ग्रहण के बारे में बताया जा रहा है कि यह भारत में धार्मिक दृष्टि से इतना प्रभावशाली नहीं रहेगा, सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रहण के दौरान सूतक काल भी नहीं रहेंगे। बता दें कि सूतक काल उसे कह जाता है जिसमें शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

इसको उपछाया चंद्र ग्रहण भी कहा जा रहा है। यानी ग्रहण असर बहुत ही नाममात्र का होगा।‌ पिछले महीने ही देशभर में दो ग्रहण देखने को मिले थे। सबसे पहले महीने की शुरुआत में 5 जून को चंद्र ग्रहण और फिर उसके बाद 21 जून को सूर्य ग्रहण लगा था।‌ 5 जुलाई को गुरु पूर्णिमा भी है और इसी दिन चंद्र ग्रहण भी लगने वाला है, इसीलिए इसका महत्व बढ़ जाता है। यह साल का तीसरा चंद्र ग्रहण होगा और इसके बाद आखिरी चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को लगेगा। वैज्ञानिकों के अनुसार ग्रहण एक खगोलीय घटना है। चंद्र ग्रहण उस खगो‍लीय घटना को कहा जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है। वहीं सूर्य ग्रहण तब माना जाता है जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच से होकर गुजरता है।

इस बार चंद्रग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा और न सूतक काल रहेंगे

इस बार यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा और न इस दौरान सूतक काल का प्रभाव नहीं रहेगा। यह ग्रहण उपछाया चंद्र ग्रहण होगा। यह चंद्र ग्रहण दूसरे देशों में सुबह 8 बजकर 38 मिनट से लगेगा। सुबह 9 बजकर 59 मिनट में ग्रहण का परम ग्रास होगा। दिन के 11 बजकर 21 मिनट पर चंद्र ग्रहण समाप्त हो जाएगा। 5 जुलाई रविवार को लगने वाले साल के तीसरे चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 2 घंटा 43 मिनट और 24 सेकेंड तक होगी।

इस बार लोग भारत में उपछाया चंद्र ग्रहण को नहीं देख पाएंगे। ये ऑस्ट्रेलिया, ईरान, ईराक, रूस, चीन, मंगोलिया और भारत के सभी पड़ोसी देशों को छोड़कर दुनिया में दिखाई देगा। लेकिन फिर भी भारत में इस चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों में उत्सुकता बनी रहती है। बता दें कि भारत सदियों से धर्म-कर्म प्रधानता वाला देश कहा जाता है।‌ इसीलिए हर खगोलीय घटना अपने आप में महत्वपूर्ण हो जाती है। पूजा पाठ और भोजन से जुड़े कार्य किए जा सकेंगे, लेकिन फिर भी संयम बरतने और नियमों का पालन करना जरूरी है।‌ 2017 के बाद गुरु पुर्णिमा के दिन यह चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है। हालांकि यह उपछाया चंद्रग्रहण होगा, इसका चंद्रमा के आकार का कोई फर्क नहीं पड़ेगा अर्थात चंद्रमा सामान्य दिनों की तरह ही नजर आएगा।

उपछाया ग्रहण का असर सबसे कम माना गया है

आमतौर पर चंद्र ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं।‌ पूर्ण चंद्र ग्रहण,आंशिक चंद्र ग्रहण, और उपछाया चंद्र ग्रहण ।पूर्ण चंद्र ग्रहण, आंशिक और उपछाया। पूर्णिमा तिथि पर जब पृथ्वी की छाया से चंद्र पूरी तरह ढंक जाता है तो पूर्ण चंद्र ग्रहण होता है। चंद्र के कुछ भाग पर पृथ्वी की छाया पड़ती है और कुछ भाग दिखाई देता है तो आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। इन दोनों ग्रहणों का धार्मिक महत्व होता है, इनका सूतक भी रहता है।

चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूरज और चांद के बीच पृथ्‍वी घूमते हुए आती है, लेकिन वे तीनों एक सीधी लाइन में नहीं होते। ऐसी स्थिति में चांद की छोटी सी सतह पर अंब्र नहीं पड़ती। पृथ्वी के बीच के हिस्से से पड़ने वाली छाया को अंब्र कहते हैं। चांद के बाकी हिस्‍से में पृथ्‍वी के बाहरी हिस्‍से की छाया पड़ती है, जिसे पिनम्‍ब्र या उपछाया कहते हैं। इस उपछाया चंद्रहण का असर कम होने की वजह से इस दौरान शुभ कार्य भी किए जा सकते हैं।

हर ग्रहण का राशियों पर अच्छा और बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है

सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण दोनों का हमारी राशियों पर अच्छा और बुरा प्रभाव जरूर पड़ता है।‌ ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस साल 5 जुलाई को पड़ने वाला चंद्र ग्रहण धनु राशि में लग रहा है। इस दिन सूर्य मिथुन राशि में होंगे और पूर्णिमा तिथि रहेगी। धनु राशि में इस बार का चंद्र ग्रहण लग रहा है। धनु राशि में 30 जून को देव गुरु बृहस्पति ने प्रवेश किया था जहां पहले से ही राहु मौजूद हैं। ग्रहण के दौरान बृहस्पति पर राहु की दृष्टि धनु राशि को प्रभावित करेगी।

चंद्रमा कमजोर होने से मन अशांत और नकारात्मक विचार आ सकते हैं। इस अवस्था से बचने की कोशिश करें। बता दें कि ग्रहण के दौरान चंद्रमा पीड़ित हो जाते हैं। ऐसे में चंद्रमा का पूरा प्रभाव नहीं पड़ता है। ‌जिन लोगों की जन्म कुंडली में चंद्रमा कमजोर अवस्था है उन पर इसका अधिक प्रभाव देखा जाता है। इसलिए चंद्रमा को मजबूत बनाने के लिए सफेद वस्त्रों का दान करें। इस दौरान मन को बेहद शांत रखें और भगवान शिव की पूजा पाठ करें।‌

आइए जानते हैं सूतक काल के प्रभाव में क्या निषेध माना गया है

इस बार पड़ने वाले चंद्र ग्रहण में सूतक काल का प्रभाव मान्य नहीं होगा। क्योंकि यह ग्रहण भारत में नहीं दिखाई दे रहा है इसलिए इसका महत्व खत्म हो जाता है। वैसे आमतौर पर सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण पड़ने के 12 घंटे पहले ही सूतक काल लग जाते हैं। इस दौरान किसी भी तरह के शुभ काम नहीं किए जाते। मान्यता के अनुसार ग्रहण के समय व्यक्ति को खाने पीने, नित्य कर्म, तामसी भोजन और तामसी प्रवृति से दूर रहना चाहिए।

ऐसी मानता है कि सूतक के दौरान किसी भी तरह के शुभ कार्य नहीं किए जाते। इस दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह भी दी जाती है।‌ सूतक काल से ही पूजा-अर्चना के सभी कार्य बंद कर दिए जाते हैं और फिर ग्रहण की समाप्‍ति के बाद मंदिर का शुद्धिकरण करके पूजा आरंभ की जाती है।

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार